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Ram Navami 2023: काल्पनिक नहीं, मानव सभ्यता के मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम

भारत में भले ही ब्रिटिश इतिहासकारों ने राम को एक मिथकीय चरित्र बताकर उनकी महिमा घटाने का प्रयास किया हो परंतु राम नि:संदेह मानव सभ्यता के ऐसे ऐतिहासिक चरित्र हैं जो मर्यादा के साथ पुरुषार्थ के प्रतीक हैं।

ram navami 2023

चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोग रामनवमी के रूप में मनाते हैं। हालांकि भारत में राम के अस्तित्व को लेकर न्यायालय तक लड़ाई लड़ी गई। राम के ऐतिहासिक महत्व, साँस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के विमर्श में विभिन्न तथ्य पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही ढूँढे। उनके आधार पर तर्क गढ़े गए। और आज भी राम की वास्तविकता, आध्यात्मिकता और उनके विष्णु अवतार स्वरूप, मात्र भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सनातनधर्मियों के लिए आधार स्तम्भ है।

जब हम राम की बात करते हैं तो स्वाभाविक रूप से बात आती है - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की शिक्षा के श्रेष्ठ उदाहरण की। मर्यादापुरुषोत्तम राम न सिर्फ भारतीय राज्यों में प्रतिस्थापित हैं बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों विशेषकर नेपाल, लाओस, बांग्लादेश, म्यांमार, मॉरीशस, कंपूचिया, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा और थाईलैंड आदि की लोक-संस्कृति और ग्रंथों में भी राम उसी भाव से प्रतिष्ठापित हैं। श्रीराम ऐसे अवतारी चरित्र हैं जो सनातन संस्कृति की चेतना की प्रदीप्त लौ हैं। जो इस संस्कृति को सदियों से जीवन्त बनाए हुए है।

यह विडंबना ही है कि राम जन्मभूमि को लेकर उसी क्षेत्र में विश्वास - अविश्वास की बहस होती है, जहाँ जनमानस राम को अपना आराध्य होने के साथ - साथ उन्हें अपना पूर्वज और पितृ पुरुष भी मानते आए हैं। वहीं दूसरी ओर बेल्जियम से मिशनरी प्रचार के लिए भारत आए ईसाई फादर कामिल बुल्के श्रीराम की प्रमाणिकता पर शोध करते हैं। तार्किक व वैज्ञानिक प्रविधि आधारित उनका शोध संकलन "रामकथा: उत्पत्ति और विकास" इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि राम वाल्मीकि के कल्पित पात्र नहीं, बल्कि इतिहास पुरूष थे।

राम का जन्म स्थान वर्तमान भारत के अयोध्या में माना गया। जहाँ भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। किन्तु राम की चेतना और उनका चरित अर्थात्‌ रामकथा मात्र भारत में नहीं, बल्कि यह देश की सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय साँस्कृतिक अवबोधन से संपृक्त कथा है। इससे संबंधित हॉलैन्ड के डॉक्टर होयकास का एक प्रसंग उद्धृत किया जाने योग्य है। डॉ. होयकास संस्कृत और इंडोनेशियाई भाषाओं के विद्वान थे। एक दिन वह केंद्रीय इंडोनेशिया में शाम के समय टहल रहे थे। उन्होंने देखा एक मौलाना जिनके बगल में कुरान रखी है, इंडोनेशियाई रामायण पढ़ रहे थे। डॉ. होयकास ने उनसे पूछा, मौलाना आप तो मुसलमान हैं, आप रामायण क्यों पढ़ते हैं। उस मौलाना ने एक वाक्य में इस बात का उत्तर दिया-"और भी अच्छा मनुष्य बनने के लिये!"

