गांव में रोजगार उत्पन्न के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने उठाया कदम, शुरू किया गया 'गोठान दर्शन'
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की गोठान योजना देशभर में माडल के रूप में उभरी है। इसके माध्यम से लोगों को गांव में रोजगार मिल रहा है। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्रांतिकारी योजना मानी जा रही है। सरकार ने इस योजना को और अधिक प्रभावित बनाने के लिए 'गोठान दर्शन' शुरू किया हैइसके तहत सुदूर वनांचल क्षेत्रों की गोठान समितियों और स्वसहायता समूहों को रायपुर लाकर आदर्श गोठनों में घुमाया जा रहा है, ताकि वे भी प्रेरित होकर अपने गोठनों में और अधिक रोजगारमूलक काम कर सकेंं। कृषि विभाग के अफसरों के अनुसार योजना के तहत अभी बस्तर संभाग के सातों जिलों पर फोकस किया गया है।

गोठान समितियों और स्वसहायता समूह के 25-25 सदस्यों को दो दिन के लिए यहां लाया जा रहा है। कांकेर और दंतेवाड़ा जिले की टीमें यहां आकर लौट चुकी है। कांकेर से आई टीम के सदस्यों को रायपुर के साथ ही महासमुंद के भी गोठान दिखाए गए।वहीं , दंतेवाड़ा से पहुंचे दल ने पहले दिन रायपुर जिले के नवागांव और बैहार गोठान, सेरीखेड़ी मल्टी-यूटिलिटी सेंटर और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में कृषि संग्रहालय का अवलोकन किया। वहीं दूसरे दिन उन्होंने दुर्ग जिले में सिकोला, केसरा, बोरेंदा, कौही और कुर्मीगुंडरा गोठान के साथ ही बोरेंदा में सोलर सामुदायिक उद्वहन सिंचाई की व्यवस्था देखी।
वनांचल से आ रही समितियों और स्वसहायता समूहों के सदस्यों को यहां मंत्रियों से सीधा संवाद करने का भी मौका मिल रहा है। कांकेर से आई टीम के साथ कृषि मंत्री रविंद्र चौबे और दंतेवाड़ा से आई टीम के साथ पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने संवाद किया। अफसरों के अनुसार मंत्रियों से सीधा संवाद होने से भ्रमण दल का उत्साह बढ़ता है।
अफसरों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में पशुओं को खुला रखने की परंपरा है। इसकी वजह से वहां के ग्रामीण गोठान निर्माण और उनका संचालन नहीं कर रहे हैं। बस्तर में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, औद्योगिक और लघु कुटीर उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। गोठान से प्राप्त होने वाले लाभों को बस्तर क्षेत्र के ग्रामीणों तक पहुंचाने, नई तकनीकों, उन्नत कृषि और उद्यानिकी को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए बस्तर संभाग के गोठान समितियों के सदस्यों को मैदानी क्षेत्रों के गोठानों और वहां सफलतापूर्वक संचालित रोजगारमूलक कार्यों के अवलोकन और भ्रमण का कार्यक्रम कृषि विभाग ने तैयार किया है।
बस्तर क्षेत्र के ग्रामीणों को कृषि गतिविधियों में नवाचार अपनाने, गोधन न्याय योजना को बेहतर ढंग से समझाने व उन्न्त कृषि को अपनाने के लिए प्रेरित करने मैदानी क्षेत्रों के गोठानों का अध्ययन भ्रमण कराया जा रहा है।'
-रविंद्र चौबे, मंत्री कृषि एवं पशुपाल विभाग












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