यूपी में भाजपा और सपा की अग्नि परीक्षा
Uttar Pradesh Chunav: उत्तर प्रदेश से बड़ी आस लगाए बैठी भारतीय जनता पार्टी के सामने तीसरे चरण के चुनाव में सबसेबड़ी चुनौती समाजवादी चक्रव्यूह को तोड़ते हुए 2019 में जीती हुई सीटों को बचाए रखने की है।
तीसरे चरण में यादव बहुल जिन 10 लोकसभा सीटों पर 7मई को मतदान होना है,वहां 2019 मेंभाजपा ने आठ सीटें जीती थी। पहले के दो चरणों में 16सीटों पर हुए मतदान में रालोद का साथ मिला जबकि तीसरे चरण के इन क्षेत्रों में भाजपा का कोई सहयोगी दल नहीं है।

हैं। दूसरी तरफ सपा संस्थापकमुलायम सिंह यादव की अनुपस्थिति में पहला लोकसभा चुनाव लड़रहे पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खुद चुनाव मैदान में उतरकर समाजवादी पार्टी की खोई हुई प्रतिष्ठा को पाने के लिए पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं। सपा के लिए यह चुनावकरो या मरो जैसा बन चुका है।
भारतीयजनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80सीटों में से 75 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। 2014में भाजपा को 71सीटें मिली थी,लेकिन 2019 मेंसीटों की संख्या घटकर 62 रह गई थी।
दिल्ली की गद्दी पर तीसरी बार काबिज होने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश और बिहार पर अच्छी खासी मेहनतकी है और पुराने एनडीए के सहयोगियों को एक बार फिर से जोड़ा है।
उत्तर प्रदेश में परचम लहराने के लिए भाजपा ने अपना दल,ओमप्रकाश राजभर,संजय निषाद की पार्टी से गठबंधनकिया है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं को पाले में करनेके लिए रालोद को वापस एनडीए में लाई है। तीसरे चरण मेंप्रदेश की जिन दस लोकसभा सीटों पर मतदान होना है।
उनमें संभल,हाथरस, आगरा,फतेहपुर सीकरी,फिरोजाबाद, मैनपुरी,एटा, बदायूं,आंवला और बरेली शामिल हैं। इनमें भाजपा ने 2014 में 10 में से 7सीटेंजीती जबकि 2019 में उत्तर प्रदेश के बाकी क्षेत्रों से भाजपा की सीटें कम हुई।
लेकिन यादव बहुल इन क्षेत्रों में भाजपा ने अपनी साख मजबूत करतेहुए 10 में से 8 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की थी समाजवादी पार्टी केवल दोसीटों संभल और मैनपुरी तक सिमट कर रह गई थी। संभल सीट पर 2014में भाजपा को जीत मिली थी लेकिनमैनपुरी सीट 1996 से ही समाजवादी पार्टी के पास है।
तीसरे चरण वाले क्षेत्र में ओबीसीका बोलबाला है, इनमें यादव, लोध,काछी, शाक्य,मुराव समुदाय के लोग शामिल हैं। इसकेअलावा यहां मुस्लिम मतदाता भी बड़ी संख्या में दखल रखते हैं।
एटा,फिरोजाबाद,मैनपुरी, बदायूंऔर संभल जैसी लोकसभा सीटों पर यादव मतदाता निर्णायकस्थिति में है। यहां मुस्लिम वोट मिलने पर सपा उम्मीदवारमजबूत स्थिति में आ जाते हैं। संभल,बरेली, आंवला,बदायूं, फिरोजाबाद की सीट पर भी मुसलमान मतदाता अच्छी खासी पकड़ बनाए हुए हैं।
एटा में लोध मतदाता निर्णायक हैं, जबकि काछी,शाक्य और मुरई समुदाय का एटा,बदायूं और मैनपुरी में प्रभाव है समाजवादी पार्टी पहली बार लोकसभा चुनावोंमें बिना मुलायम सिंह के चुनाव मैदान में है।
शायद इसलिए भी अखिलेश यादव के लिए यह कड़ी परीक्षा है। सपा के गठन के बादसे अब तक जितने भी चुनाव हुए, उसमें मुलायम की बड़ी भूमिका रहती थी। यूपी में विपक्षी गठबंधनको अखिलेश लीड कर रहे हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों और विधानसभाचुनावों में सपा कुछ खास नहीं कर पाई है।
जमीन से जुड़े नेता होने के कारण ही मुलायम को धरती पुत्र कहा जाता रहा है।वह पार्टी को यादवों की पार्टी बनाने के साथ ही पिछड़े वर्ग की पार्टी भी बनाए रख सके। यह इसलिए संभव हो सका कि पिछड़ेवर्ग के नेताओं से उनका सामंजस्य बेहतर रहा।
इटावा,मैनपुरी, कन्नौजमें यादव बहुल सीट पर मजबूत एमवाई समीकरण के कारण वह हमेशामैदान में बाजी मारते रहे।
यादव के आलवा दूसरी प्रभावशालीपिछड़ी जातियों पर पकड़ से वह हमेशा आगे रहे।
अखिलेश कीराजनीति में कभी कभी ऐसा लगता है कि पार्टी के कोर वोटर्सयादव और मुसलमान भी कहीं उनका साथ न छोड़ दें। आज अखिलेश केसाथ आजम खान कितना हैं, ये भी समझ में नहीं आता।
ओमप्रकाश राजभर,संजय निषाद,जयंत चौधरी,दारा सिंह चौहान,केशव देव मौर्य आदि साथ छोड़ चुकेहैं। अपना दल कमेरावादी से भी उनका संबंध खराब हो चुकाहै।
समाजवादीपार्टी के लिए सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस बार बहुजनसमाज पार्टी उसके साथ नहीं
