कृषि कानूनों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सचिन पायलट ने की राजस्थान के किसानों से मुलाकात

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादास्पद कृषि को लेकर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के किसानों से रविवार 10 जनवरी को मुलाकात की।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादास्पद कृषि को लेकर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के किसानों से रविवार 10 जनवरी को मुलाकात की। केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट राजस्थान के टोंक जिले में सड़क पर उतरे।

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पायलट ने दो दिन तक अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक में 20 से अधिक जनसभाएं कीं जिसमें केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के पक्ष में समर्थन जुटाने का प्रयास किया किया। पायलट ने 10 जनवरी को टोंक में कई स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित किया, जिनमें चंदलाई, लवदर, घांस, हरचंदेरा, बामोर, सोनवा, अरनियामल, काबरा, टकोली, संखना, चान, डाखिया और लांबा इलाके शामिल हैं।

इसके बाद सोमवार 11 जनवरी को राजस्थान कांग्रेस के पूर्व प्रमुख पायलट ने सोरन, देवपुरा, अरनीकेदार, मंडावर, देवली भांची, हटोना, पराना, बरौनी में जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार के तानाशाही निर्णय और बुरी नजर के किसान विरोधी कानूनों से खेती, किसान के अधिकारों को बचाने के लिए लड़ने वाले किसान भाईयों की आवाज को बुलंद करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।"

किसानों के मुद्दों पर पायलट की इन जनसभाओं को भाजपा के खिलाफ एक बार फिर से जोर आजमाइश करने और कांग्रेस के भीतर अपनी जगह को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले रविवार को, पायलट ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जयपुर के शहीद समरक पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा आयोजित एक जनसभा में भाग लिया।

इस बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ-साथ राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा समेत पार्टी के अन्य नेता शामिल हुए। सचिन पायलट ने बैठक में कहा था कि, "मोदी सरकार ने जो किया है उसके गंभीर परिणाम होंगे।" उन्होंने कहा कि, क्या इन कृषि कानूनों पर सरकार ने किसी किसान संगठन से बात की। क्या कोई किसान यह कहेगा कि उसे एमएसपी नहीं चाहिए।

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मालूम हो कि कांग्रेस ने पिछले महीने, 28 दिसंबर से 30 दिसंबर तक केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए राजस्थान के सभी जिलों में 'समवाद' कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया था।


वहीं मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के कृषि कानूनों पर स्टे लगाने को लेकर उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि विरोधी कानून पर स्टे लगाकर हमारे अन्नदाताओं के अधिकार एवं भविष्य की सुरक्षा को सुनिश्चित व भाजपा के कुचक्र को ध्वस्त कर दिया है। सरकार को यह समझ जाना चाहिए कि अन्याय व अहंकार से न्याय के संघर्ष की आवाज को दबा नहीं सकते।"

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