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West Bengal: ममता राज में अत्याचार और बलात्कार झेलती महिलाएं

West Bengal: जरा सोचकर देखिए कि कुछ लोग किसी गांव में पहुंचते हैं। घर-घर जाकर सुंदर बहू बेटियों को चुनते हैं। उन्हें उठाकर ले जाते हैं और सामूहिक बलात्कार करके जब मन भर जाता है तब वापस छोड़ जाते हैं।

क्या इक्कीसवीं सदी में ऐसा सोचा भी जा सकता है? लेकिन जो हम आप सोच भी नहीं सकते वह शक्ति के उपासक उस पश्चिम बंगाल में घटित हो रहा था जहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वर्तमान समय में देश की एकमेव महिला मुख्यमंत्री हैं।

West Bengal

पश्चिम बंगाल के 24 उत्तर परगना संदेशखाली से दिल को दहला देने वाली यह खबर तो निकली मगर वह मणिपुर की तरह सनसनी पैदा नहीं कर पाई। दरअसल इस क्षेत्र से स्वयं महिलाओं ने गुहार लगाते हुए बताया है कि टीएमसी के पार्षद शेख शाहजहां, उत्तम सरदार और शिबा प्रसाद हाजरा उस क्षेत्र की महिलाओं के साथ कैसा कुकर्म करते थे। तीनों ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता हैं।

बीते दिनों राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के दौरे के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर रिपोर्ट मांगी है। वहीं इस मामले में अनुसूचित जाति आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है। उच्च न्यायालय ने इस पर क्षोभ और दुःख व्यक्त किया है। राज्य प्रशासन की नाकामयाबी को लेकर न्यायाधीशों की टिप्पणी बार-बार आ रही है। पर क्या यह मामला जितना दिख रहा उतना भर ही है?

जिस इलाके की यह घटना है वह सुंदर बन क्षेत्र के उस भाग में आता है जहां पानी के रास्ते ही पहुंचा जा सकता है। फेरी ही एक ऐसा माध्यम है जो इस स्थान को बाकी जगहों से जोड़ता है। ऐसे में इस जगह का अलग थलग पड़ना लाजमी जान पड़ता है। यह मामला शायद उछलता भी नहीं अगर राशन घोटाले में आरोपी शाहजहां शेख के यहां ईडी छापा डालने नहीं जाती।

5 जनवरी को जब ईडी संदेशखाली के सरबेडिया में शाहजहां शेख के यहां छापा मारने जाती है तो स्थानीय लोग ही ईडी की टीम का घेराव करके पथराव करने लगते हैं। इसका फायदा उठाकर टीएमसी नेता शेख शाहजहां भाग जाता है। 7 फरवरी को टीएमसी के नेता केंद्र सरकार पर बंगाल को फंड से वंचित करने को लेकर जनजाति समुदाय के साथ आंदोलन करते हैं।

परन्तु विडंबना देखिए कि शाहजहां का जयकारा लगते ही महिलाएं क्रोध से भर जाती हैं और पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों के बीच जमकर लाठी डंडे बरसते हैं। इसमें 13 लोग घायल भी होते हैं। इसके बाद महिलाओं का विरोध शेख शाहजहां और उसके सहयोगी शिबू हाजरा के खिलाफ और भड़क उठता है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सोमवार को कहा था कि संदेशखाली में निचली जातियों, मछुआरों और कृषक समुदाय की "हिंदू" महिलाओं ने स्थानीय पत्रकारों को बताया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके साथ हर रोज बलात्कार किया जाता है। मगर इसके प्रत्युत्तर में तुरंत प्रशासन की ओर से बयान आ गया कि यौन उत्पीड़न की कोई शिकायत उन तक नहीं पहुंची है।

इतना ही नहीं राज्य के महिला आयोग की एक टीम भी इलाके के दौरे के बाद यही पुष्टि कर रही है कि महिलाएं यह शिकायत जरूर कर रही थीं कि उन्हें जबरदस्ती सत्तारूढ़ पार्टी की बैठकों में रात को भी शामिल होने को कहा जाता है परंतु बलात्कार की घटना का किसी ने जिक्र नहीं किया।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले को संज्ञान में लाया था उनके वीडियो में संदेशखाली की महिलाएं रोती चीखती अपने साथ हो रहे यौन दुर्व्यवहार और टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा उनकी जमीन को हड़पने की बात ही कह रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार के मर्दों को मार देने की धमकी के भय से ये महिलाएं चुप होकर ये सारे अत्याचार और बलात्कार जैसी विभीषिका झेल रही हैं।

राज्य के उप महानिरीक्षक (बारासात रेंज) सुमित कुमार ने बताया है कि संदेशखाली में महिलाओं की शिकायतों को देखने के लिए एक डीआइजी रैंक की महिला अधिकारी की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। एसपी रैंक की एक महिला अधिकारी ने दौरा भी किया है, चार लिखित शिकायतें भी मिली हैं पर इनमें बलात्कार की कोई शिकायत नहीं है। सवाल यह है कि जब सब कुछ इतना साफ सुथरा है तो क्या उन महिलाओं का वह करुण कंद्रन गलत था? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि लंबे समय से पश्चिम बंगाल में हो रहे महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न को भय, छल, प्रपंच से दबाया जा रहा है?

कार्यवाही के नाम पर ममता सरकार ने जिला परिषद सदस्य उत्तम सरदार को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। मगर उत्तम सरदार को निलंबित करना और शेख शाहजहां जिसपर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं और केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर है उसके खिलाफ ममता दीदी का कोई एक्शन न लेना सांप्रदायिक एंगल के साथ साथ भ्रष्टाचार पर सरकार के मौन संरक्षण की ओर इशारा तो कर ही रहा है।

स्त्री समाज की पीड़ा तो यह है कि कैसे बलात्कार या यौन हिंसा की एक घटना राजनैतिक पार्टियों के कलेजे को छीलती है और उसी तरह की दूसरी घटना देश के अन्य कोने में होती है तो चुप्पी साध ली जाती है। पार्टियां गांधारी बन जाती हैं और जुबान पर लगाम लग जाती है। बलात्कार या यौन हिंसा को जाति, धर्म, भाषा, प्रदेश, पार्टी के चश्मे से देखने वाले लोग ऐसी घटनाओं के मौन समर्थक ही होते हैं।

स्त्री अस्मिता को पॉलिटिकल उपकरण की तरह इस्तेमाल करना किसी भी रूप में अस्वीकार है। जहां ये दर्दनाक घटनाएं हुई हैं उस इलाके की सांसद नुसरत जहां हैं जो काफी मुखर और सक्रिय नेता मानी जाती हैं मगर महिला होकर भी महिला व्यभिचार पर चुप्पी पीड़िताओं की उम्मीद तोड़ रही हैं।

नुसरत सोशल मीडिया अकाउंट पर वेलेंटाइन वीक मनाती नज़र आ रही हैं जो उनके क्षेत्र की महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय पर भद्दा मज़ाक जैसा लगता है। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिस तरह आज भी मणिपुर के मुद्दे पर मुखर हैं और भाजपा को आड़े हाथों लेती हैं, वैसे ही बिना किसी मोह या ढील के वह अपने राज्य के भी दोषियों को क्यों नहीं पकड़ पाती? आखिर क्या कारण है कि एक महिला होकर भी महिलाओं की पीड़ा को अनसुनी कर देती हैं?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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