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हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को बरसों से नहीं मिला कानूनी दर्जा, चौटाला ने दिया था, हुड्डा ने वापस लिया

चंडीगढ़। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को वैधानिक (कानूनी) दर्जा नहीं मिल सका है। इसी आयोग के माध्यम से हरियाणा सरकार की तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की तमाम भर्तियां की जाती हैं। निवर्तमान चेयरमैन भारत भूषण भारती ने अपने कार्यकाल में जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भरोसे में लेकर भर्तियों के नाम पर पैसे वसूल करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया, वहीं उनके द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों पर अब तक सवाल नहीं उठा। अब यही चुनौती नए चेयरमैन भोपाल सिंह फेस कर रहे हैं।

Haryana Staff Selection Commission didnt get legal status so far

बता दिया जाए कि, इससे पहले 16 साल पूर्व ओम प्रकाश चौटाला की तत्कालीन सरकार ने दिसंबर 2004 में हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम 2004 बनवाकर आयोग को वैधानिक मान्यता दिलाई थी। हालांकि, उसके कुछ ही समय बाद मार्च 2005 में भूपेंद्र हुड्डा की सरकार आ गई। फिर हुड्डा की सरकार ने नई विधानसभा के पहले ही सत्र में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग विधेयक 2005 सदन से पारित करवाकर आयोग को मिला कानूनी दर्जा खत्म करवा दिया।

Haryana Staff Selection Commission didnt get legal status so far

जानकार मान रहे हैं कि अब भाजपा और के जजपा गठबंधन वाली सरकार के सामने इस आयोग को फिर से कानूनी दर्जा देने की चुनौती होगी। हालांकि, यह सरकार इसी आयोग से भर्तियां तो करा रही ही है। कहा जा रहाहै कि, नए चेयरमेन भोपाल सिंह इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नई भर्तियां कर पूरे सिस्टम को नई शेप देने का काम करेंगे। नई नियुक्तियों में भाजपा के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का नजरिया भी अमल में लाया जा रहा है।

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