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Amarnath Yatra 2023: क्या है 'बाबा बर्फानी' का इतिहास? क्या एक मुस्लिम ने खोजी थी अमरनाथ गुफा?

Amarnath Yatra 2023 History: बहुप्रतिक्षित अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होने जा रही है और इसका समापन 31 अगस्त को होगा। ये यात्रा काफी कठिन मानी जाती है लेकिन उसकी चिंता किए बिना बाबा के भक्त लाखों की संख्या में हर साल ये यात्रा करते हैं।

Amarnath Yatra 2023:

आस्था के मानक इस यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।इस बार भक्तों की देखरेख सीआरपीएफ नहीं बल्कि आईटीबीपी के जवान करने वाले हैं। आपको बता दें कि अमरनाथ की गुफा हिमालय की पर्वत शृंखलाओं के बीच स्थित है, जहां बाबा बर्फानी रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है

आदिकाल में इस गुफा को 'अमरेश्वर' कहा जाता था। माना जाता है कि इनका दर्शन करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि काशी विश्ननाथ जी के दर्शन करने जो पुण्य मिलता है उसका दस गुना ज्यादा पुण्य लोगों को 'बर्फानी बाबा' के दर्शन करने से प्राप्त होता है।

गड़रिए बुट्टा मलिक ने खोजी अमरनाथ गुफा!

इस गुफा की कहानी भी बहुत ज्यादा दिलचस्प है। माना जाता है कि मध्यकाल तक इस गुफा के बारे में सबको पता था लेकिन इसके बाद लोग इसे भूल गए और उनका यहां आना बंद हो गया। लेकिन 15वीं शताब्दी में एक गड़रिए बुट्टा मलिक ( मुस्लिम) को इस बारे में पता चला था और उसने फिर लोगों को इस पवित्र गुफा के बारे में बताया और उसके बाद लोग यहां दर्शन करने के लिए आने लगे।

पहली बार 'बर्फानी बाबा' ने दिए थे दर्शन

कहा जाता है कि बुट्टा मलिक अपने भेड़ों के साथ एक दिन पहाड़ों पर ऐसे ही घूम रहा था कि अचानक उसे एक महात्म मिले। बुट्टा ने उन्हें पानी पिलाया था, जिसके बाद उन्होंने गड़ेरिए को एक थैला दिया था और कहा था कि वो इसे घर ले जाकर ही खोले। बुट्टा मलिक ने घर आने पर जब वो थैला खोला तो उसकी आंखें हैरानी से फटी ही रह गईं क्योंकि उस थैले में सोने की गिन्नियां थीं। वो खुशी के मारे वापस वहां पहुंचा जब उसे वो महात्मा मिले थे।

गांववालों को इस पवित्र गुफा के बारे में बताया

वो उन्हें धन्यवाद देना चाहता था लेकिन उसे वहां कोई नहीं मिला लेकिन उसकी नजर अमरनाथ गुफा पर पड़ी और उसने वहां पर पहली बार 'बर्फानी बाबा' को देखा। वो हैरान रह गय़ा, उसने तुरंत आकर अपने गांववालों को इस पवित्र गुफा के बारे में बताया, जिसके बाद से लोग इस गुफा में दर्शन करने के लिए आने लग गए।

कुछ लोगों ने इसे झूठी कहानी कहा

हालांकि इस सच से बहुत सारे लोग इत्तफाक नहीं रखते हैं और इसे गलत ठहाराते हैं लेकिन यहां आपको बता दें कि बुट्टा के वंशज ही लंबे वक्त से इस गुफा का रखरखाव और यात्रा की व्यवस्था करते आ रहे थे लेकिन श्राइन बोर्ड के बनने के बाद अब वो ये काम नहीं करते जिसके लिए उन्होंने नाराजगी भी जताई थी क्योंकि इसी पर उनकी जीविका भी निर्भर थी।

अमरत्व का अर्थ समझाया था

आपको बता दें कि बर्फानी बाबा का शिवलिंग स्वयंभू 'हिमानी शिवलिंग' कहलाता है। इस गुफा में भगवान शिव ने पार्वती को अमरत्व का अर्थ समझाया था।

अमरनाथ गुफा 19 मीटर लंबी , 16 मीटर चौड़ी

मालूम हो कि पवित्र गुफा श्रीनगर से लगभग 141 किमी. की दूरी पर 12,756 फुट की उंचाई पर स्थित है। यहां पहलगाम और बालटाल दो मार्गों से पहुंचा जा सकता है। ये गुफा 19 मीटर लंबी , 16 मीटर चौड़ी और 11 मीटर ऊंची है।

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