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PFI in Bihar: बिहार को कश्मीर बनाने की तैयारी में पीएफआई

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई पर प्रतिबंध तो लग चुका है लेकिन वह अभी भी जमीन पर सक्रिय है। बिहार में जो जानकारियां निकल कर सामने आ रही हैं उनसे लगता है कि पीएफआई बिहार को कश्मीर जैसा अशांत करना चाहता है।

Terrorist network of PFI increase in Bihar plan to made Kashmir

PFI in Bihar: महाराष्ट्र एटीएस ने साल 2022 सितंबर महीने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, इसी मामले में अब 2 फरवरी को चार्जशीट दाखिल की गई है। चार्जशीट के अनुसार, जब मज़हर मंसूर खान नाम के आरोपी को हिरासत में लिया गया तो उसके मोबाइल से "2047 तक भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने का रोडमैप'' शीर्षक से एक कॉन्फिडेंशियल फाइल मिली। पीएफआई कैसे भारत को 2047 तक इस्लामिक राष्ट्र बनाएगा, एटीएस को मिली फाइल उसी योजना का रोडमैप था।

लेकिन बात सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं है, देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतिबंधित होने के बावजूद पीएफआई देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण वह बिहार है जहां पहली बार पुलिस कार्रवाई में पीएफआई द्वारा भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की बात सामने आयी थी।

वर्ष 2022 जुलाई की बात है जब पटना से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी। उसी गिरफ्तारी के दौरान 'इंडिया 2047' नाम से पीएफआई की एक बुकलेट भी बरामद हुई थी। इस बुकलेट में अगले 25 सालों में भारत को इस्लाम के झंडे के नीचे लाने का 'आतंकी ब्लूप्रिंट' था। केरल से गिरफ्तार किए गए पीएफआई सदस्य शफीक पेयथ के रिमांड नोट में ईडी ने लिखा है कि पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की रैली में हमले की तैयारी के लिए प्रतिबंधित संगठन ने प्रशिक्षण शिविर भी लगाया था। 2013 में इंडियन मुजाहिदीन ने पटना के गांधी मैदान में मोदी की रैली में आतंकी हमला किया था। उस रैली में बम विस्फोट हुआ था।

बिहार में फैलता पीएफआई का आतंकी नेटवर्क

बिहार के मोतिहारी से खबर आई कि वहां पीएफआई के लोग अयोध्या के श्रीराम मंदिर को उड़ाने की योजना बना रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मोतिहारी से एक वीडियो वायरल किया गया था, जिसमें एक मुस्लिम युवक द्वारा श्रीराम मंदिर को क्षति पहुंचाने की बात की गई थी। यह बात भी सामने आई है कि पीएफआई बिहार के अंदर साम्प्रदायिक माहौल खराब करना चाहता है। जिसके लिए भगवा वेश पहन कर पीएफआई से जुड़े जिहादियों द्वारा टारगेट किलिंग की योजना थी। इस बीच मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण से पीएफआई में नए लड़कों की भर्ती प्रक्रिया की खबर भी सामने आई।

प्रतिबंधित है पीएफआई

केन्द्र सरकार ने आतंकवादी समूहों के साथ संबंध रखने, आतंकी फंडिंग व देश में साम्प्रदायिक सौहार्द खराब करने की कोशिश में शामिल पाए जाने के बाद पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों पर आतंकवाद विरोधी कानून के अन्तर्गत पिछले वर्ष 2022 में 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। इसके लिए गृह मंत्रालय की तरफ से अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी की गई थी।

पिछले साल 2022 की ही बात है कि एनआईए और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों ने पीएफआई से जुड़े लोगों की तलाश में देश भर में छापेमारी की और उसके बाद 250 से अधिक सदस्य सुरक्षा एजेन्सियों के हाथ लगे थे। इसमें पीएफआई का संस्थापक ई अबूबकर भी था। एनआईए की तरफ से 2017 में पत्र लिखकर गृह मंत्रालय से पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की बात की गई थी। 2022 में पीएफआई पर प्रतिबंध लगा लेकिन अब भी गुपचुप तरीके से उसने अपनी सक्रियता जारी रखी हुई है।

पीएफआई की कहानी

पीएफआई दक्षिण भारत में शुरू हुआ एक मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन है। जो धीरे धीरे पूरे देश में अपनी जड़े जमाने लगा था। इसका गठन 17 फरवरी 2007 को दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों को मिलाकर हुआ था। जिसमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, तमिलनाडु का मनिथा नीतिपसराई और कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी शामिल थे। कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में संगठन ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई और अपनी देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना में लग गया। बड़ी संख्या में मुस्लिम नौजवानों को इस्लाम के नाम पर बरगला कर उसने संगठन में शामिल किया।

