हरियाणा को बड़ी सौगात: करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन परियोजना मंजूर, 4 साल में होगी पूरी, जानिए कितनी आएगी लागत
करनाल। हरियाणा सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी है। करनाल से यमुनानगर के बीच प्रस्तावित 64.6 किलो मीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह रेल परियोजना अपने साथ विकास के नए अवसर लाएगी। 883 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना चार साल में पूरी होगी। जनसंपर्क एवं सूचना विभाग ने बताया कि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल की केंद्रीय रेल मंत्री के साथ हुई विभिन्न बैठकों में राज्य सरकार ने सितंबर, 2019 में प्रेषित मसौदा रिपोर्ट में रेल मंत्रालय द्वारा दिए सभी सुझावों को शामिल करने के बाद हरियाणा सरकार ने 20 जुलाई को परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दी है।

हरियाणा सरकार ने 'करनाल-यमुनानगर' नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 883.78 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की डीपीआर को हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम (एचआरआईडीसी) रेल मंत्रालय और हरियाणा सरकार ने अंतिम रूप दे दिया है। परियोजना लगभग चार वर्ष की अवधि में क्रियान्वित होगी।
करनाल स्टेशन से होगी शुरुआत
प्रस्तावित करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर मौजूदा करनाल रेलवे स्टेशन से शुरू होगी और अंबाला-सहारनपुर रेलवे लाइन पर मौजूदा जगाधरी-वर्कशॉप रेलवे स्टेशन से जुड़ेगी। अंबाला छावनी के रास्ते करनाल से यमुनानगर तक मौजूदा रेल मार्ग से दूरी 121 किलोमीटर है। करनाल और यमुनानगर के बीच सड़क मार्ग से दूरी 67 किलोमीटर है। इस प्रकार 64.6 किलोमीटर लंबी यह प्रस्तावित नई रेलवे लाइन, इन दोनों शहरों के बीच सबसे छोटा लिंक प्रदान करेगी।
बढ़ेगी कनेक्टीविटी, बढ़ेगा विकास
करनाल-यमुनानगर रेल लाइन कलानौर में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए फीडर रूट कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे करनाल-यमुनानगर क्षेत्र में लॉजिस्टिक पार्कों के विकास में मदद मिलेगी। कनेक्टीविटी बढ़ने के साथ साथ इंद्री, लाडवा और रादौर के प्लाईवुड एवं लकड़ी, औद्योगिक उत्पादों, धातु उद्योग, उर्वरकों आदि के लिए बाजार तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराएगी।
करनाल, पानीपत और मध्य हरियाणा के अन्य हिस्सों को सीधा संपर्क प्रदान करते हुए यह नई लाइन पूर्वी डीएफसी के लिए एक फीडर मार्ग के रूप में कार्य करेगी, जिसमें कलानौर स्टेशन (यमुनानगर के साथ) पर रेलवे के साथ इंटरचेंज पॉइंट होगा। इसके अलावा, यह परियोजना हरियाणा के दक्षिणी एवं पश्चिमी हिस्सों को पवित्र शहर हरिद्वार से सीधे जोड़ेगी।












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