Charles Shobhraj: कौन है चार्ल्स शोभराज जिसकी जेल से रिहाई भी बन गयी चर्चा का विषय
19 सालों से काठमांडू की एक जेल में बंद, बिकिनी किलर, सीरियल किलर और सर्पेंट जैसी अलग-अलग उपाधियों वाले कुख्यात अपराधी चार्ल्स शोभराज को नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का फैसला दिया था।

जेल से रिहा होने के बाद चार्ल्स शोभराज ने कहा है कि उसे "बहुत से काम करने हैं। मैं कुछ लोगों के खिलाफ केस करुंगा। नेपाल सरकार के खिलाफ भी अदालत जाऊंगा।" हालांकि रिहाई के बाद नेपाल सरकार ने उसे अपने देश से रवाना कर दिया है। उम्मीद है कि उसे फ्रांस भेजा गया है, जहां का वह नागरिक है।
नेपाली सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार्ल्स शोभराज की रिहाई का आधार 78 साल की उम्र और उसकी दिल की बीमारी है। दूसरे वह आजीवन कारावास की अपनी सजा की अवधि, जो कि नेपाली कानून के हिसाब से बीस वर्ष होती है, का 95% हिस्सा पूरा कर चुका है। रिहाई के बाद कोर्ट ने उसे नेपाल से निर्वासित करने का भी आदेश दिया था।
मौजूदा पीढ़ी बेशक चार्ल्स और उसके कारनामों से बहुत ज्यादा वाकिफ न हो, लेकिन बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध जगत में कुख्यात रहा है। उसकी चालाकियां जहां लोगों को दांतों तले उंगलियां दबाने के लिए मजबूर कर दिया करती थीं, वहीं उसके दुर्दान्त कारनामे लोगों के रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हुआ करते थे। अपने जमाने में सेलिब्रिटी क्रिमिनल का दर्जा प्राप्त और तकरीबन 20 से 30 हत्याओं और ठगी के दर्जनों मामलों से जुड़ा चार्ल्स अपनी रिहाई की खबरों के कारण एक बार फिर चर्चा में है।
पकड़े जाने का डर
चार्ल्स शोभराज के जीवन पर आधारित फिल्म 'मैं और चार्ल्स' का प्रसिद्ध संवाद है कि 'क्रिमिनल को पनिशमेंट से ज्यादा पकड़े जाने का फीयर होता है'। यह संवाद चार्ल्स की जिंदगी पर एकदम सटीक बैठता है। एक से बढ़कर एक क्रूर अपराध करने में न हिचकने वाला और कभी किसी अपराध के लिए पछतावा न महसूस करने वाला चार्ल्स भी पकड़े जाने से बहुत डरता रहा। यही डर कभी उसे जगह बदलने को मजबूर करता, कभी नाम बदलने को तो कभी भेष बदलने को। लेकिन फिर भी वह बच न सका। अपनी अब तक की जिंदगी का आधे से अधिक हिस्सा उसने जेल में बिताया है। हालांकि जेल से भाग निकलने में भी उसे कम महारत हासिल नहीं थी। बताया जाता है कि वह भारत, अफ़ग़ानिस्तान, ग्रीस और ईरान की जेलों से भी भाग निकलने में कामयाब रहा है। कहीं अधिकारियों को चकमा देकर, तो कहीं घूस खिलाकर।
कम उम्र में ही करने लगा था अपराध
किशोरावस्था से ही छोटे-मोटे अपराध करने वाले चार्ल्स को पहली बार 19 साल की उम्र में जेल भेजा गया था। वहॉं उसकी मुलाकात दूसरे अपराधियों से हुई और उनके साथ मिलकर वह पूरी तरह अपराधों को ही अपनी जिंदगी बनाने के रास्ते पर चल पड़ा। भारत में चार्ल्स शोभराज को पहली बार 1976 में पकड़ा गया था और बारह साल कैद की सजा दिये जाने के बाद जेल में रखा गया था।
लेकिन रिहाई से दो साल पहले ही, 1986 में चार्ल्स ने बर्थडे पार्टी के बहाने जेल के सुरक्षा कर्मियों को नशीले अंगूर और बिस्कुट खिलाये और वहॉं से भाग निकला। हालांकि 22 दिन बाद ही वह गोवा में फिर पकड़ा गया। कहा जाता है कि यह फरारी और गिरफ्तारी भी चार्ल्स की ही योजना का हिस्सा थी ताकि उसकी सजा बढ़ जाये और उसे वापस थाईलैंड प्रत्यार्पित न किया जा सके। अगर उसका प्रत्यर्पण होता तो उसे वहॉं पॉंच लोगों की हत्या में मौत की सजा मिलना लाजिमी था। 1997 में उसे रिहा कर फ्रांस को सौंप दिया गया, तब तक थाईलैंड में उस पर मुकदमा चलाये जाने की समय सीमा भी खत्म हो चुकी थी।
हिंदुस्तानी बाप, विएतनामी मां और फ्रांसीसी नागरिकता