पीएफआई असल में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी का ही नया रूप था जिसे 2001 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। अपनी आतंकी गतिविधियों को चलाते रहने के लिए सिमी को एक नया संगठन चाहिए था। बताया जाता है कि उसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पीएफआई तैयार किया गया। पीएफआई में बड़ी संख्या में सिमी का कैडर शामिल हुआ। ई अबूबकर जिसे पीएफआई का मास्टरमाइंड समझा जाता है वह खुद सिमी का केरल चीफ रह चुका था। सिमी का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। जिसका पूरा फायदा पीएफआई को अपने विस्तार में मिला।

बिहार में पीएफआई की चुनौती

कश्मीर में टारगेट किलिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं लेकिन बिहार में भी कुछ ऐसी ही साजिश रची जा रही थी। टारगेट किलिंग का प्लान कोई और नहीं बल्कि प्रतिबंधित संगठन पीएफआई कर रहा था और इसके लिए सशस्त्र ट्रेनिंग भी शुरू कर दी गई थी। दरअसल, प्रतिबंध लगने के बाद बिहार में पीएफआई खुद को नए तरीके से तैयार कर रहा था।

अब पीएफआई सेना की तरह बिहार में ट्रेनिग देने के लिए कई लोगों को तैयार कर रहा है और कई वीआईपी लोगों को टारगेट करने की तैयारी में जुटा हुआ है। वह बिहार में कई लोगों की हत्या करने की योजना बना रहा है और बाकायदा उन लोगों की लिस्ट भी बना ली गई है। इन सारी बातों का खुलासा आतंकी नेटवर्क की जांच करनेवाली संस्था एनआईए द्वारा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएफआई पर सरकार की कार्रवाई के बाद यह संगठन बिहार में धार्मिक सद्भाव बिगाड़ना चाहता है। अपनी मंशा को अमली जामा पहनाने के लिए पीएफआई टारगेट किलिंग पर काम कर रहा है।

खबरों में यही आ रहा है कि फरार चल रहा बिहार पीएफआई माड्यूल का सक्रिय सदस्य याकूब टारगेट किलिंग ऑपरेशन का मुख्य कर्ताधर्ता है। एनआईए और खुफिया एजेंसियों को जांच के दौरान पता चला है कि चकिया इलाके का रहने वाला पीएफआई का सदस्य याकूब बीते डेढ़ वर्षों से नए लड़कों को सशस्त्र ट्रेनिंग दे रहा था, लेकिन जब सरकार द्वारा पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया गया तो उसने अपने काम करने का तरीका बदल दिया।

पिछले डेढ़ साल में याकूब बिहार में करीब एक दर्जन ट्रेनिंग कैंप लगा चुका है। ये कैंप फुलवारी शरीफ, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, मोतिहारी, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, मधुबनी और बिहार शरीफ में संचालित किए गए थे। एनआईए को पूर्वी चंपारण के मेहसी, चकिया व मुजफ्फरपुर के बरूराज से लेकर दरभंगा तक पीएफआई की मौजूदगी के सबूत मिले हैं।

मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति ने दिया मौका

बिहार में मजबूत हुए पीएफआई के नेटवर्क की कहानी में पुलिसिया खुफिया तंत्र की असफलता की कहानी भी शामिल है। बिहार में लगातार प्रशिक्षण चलता रहा और पीएफआई पर नकेल नहीं कसी जा सकी। आज जब वह बिहार के कई जिलों में सक्रिय हो गया है, और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बन चुका है। उसके बाद केन्द्रीय एजेन्सी एनआईए को नकेल कसने के लिए सक्रिय होना पड़ा है।

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    बिहार की राजनीति मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीतिक कहानी है। राजद और जदयू दोनों पार्टियों की पहचान ही मुस्लिम तुष्टीकरण की है। ऐसे में पीएफआई ने पूरे बिहार में अपनी जड़े इतनी गहरी फैलाई हैं तो प्रदेश सरकार के राजनीतिक संरक्षण के बिना यह कैसे संभव हो सकता है?

    यह भी पढ़ें: Origin of Islam: क्या इस्लाम की शुरुआत भारत में हुई और 'ॐ' 'अल्लाह' एक हैं?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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