अब कूड़े से मिलेगी निजात, बनेगी जैविक खाद, जींद नगर परिषद की आमदनी भी बढ़ जाएगी

जींद। हरियाणा के जींद में अब लोगों को कूड़े से निजात मिलेगी। कूड़े से जैविक खाद बनेगी। इसी के साथ नगर परिषद की आमदनी में इजाफा होगा। दरअसल, इसके लिए जींद के नगर परिषद ने प्रोजेक्‍ट तैयार किया, जिसमें कूड़े से जैविक खाद बनाया जाना था। अब प्रोजेक्‍ट के अनुसार तैयारी शुरू हो गई हैं। अगर प्राेजेक्‍ट शुरू होता है तो परिषद की आमदनी में भी इजाफा होगा।

नगर परिषद ने करीब तीन साल पहले रानी तालाब के पास खाली पड़ी अपनी जमीन में सैनिटेशन पार्क बनाकर गीले कूड़े से जैविक खाद बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसे पूरे शहर में लागू करने की योजना थी। नगर परिषद अधिकारियों का दावा था कि इससे आमदनी बढ़ेगी। लेकिन ये योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। जो जैविक खाद तैयार किया गया, उसका खरीदार नहीं मिला।

jind municipal corporation

वहीं बाकी वार्डों में भी सैनिटेशन पार्क नहीं बनाए गए। कहने को तो अब भी एकमात्र सैनिटेशन पार्क में गीले कूड़े को लाकर खाद बनाने का काम जारी है। लेकिन दिखावे के लिए खेल खानापूर्ति ही हो रही है। क्योंकि बहुत कम गीला कूड़ा सैनिटेशन पार्क में लाया जाता है। इस परियोजना पर नगर परिषद ने लाखों रुपए खर्च किए थे। गुरुग्राम में जाकर नगर परिषद के अधिकारी ट्रेनिंग भी लेकर आए थे। उस समय तत्कालीन डीसी अमित खत्री के नेतृत्व में नगर परिषद ने जोर शोर से काम भी शुरू किया था।

सुशासन सहयोगी लगातार इस काम का फीडबैक भी लेती थी। नगर परिषद की तरफ से जो जैविक खाद तैयार की गई थी उसकी गुणवत्ता भी बाकायदा चेक करवाए गई थी जिसमें बता गया था कि खाद पेड़ पौधों और फसलों के लिए उपयोगी है लोगों में जैविक खाद की ब्रांडिंग हो। इसके लिए नगर परिषद ने छोटी-छोटी पैकिंग करवा कर शहर के एक वार्ड में फ्री में बंटवाई थी। ताकि लोग अपने घरों में फूलों और पौधों में इसे डालें।

अधिकारी बदले, फिर किसी ने नहीं ली रुचि
डीसी अमित खत्री का जींद से ट्रांसफर होने के बाद यह अभियान धीमा पड़ गया। वही उस समय के नगर परिषद के कुछ अधिकारियों का भी दूसरी जगह ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह जो दूसरे अधिकारी आए, उन्होंने इस काम में ज्यादा रुचि नहीं ली। धीरे धीरे जैविक खाद बनाने का काम मात्र औपचारिकता भर रह गया। कूड़े से बनने वाले खाद से लाखों रुपए महीना कमाने का दावा करने वाली नगर परिषद अधिकारी इससे एक पैसा भी इससे नहीं कमा पाई। क्योंकि लोग पैसों में तो दूर फ्री में भी जैविक खाद लेने के लिए नहीं आए। नगर परिषद की तरफ से जो जैविक खाद तैयार की जा रही है वह किसी प्रयोग में नहीं आ रही।

दावा तो रोजगार देने का भी था
नगर परिषद अधिकारियों ने योजना बनाई थी कि जो शहर में कूड़ा बीनने का काम करते हैं उनकी पहचान कर उन्हें गिला व सूखा कूड़ा अलग करके सैनिटेशन पार्क में लाने का काम दिया जाएगा जिसकी एवज में उनकी भी अच्छी कमाई हो जाएगी लेकिन किसी एक व्यक्ति को भी इससे रोजगार नहीं मिल पाया इसे अधिकारियों की लापरवाही की कही जाएगी कि लाखों रुपए का प्रोजेक्ट जो शहर की साफ सफाई और सौन्दर्यकरण के लिए अहम साबित हो सकता था, वह वह धरातल पर कामयाब नहीं हो पाया।

प्रतिदिन 100 टन कूड़ा निकलता है शहर में
करीब दो लाख आबादी वाले जींद शहर में प्रतिदिन सौ टन के लगभग कूड़ा निकलता है। इस कूड़े के उठान पूर्व मुख्य मार्गों की सफाई पर नगर परिषद हर माह 60 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करती है। ठेकेदार को डोर टू डोर जाकर घरों से सुखा हुआ गीला कूड़ा अलग-अलग कर लाना होता है। जिसमें से गीले कूड़े से जैविक खाद बनाने का प्रावधान है। लेकिन ज्यादातर लोग गीला व सूखा कूड़ा एक साथ ही नगर परिषद के वाहन में डाल देते हैं। जिससे कि लेबर सूखे कूड़े की छटाई में दिक्कत होती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+