एक भारतीय सिंधी पिता और विएतनामी मॉं की संतान चार्ल्स का जन्म 6 अप्रैल 1944 को विएतनाम के साइगॉन में हुआ था। उन दोनों ने शादी भी नहीं की थी। चार्ल्स के जन्म के बाद उसके पिता ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। इस बात का उसके बाल मष्तिष्क पर काफी गहरा असर पड़ा और उसके व्यक्तित्व में एक विद्रोह की भावना आ गयी। बाद में चार्ल्स की मां ने विएतनाम में तैनात एक फ्रेंच फौजी अधिकारी से शादी कर ली थी, इसलिए उसे फ्रांसीसी नागरिकता हासिल हो गयी।
चार्ल्स की पहली पत्नी चैंटल कॉम्पैग्नन भी उसकी ही तरह आपराधिक दिमाग वाली थी। 70 दशक में दोनों ने फ्रांस को अलविदा कहकर भारत आने का फैसला किया। इसके बाद तो उनके आपराधिक जीवन में बहुत तेज रफ्तार पकड़ ली। नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल, टूरिस्टों के साथ ठगी, कारों की चोरी जैसे अनेक अपराध इस दम्पत्ति के खाते में दर्ज हुए। चैंटल के बाद उसकी जिंदगी में मैरी लेक्लेर गर्लफ्रेंड के रूप में आयी।
कत्ल दर कत्ल
चार्ल्स ने पहली हत्या 1975 में की थी, शिकार थी टेरेसा नोल्टन। उसकी बिकिनी पहनी मृत देह, एक स्वीमिंग पूल में तैरती पायी गयी थी। दूसरा कत्ल चार्ल्स ने विताजी हाकिम नामक व्यक्ति का किया था। उसके बाद उसकी गर्लफ्रेंड भी पूल में मृत मिली, जिसने मौत के वक्त बिकिनी पहनी हुई थी। इन कत्लों के बाद चार्ल्स को बिकिनी किलर के नाम से जाना जाने लगा।
उस पर भारत, थाईलैंड, मलयेशिया, नेपाल, तुर्की और ईरान जैसे देशों में करीब बीस लोगों की हत्याओं के आरोप लगे। उसका शिकार ज्यादातर लड़कियॉं व टूरिस्ट बनते थे, जिन्हें उसने जहर देकर, गला घोंटकर या जलाकर मारा था। सन् 1976 में चार्ल्स ने भारत घूमने आये एक फ्रेंच ग्रुप को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया, जिसके लिए उसे यहॉं करीब बीस साल जेल में रहना पड़ा।
भारतीय जेल से रिहाई के बाद से फ्रांस में रह रहा चार्ल्स 2003 में नेपाल आया। उसे नहीं मालूम था कि जेल की चाहरदीवारी एक बार फिर उसका इंतजार कर रही है। इस बार उसे 1975 में फर्जी पासपोर्ट पर यात्रा करने और एक कनाडाई पुरुष लॉरेंट कैरे व अमेरिकी महिला कोनी जो ब्रोंजिश की हत्या के आरोप में काठमांडू के एक कैसिनो से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के पास उसके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य और चश्मदीद गवाह थे, जिनके आधार पर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी।
जेल में ही शादी और इंटरव्यू
2008 में चार्ल्स ने जेल में रहते हुए बिग बॉस 5 की प्रतियोगी निहिता बिस्वास, जो कि उससे करीब 44 साल छोटी थी, से सगाई की घोषणा की।इसके बाद उनकी शादी की खबरें भी मीडिया की सुर्खियॉं बनीं। पिछले साल भी वह जेल से ही विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देकर चर्चा में आया। जिसके आधार पर दो ब्रिटिश पत्रिकाओं में उसके बंदी जीवन और भविष्य की योजनाओं के बारे में रिपोर्ट छपी थी। इसे लेकर भी काफी हँगामा हुआ था कि जेल में रहते हुए वह कैसे उन्हें इंटरव्यू दे पाया।
इस इंटरव्यू में चार्ल्स ने वर्जिन के मालिक रिचर्ड ब्रेंसन और अमेजन के जेफ बेजोस की एक्स-वाइफ मैकेंजी स्कॉट से मिलने की इच्छा प्रकट की थी। वह चाहता था कि इन दोनों में से कोई उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने में पैसा लगाये। प्रसिद्धि के भूखे चार्ल्स का जीवन बहुत सारी किताबों और फिल्मों का प्रेरणा स्रोत रहा है। पिछले साल उसकी जिंदगी पर आयी नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री द सर्पेंट काफी चर्चित रही थी। बताया जाता है कि सुर्खियों में बने रहने की उसकी यही चाहत नेपाल में उसकी गिरफ्तारी की वजह बनी। आत्ममुग्धता की इस प्रवृत्ति ने 78 साल की उम्र में भी उसका पीछा नहीं छोड़ा है।












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