जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 15वां संस्करण खत्म, जानिए इस साल क्या रहा खास

जयपुर, 14 मार्च: राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में चल रहा साहित्य का उत्सव, मशहूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल खत्म हो गया है। जयपुर लिटरेटर फेस्टिवल ये 15वां संस्करण है, जो 5 मार्च से शुरू हुआ था और 14 मार्च को खत्म हुआ है। 10 दिनों तक चले इस आयोजन में ना सिर्फ देश बल्कि दुनियाभर से वक्ता शामिल हुए। साहित्य, राजनीति, विज्ञान समेत करीब-करीब हर विषय पर फेस्टिवल में चर्चा हुई। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने भारतीय उपमहाद्वीप और दुनिया भर से करीब 600 वक्ताओं और कलाकारों की मेजबानी की।

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भाषा, युद्ध, राजनीति, पर्यावरण से लेकर जलवायु परिवर्तन, लैंगिक मुद्दों, व्यापार, विज्ञान, इतिहास, सिनेमा, कला और यात्रा जैसे विविध विषयों पर बातचीत हुई। इसके अलावा, गुलाबी शहर में आमेर किले में ए मैजेस्टिक हेरिटेज इवनिंग और जयपुर म्यूजिक स्टेज जैसे कई कार्यक्रम हुए।

कार्यक्रम में ट्राइब आम्रपाली की सीईओ आम्रपाली, डिजाइनर आकांक्षा अरोड़ा, राजनीतिज्ञ स्मृति जुबिन ईरानी और उद्यमी हिमांशु वर्धन के साथ लेखक सीमा गोस्वामी ने बातचीत की। सत्र की शुरुआत में ईरानी ने बताया कि कैसे 2000 के दशक की शुरुआत में साड़ी पहनने को युवा कैसे कमतर मानते थे। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस दौरान नक्सलवाद पर बात करते हुए कहा कि अगले पांच साल में नक्सलवाद हिंदुस्तान से खत्म हो जाएगा। ईरानी ने कहा कि पहले चार राज्य नक्सल प्रभावित थे, लेकिन सख्ती के चलते महज देश के 40 जिलों में ही उनका कुछ प्रभाव रह गया है।

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उत्सव के आखिरी दिन साउंड्स ऑफ साइलेंस नामक एक सत्र दिखाया गया, जो जेनिल ढोलकिया द्वारा प्रदर्शित नाडा योग की एक शक्तिशाली यात्रा थी। सत्र के दौरान ढोलकिया ने मंत्र जाप और तिब्बती गायन उपचार के माध्यम से अपनी आंतरिक आवाज का इस्तेमाल किया, जिसमें शरीर में कुछ ऊर्जा बिंदु शामिल रहे।

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10वें दिन का राउंड अप

दसवें दिनए थाउजेंड माइल्स: टू हेल एंड बैक नामक एक सत्र में, पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी, एंकर और स्तंभकार बरखा दत्त ने लेखक चिन्मय तुम्बे के साथ बातचीत की। जहां कापड़ी ने लॉकडाउन के दौरान लाखों मजदूरों के भूखे-प्यासे सफर करने पर लिखी अपनी किताब पर बात की। ये किताब कापड़ी के 1232 किलोमीटर में सात प्रवासी कामगारों की उनके गाँव तक पहुंचने की यात्रा का दस्तावेज है। इसमें बताया गया है कि कैसे अचानक हुए लॉकडाउन के बाद लाखों लोगों के सामने एक भारी संकट था।

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