बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिन्दुओं की अनदेखी न करे शेख हसीना
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना चार दिन के भारत के दौरे पर हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में उनकी अगवानी की और दोनों ने साझा बयान जारी करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश संबंध आने वाले दिनों में और ऊँचाइयाँ छुएंगे। दोनों देश के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। आईटी, स्पेस और न्यूक्यिलर जैसे सेक्टर्स में बातचीत जारी है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने पीपल टू पीपल कोऑपरेशन में लगातार सुधार पर संतोष व्यक्त किया। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बैठक में बांग्लादेश के स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ तथा मैत्री दिवस पर भी चर्चा हुई।

निःसंदेह बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत के योगदान को इतिहास कभी भुला नहीं सकेगा। बांग्लादेश ने भी व्यापारिक हितों से लेकर रोटी-बेटी के सम्बंध भारत से जोड़े रखा है किन्तु बीते तीन दशकों से वहाँ के अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को शेख हसीना भी रोक पाने में पूरी तरह से विफल साबित हुई हैं। ऐसी घटनाओं के बाद वो जरूर कठोर कार्रवाई करती हैं लेकिन ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए उनकी ओर से कोई ठोस उपाय दिखाई नहीं देता। हालाँकि वर्ष 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के साथ ही हिन्दू समुदाय को नफरत की नजर से देखने और उनके साथ मारपीट करने की घटनाएं होने लगी थीं। 1974 में बांग्लादेश में हुई जनगणना में देश में 13.5 प्रतिशत हिन्दू थे जो वर्ष 2011 की जनगणना में महज 8.5 प्रतिशत रह गये। बीते 10 वर्षों में हिन्दू आबादी में और 3 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है।
बांग्लादेश में पिछले 9 वर्षों में हिन्दुओं पर 3,600 से अधिक छोटे-बड़े हमले हुए हैं जिसके कारण बांग्लादेश में हिन्दू जनसंख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। वर्ष 1990, 1995, 1999 और 2002 में वर्तमान बांग्लादेश में बड़े दंगे हुए जिनकी आँच हिन्दुओं पर आई। वर्तमान में हिन्दू मंदिरों में तोड़फोड़ करना, हिन्दुओं को उनकी जमीन से भगाना, हिन्दू लड़कियों का अपहरण और दुष्कर्म, हिन्दू बच्चों को अगवा कर उन्हें असामाजिक गतिविधियों में शामिल कराना, हिन्दुओं के घर व व्यावसायिक प्रतिष्ठान जलाना जैसे कृत्यों की बाढ़ सी आ गई है।
बांग्लादेश में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों जैसे जमात ए इस्लामी और छात्र शिबिर लगातार अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर जगह जगह हमला कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की मानें तो इसके पीछे जमीन कब्जाना बड़ी वजह है। बांग्लादेश के हिन्दुओं को जब भी निशाना बनाया जाता है तो वे अपने स्थान से पलायन कर जाते हैं। ऐसे में उनकी ख़ाली पड़ी ज़मीनों पर कट्टरपंथी कब्जा कर लेते हैं और धीरे-धीरे वह पूरा इलाका हिन्दू विहीन कर दिया जाता है। बांग्लादेश के समाचार पत्र ढाका टाइम्स ने कई बार हिन्दुओं के एकमुश्त पलायन पर इस तथ्य की ओर इशारा किया है। हिन्दुओं के घरों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आग के हवाले करना भी इसी नीति के तहत किया जा रहा है।
एक बांग्लादेशी अर्थशास्त्री के अनुसार यदि बांग्लादेश में इसी रफ्तार से हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हमले होते रहे तो 2050 तक बांग्लादेश हिन्दू विहीन हो जायेगा। इसी चिंता के मद्देनजर जुलाई में पश्चिम बंगाल में भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर बांग्लादेशी हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में वहाँ की सरकार के समक्ष मामले को उठाने की माँग की थी। असम के कई भाजपा नेता भी इसी तरह की माँग भारत सरकार से करते रहे हैं किन्तु आश्चर्य है कि केन्द्र की मोदी सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस वर्ष की ही बात करें तो बीते छह माह में बांग्लादेश में 468 हिन्दू घरों में तोड़फोड़ कर लूटपाट की गई तथा 343 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हिन्दू महाजोत की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में 2159.36 एकड़ जमीन मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जब्त कर लिया है और 419.63 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। बीते छह माह में 9,000 से अधिक हिन्दू परिवारों को उनकी जमीन से बेदखल करने की धमकी दी गई है जबकि 132 हिन्दुओं को उनके घरों से बेदखल कर दिया गया है। 100 से अधिक हिन्दुओं को जबरन गोमांस खिलाया गया है और 60 से अधिक हिन्दू धार्मिक प्रतिष्ठानों को अपवित्र कर दिया गया है।
इन सबके बाद भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना कारगर तरीके से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं जबकि वहां के अल्पसंख्यक हिन्दू शेख हसीना की ही पार्टी अवामी लीग के समर्थक हैं। राजनीतिक स्तर पर भले ही इन चरमपंथियों को संरक्षण न मिल रहा हो क्योंकि वो शेख हसीना के भी खिलाफ हैं लेकिन प्रशासन वहाँ के चरमपंथियों का साथ दे रहा है। ऐसा देखा गया है कि जब भी हिन्दुओं पर अत्याचार होता है, प्रशासन मूक दर्शक बनकर मुस्लिम कट्टरपंथियों की सहायता करता है। सम्भवतः शेख हसीना भी इन परिस्थितियों से वाकिफ हैं तभी उन्होंने भारत पहुंचते ही हिन्दू अत्याचार से परे रोहिंग्या मुसलमानों को बोझ बताते हुए भारत से मदद की गुहार लगा दी। ऐसा करके शेख हसीना ने बड़ी राजनीतिक चतुराई से बांग्लादेशी हिन्दुओं के मामले को नेपथ्य में धकेल दिया।
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को देखकर यह कहा जा सकता है कि बीते कुछ दशकों में जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक सम्बन्ध बेहतर हुए हैं, उसमें खटास आ सकती है। क्योंकि भारत सरकार भी लम्बे समय तक उनकी अनदेखी नहीं कर सकती। भारत सरकार ने सीएए कानून में संशोधन करके ये तो मान ही लिया है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं, सिखों और बौद्धों की स्थिति अच्छी नहीं है। इसलिए भारत की वर्तमान सरकार अगर ऐसी अनदेखी करती है तो भारत के बहुसंख्यक हिन्दुओं में इसका ग़लत संदेश जायेगा।
दोनों देशों के मध्य कभी कोई बड़ा विवाद नहीं रहा है किन्तु अब हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार दोनों देशों के सम्बन्धों पर असर डाल सकते हैं। शेख हसीना इसे नहीं समझती ऐसा भी नहीं है। इसलिए भारत दौरे के पहले दिन उन्होंने बयान दे दिया कि जैसे भारत में अल्पसंख्यकों के साथ कुछ मसले हैं वैसे ही बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों (हिन्दुओं) के साथ भी कुछ प्राब्लम है। यानी एक तरह से उन्होंने दोनों ओर की स्थितियों को बराबर ठहराने का प्रयास किया है, जो कि तथ्य और सत्य से बिल्कुल परे है। शेख हसीना को सच्चाई को स्वीकार करके बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के जान माल की सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिए। इस्कॉन पर हमले के बाद भारत ही नहीं पूरी दुनिया उनसे इतना तो उम्मीद कर ही सकती है कि वो अपने देश में अल्पसंख्यकों को इस तरह मुस्लिम कट्टरपंथियों के हाथों खत्म नहीं होने देंगी।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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