है। पिछली बार जब सपा ने बसपाऔर रालोद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तो इन दस में से दोसीटें जीतने में कामयाब हुई थी।
हालांकि इस बार कांग्रेस के साथ समझौताहुआ है लेकिन बहुजन समाज पार्टी के मैदान में उतर आने के बादलगभग सभी सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। सपा ने इस बार परिवार के बाहर के यादवों को टिकट नहीं दिया है।
यादव सपा के मुख्य समर्थक माने जाते हैं लेकिन केवल परिवारजनोंको ही टिकट दिए जाने के कारण यादवों में भी रोष है। भाजपाऔर बसपा इस मसले को जोर-जोर से प्रचारित कर रहे हैं।
मालूम हो कि सपा ने केवल पांच प्रत्याशी यादव बिरादरी के उतारे हैंजिनमें कन्नौज सीट पर खुद अखिलेश यादव,मैनपुरी से उनकी पत्नी डिंपल यादव,आजमगढ़ से चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव,बदायूं से शिवपाल यादव के बेटे आदित्ययादव और फिरोजाबाद सीट से रामगोपाल यादव के बेटे अक्षययादव चुनाव लड़ रहे हैं।
इस मसले की गंभीरता को भांपतेहुए इसका फायदा उठाने की गरज से मायावती ने अपनी पार्टीकी ओर से चार प्रत्याशी यादव बिरादरी के दिए हैं। यह एक नयासमीकरण है जो गुल खिला सकता है।
मौके की नजाकत को देखतेहुए भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि अखिलेश यादव कोज्यादा से ज्यादा उनके परिवार से जुड़ी सीटों में ही उलझाकर रखा जाए ताकि वह अन्य सीटों के लिए समय ना निकल सके।
एक दिन बाद तीसरे चरण का चुनाव प्रचार थम जाएगा। भारतीय जनतापार्टी और उसके बड़े नेता जहां चौथे चरण के चुनाव प्रचार मेंजोर-शोर से लगे हैं वहीं अखिलेश यादवअभी भी तीसरे चरण में ही फंसे हैं।
इस बीच भारतीय जनता पार्टीने 5 मई को प्रधानमंत्री की सभा इटावा में रखी है। भाजपा के रणनीतिकारोंका मानना है कि इस एक सभा से कई सीटों का काम सध जाएगा।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की योगीसरकार तथा उसके सात मंत्रियों
की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगीहै। यह चुनाव इन मंत्रियों के साथ-साथयोगी सरकार में प्रतिष्ठा और जन विश्वास की कसौटी को भीपरखने वाले हैं।
भाजपा में भी अंदर खाने रण मची हुईहै। कई सीटों पर भाजपा दो फाड़ है। आगरा जिले की फतेहपुरसीकरी लोकसभा सीट पर भाजपा के ही विधायक चौधरी बाबूलालभाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर के विरोध में खड़े हैं।
राजकुमार चाहर के विरोध में उन्होंने अपने बेटे रामेश्वरचौधरी को निर्दलीय के रूप में मैदान में उतार दिया है। इसकी गंभीरता को देखते हुए भाजपा के चाणक्य अमित शाह लगातारकई बार बड़े नेताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं।
बहरहाल सभी की निगाहें ब्रज और रुहेलखंड क्षेत्र की इन 10सीटों पर है,क्योंकि यहां जो बुनियाद रखी जाएगीइसका असर खास कर पिछड़ी जातियों के बीच अगले चरण में स्पष्टरूप से दिखाई देगा। कोर वोटर के लिहाज से यह क्षेत्र समाजवादीपार्टी का अपना इलाका है।
मुलायम सिंह की अगुवाई में मुस्लिम और यादव बहुल इन सीटों पर ही काबिज होकर समाजवादीपार्टी ने अपना राजनीतिक झंडा बुलंद किया था। पिछले दो बारसे मुंह की खा रही समाजवादी पार्टी अगर अबकी बार जीतनेसे चूक जाती है तो उसे हमेशा के लिए अपनी जमीन खोने का डरहोना स्वाभाविक है।
-
Kerala EC-BJP Seal Row: केरल में ECI के डॉक्यूमेंट पर बीजेपी की मुहर, विवाद के बाद चुनाव आयोग ने दी सफाई -
West Bengal Election 2026: बंगाल के 50% विधायक पर क्रिमिनल केस, 152 MLA करोड़पति, किस पार्टी का क्या रिकॉर्ड? -
Kal Ka Mausam: 7 दिन तक बारिश-बर्फबारी का IMD Alert, क्या Delhi-UP में गिरेगा पानी? पहाड़ी इलाकों का मौसम कैसा -
Dhurandhar Controversy: बागी MLA Pooja Pal ने कहा- 'Atiq सपा का सबसे बड़ा फाइनेंसर', AIMIM ने क्या दिया जवाब? -
Assam Chunav से पहले भाजपा को तगड़ा झटका, मौजूदा मंत्री कांग्रेस में हुईं शामिल, कौन है ये महिला नेता? -
Iran Vs America War: अमेरिका ने किया सरेंडर! अचानक ईरान से युद्ध खत्म करने का किया ऐलान और फिर पलटे ट्रंप -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’ -
Iran War Impact: क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल और LPG सिलेंडर? संसद में PM मोदी ने दिया बड़ा अपडेट












Click it and Unblock the Notifications