कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड में लौटे हजारों प्रवासी, उनके पुनर्वास के लिए तीरथ सरकार कर रही है ये काम
देहरादून, मई 03: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के तेजी पकड़ने के साथ ही उत्तराखंड में प्रवासियों के गांव लौटने का सिलसिला तेज हो गया है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में जुटी सरकार ने इस पहलू पर गंभीरता से मंथन शुरू कर दिया है। उत्तराखंड सरकार प्रवासियों के साथ ही अन्य व्यक्तियों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराने की कोशिश कर रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लक्ष्य बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पिछले वर्ष इस योजना में केवल पांच हजार प्रवासी ही लाभान्वित हो पाए थे।

उत्तराखंड के गांव पलायन की समस्या से जूझ रहे हैं। रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते बेहतर भविष्य की तलाश में मजबूरी में यह पलायन हो रहा है। गत वर्ष 3.52 लाख प्रवासियों के वापस लौटने से न सिर्फ बंद घरों के ताले खुले, बल्कि गांवों की रंगत भी निखर आई थी।तब सरकार ने प्रवासियों को थामे रखने के मद्देनजर जून में विभिन्न विभागों की स्वरोजगार योजनाओं को एक छतरी के नीचे लाकर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 21 से 30 अपै्रल के बीच 86089 प्रवासी गांवों में लौटे हैं। देहरादून जिले में सबसे अधिक प्रवासी आए हैं, जबकि उत्तरकाशी में सबसे कम। उत्तराखंड में पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण उपजी परिस्थितियों में करीब साढ़े तीन लाख प्रवासी देश के विभिन्न हिस्सों से गांव लौटे थे। बाद में परिस्थितियां सामान्य होने पर इनमें से करीब डेढ़ लाख वापस लौट गए।
उत्तराखंड सरकार की ओर से करीब पांच हजार प्रवासियों को स्वरोजगार के लिए बैंकों से ऋण मुहैया कराया गया है। ये सभी पोल्ट्री, डेयरी, जैविक खेती, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन, होटल-ढाबा समेत अन्य व्यवसाय कर रहे हैं। साथ ही अन्य व्यक्तियों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। इसके अलावा करीब दो लाख प्रवासियों को मनरेगा में सौ दिन का रोजगार उपलब्ध होने से राहत मिली।












Click it and Unblock the Notifications