अब दिल्ली में नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी, सरकार ने दी मेडिकल ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी को मंजूरी

कोविड की दूसरी लहर के दौरान उत्पन्न स्थिति के बाद अब दिल्ली मेडिकल ऑक्सिजन के मामले पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगी।

नई दिल्ली, 4 अगस्त। कोविड की दूसरी लहर के दौरान उत्पन्न स्थिति के बाद अब दिल्ली मेडिकल ऑक्सिजन के मामले पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को मेडिकल ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी-2021 को मंजूरी दे दी। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि भविष्य में किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए दिल्ली को मेडिकल ऑक्सिजन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जाए। मेडिकल ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी- 2021 ऑक्सिजन उत्पादन संयंत्र लगाने, भंडारण सुविधाएं और ऑक्सिजन टैंकर लगाने के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को कई प्रकार से प्रोत्साहित करेगी। यह पॉलिसी दिल्ली में ऑक्सिजन की उपलब्धता में सुधार करने में मदद करेगी, जो पिछली कोविड लहर को संभालने में एक बड़ी बांधा बन गई थी।

Arvind Kejriwal

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल ने मेडिकल ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी-2021 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि यह पॉलिसी निजी क्षेत्र को ऑक्सिजन उत्पादन प्लांट लगाने, ऑक्सिजन टैंकरों में निवेश करने और ऑक्सिजन स्टोर करने की सुविधाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे दिल्ली में ऑक्सीजन की उपलब्धता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

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पॉलिसी का मकसद
- दिल्ली को मेडिकल ऑक्सिजन उत्पादन और आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। यह पॉलिसी दिल्ली में या तो नए विनिर्माण उद्यमों की स्थापना के माध्यम से ऑक्सिजन के उत्पादन में वृद्धि करके कोविड-19 या अन्य कारणों से स्वास्थ्य संकट के दौरान अस्पतालों या नर्सिंग होम में बिना किसी बाधा ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए मौजूदा इकाइयों में उत्पादन क्षमता का विस्तार करके किया जाएगा।

- दिल्ली में मेडिकल ऑक्सिजन के स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की सुविधा को बढ़ावा मिलेगा।

पॉलिसी का लक्ष्य
- कुल 100 मीट्रिक टन तक, न्यूनतम 50 मीट्रिक टन क्षमता का लिक्विड ऑक्सिजन जेनरेशन प्लांट लगा सकते हैं।

- न्यूनतम 10 मीट्रिक टन के नॉन-कैप्टिव ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्लांट (पीएसए/एयर सेपरेशन यूनिट प्रौद्योगिकी) और कुल 100 मीट्रिक टन तक क्षमता की स्थापना।

- अस्पतालों और नर्सिंग होम में न्यूनतम 500 एलपीएम क्षमता के कैप्टिव ऑक्सिजन जेनरेशन प्लांट (पीएसए/एयर सेपरेशन यूनिट टेकनॉलजी) की स्थापना, ताकि 200 मीट्रिक टन की कुल क्षमता तक मेडिकल ऑक्सिजन अधिकतम मांग को पूरा किया जा सके।

- 500 मीट्रिक टन की कुल क्षमता तक लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन को ट्रांसपोर्ट के लिए 10 मीट्रिक टन की न्यूनतम वहन क्षमता के क्रायोजेनिक टैंकरों की स्थापना करना।

- 1000 मीट्रिक टन की कुल क्षमता तक न्यूनतम 10 मीट्रिक टन क्षमता के एलएमओ स्टोरेज टैंकों की स्थापना करना।
पावर सब्सिडी
ऑक्सिजन प्लांट शुरू करने वाले को सरकार की तरफ से कई प्रकार की छूट और सुविधाएं दी जाएंगी। इन प्लांट को पावर सप्लाई 4 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से ही देना होगा।

एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति
प्लांट शूरू होने के एक महीने के अंदर लिक्विड ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्लांट और नॉन-कैप्टिव ऑक्सिजन प्रोडक्शन प्लांट (पीएसए/एएसयू) को सकल एसजीएसटी की भरपाई की जाएगी।

पॉलिसी की अवधि
इस पॉलिसी की अधिसूचना की तारीख से 15 दिनों के अंदर सब्सिडी/प्रोत्साहन अनुदान के लिए आवेदन लिए जाएंगे। यदि आखिरी तारीख तक आवेदन तय लक्ष्य क्षमता से अधिक आते हैं, तो इसका चयन सभी पात्र आवेदनों का ड्रॉ करके किया जाएगा। अगर आवेदन करने वालों की क्षमता, लक्ष्य क्षमता से कम है, तो सभी आवेदनों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद, हर माह 15 दिन तक आवेदन लिए जाएंगे, जब तक कि लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता है। पॉलिसी की अधिसूचना जारी होने की तारीख से अधिकतम 6 महीने तक आवेदन लिए जाएंगे।

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