Iran Vs America: पाकिस्तान सेना प्रमुख बना डाकिया? ईरान-अमेरिका डील की रिपोर्ट लेकर जिनपिंग के शरण में शहबाज
Asim Munir China visit: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की कोशिशों में अब चीन की भूमिका खुलकर सामने आती दिख रही है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख Asim Munir सोमवार को चीन पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से होनी है। माना जा रहा है कि मुनीर ईरान-अमेरिका वार्ता की पूरी रिपोर्ट जिनपिंग को देंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पर्दे के पीछे से इस पूरी प्रक्रिया को मैनेज कर रहा है, जबकि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।

ट्रंप की पहल के बाद एक्टिव हुआ चीन
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हालिया चीन दौरे के दौरान ईरान-अमेरिका बातचीत में मदद मांगी थी। उस समय दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता लगभग बंद हो चुकी थी। इसके बाद चीन ने पाकिस्तान को बातचीत दोबारा शुरू करवाने की जिम्मेदारी दी। पहले ड्राफ्ट का आदान-प्रदान हुआ और फिर अंतरिम समझौते पर चर्चा शुरू हुई। माना जा रहा है कि चीन चाहता है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और तेल सप्लाई प्रभावित न हो।
तेहरान में ईरानी नेताओं से मिले मुनीर
आसिम मुनीर हाल ही में तेहरान गए थे, जहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और वार्ता टीम से मुलाकात की। इस दौरान अमेरिका की तरफ से भेजे गए प्रस्तावों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुनीर ने ईरानी पक्ष की राय अमेरिका तक पहुंचाई, जिसके बाद कुछ मुद्दों पर सहमति बनी। हालांकि अभी फाइनल डील नहीं हुई है। ईरान लगातार इस बात की गारंटी मांग रहा है कि भविष्य में अमेरिका समझौते से पीछे नहीं हटेगा।
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ईरान को चाहिए सुरक्षा की गारंटी
ईरान का सबसे बड़ा डर यह है कि परमाणु समझौते के बाद भी अमेरिका भविष्य में फिर से हमला या प्रतिबंध लगा सकता है। इसी वजह से तेहरान किसी बड़ी वैश्विक ताकत से सुरक्षा की गारंटी चाहता है। चीन को इसके लिए सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है क्योंकि बीजिंग और तेहरान के रिश्ते काफी करीबी हैं। ईरान को उम्मीद है कि चीन के शामिल होने से अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनेगा और समझौते का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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चीन तय कर सकता है अगला रोडमैप
बीजिंग में होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि Xi Jinping आगे की रणनीति पर फैसला ले सकते हैं। चीन पहले भी ईरान का खुलकर समर्थन करता रहा है और पश्चिमी दबाव के खिलाफ तेहरान के साथ खड़ा दिखा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हालिया तनाव के दौरान चीन ने ईरान को तकनीकी और सैटेलाइट मदद भी दी थी। ऐसे में आने वाले दिनों में चीन इस पूरे समझौते का सबसे बड़ा गारंटर बन सकता है।












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