मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिया आश्वासन सिफारिशों पर करेंगे विचार

रायपुर। बैरन बाजार स्थित पास्टोरल हाउस में प्रवासी मजदूरों के हित में चल रहे 'जनता का फैसला' चौपाल, नेशनल फाउंडेशन फार इंडिया और साक्रेटस द्वारा आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के दो लाख प्रवासी श्रमिकों में से पारदर्शी प्रक्रियाओं को अपनाते हुए 17 प्रवासी श्रमिकों, श्रमिकों के हित में फैसला सुनाने के लिए ज्यूरी के रूप में चयनित किया गया।

chhattisgarh jury of migrant worker met with cm bhupesh baghel

पिछले चार दिनों से चल रहा इस कार्यक्रम का प्रवासी मजदूरों के हित में फैसले लेते गुरुवार को इसका समापन हो गया। ज्यूरी द्वारा जो फैसला लिया गया उसे राज्य में लागू करने हेतु अपने फैसले की प्रति मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को गुरुवार को उनके निवास स्थान में सौंपा। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री बघेल ने फैसले को सकारात्मक कदम बताया और राज्य में प्रवासी श्रमिकों के हितों के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में ज्यूरी को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने राज्यस्तर पर बड़े पैमाने पर बांटे जा रहे भूअधिकार पट्टों के संबंध में भी जानकारी दी और कहा कि राज्य सरकार चाहती है मजदूरों का पलायन रुके।

दो तरह के होते हैं पलायन

ज्यूरी ने पाया कि प्रवासी दो तरह के होते है एक जो स्वेच्छा से पलायन करते है। दूसरे जो दुर्गति के कारण पलायन करते है। ज्यूरी का मत था कि वे सभी लोग छत्तीसगढ़ में ही रहना चाहते है और पलायन नहीं करना चाहते हैं।

दुर्गति से होने वाले पलायन को रोकने के लिए सरकार को छत्तीसगढ़ मे रोजगार बढ़ाना चाहिए एवं राज्य के प्राकृतिक संसाधनों- जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों को अधिकार देना चाहिए। इसके साथ ही सभी को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। ज्यूरी ने कहा- इसी के आधार पर हम भारत के सभी मजदूर साथियों की ओर से खुद को यह फैसला सुनाते हैं।

सरकार कर रही भरपूर प्रयास

कार्यक्रम के अंतिम दिन समापन से पहले मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रूचिर गर्ग, इंदु नेताम और पं. रविशंकर शुक्ला यूनिवर्सिटी के प्रो. आर के ब्रम्हे, नमिता मिश्रा (एफइएस) आदि ने संबोधन किया। रूचिर गर्ग ने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि अपने योजनाओं से गरीब के जेब में पैसा पहुंचाए, वे फिर से खुशहाल हो।

प्रवासी मजदूरों के हित में जनता का फैसला नामक कार्यक्रम एक साहसिक पहल है, लेकिन हम सबको मिलकर इससे आगे कि लड़ाई लड़नी पड़ेगी। प्रवासी मजदूरों का मसला मात्र केवल छत्तीसगढ़ का नहीं है, बल्कि यह देश का मसला है। इसको लेकर पूरे देश भर में आवाज उठानी पड़ेगी।

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