विभिन्न शोध में यह सामने आया कि पूरी दुनिया में रामायण से संबंधित लगभग 300 से अधिक रूप आज भी प्रचलित हैं। इस सम्बंध में आज भी कई शोध चल रहे हैं। काल गणना के अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर की सहायता से नवीनतम शोध के अनुसार श्रीराम के जन्म का दिन और समय अभी के प्रचलित कैलेंडर के अनुरूप निकाला गया है। इसके अनुसार 5114 BCE, 10 जनवरी के दिन दोपहर 12.05 पर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। वेदों पर वैज्ञानिक शोध करने वाले संस्थान आई-सर्व ने यह शोध प्रकाशित किया है।

हालांकि कुछ शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि श्रीराम का जन्म 7323 BCE में हुआ था। चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। लेकिन ब्रह्मांड के विस्तार को हिन्दू पंचांग अपने काल गणना में सूर्य - चंद्र नक्षत्रीय गणना को दिनमान के समय घटा बढ़ा कर समाविष्ट करते हैं। यह दिनमान का अन्तर 72 वर्ष में 1° का होता है। जो कालगणना में लगभग 80 से 100 वर्षों में पूरे 24 घण्टे का हो जाता है। इसी कारक के प्रभाव से अभी का प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर में सूर्य गणना आधारित हिन्दू पर्वों की तारीख में भेद होता है। जैसा कि मकर संक्रांति के संबंध में देखा जा सकता है।

राम जन्म की वास्तविक गणना निकालने के लिए कुछ वैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने 'वाल्मीकि' द्वारा रामजन्म के समय बताए गए ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर से जो डेट निकाली है। वह 4 दिसंबर 7323 BCE (ई.पू.) अर्थात आज से 9339 वर्ष पूर्व सम्भावित है। वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में बाल कांड 18/श्लोक 8, 9 के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को हुआ था। साथ ही उन्होंने यह भी उद्धृत किया है - उस दिन पुनर्वसु नक्षत्र में पांच ग्रह अपनी उच्च स्थिति में थे। इस प्रकार सूर्य मेष में 10° अंश, मंगल मकर में 28° अंश, ब्रहस्पति कर्क में 5° अंश पर, शुक्र मीन में 27°अंश पर एवं शनि तुला राशि में 20° अंश पर था।

राम के जन्म की भारतीय पंचांग तिथि तो नियत है। पर राम नाम के अर्थ और महत्व को लेकर भी कई विमर्श होते हैं। 'राम' वास्तव में क्या हैं? 'राम' अग्नि, पुरुष, ऋतु, शक्ति को सहज धारण करने वाले मर्यादापुरुषोत्तम के प्रतीक हैं! भगवान राम का नामकरण रघुवंशियों के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने किया था। वशिष्ठ के अनुसार राम शब्द दो बीजाक्षरों अग्नि बीज और सोम बीज से मिलकर बना है। ये अक्षर मस्तिष्क, शरीर और चेतना को शक्ति प्रदान करते हैं। बीज अक्षर ही लाखों मंत्रों को प्राण ऊर्जा देते हैं।

इस आधार पर कहा गया है कि 'राम नाम का तीन बार उच्चारण हजारों देवताओं को स्मरण करने के समान है'। यह महाभारत में भी वर्णित है कि एक बार भगवान शिव ने कहा था कि राम का नाम तीन बार उच्चारण करने से सहस्र देवताओं के नामों का उच्चारण करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। शिव स्वयं भी ध्यानावस्था में भगवान राम के नाम का ही उच्चारण करते हैं। राम् स्वर ध्वनि विज्ञान के बीज अक्षर में वाक् ऊर्जा का सूत्र है।

पौराणिक आख्यान असल में कालातीत यथार्थ होते हैं। इसे सत्य और असत्य की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। इतिहास होने के लिए जो समय सीमा की निश्चितता है, ऐसे प्रसंग उस देश काल निर्धारण के परे लोक के लिए सर्वकालिक, सार्वभौमिक रूप में स्थापित हो जाते हैं। राम भी उसी प्रकार विभिन्न ग्रंथों में, भिन्न काल में देश की सीमाओं से ऊपर लोक के मानस में व्याप्त हैं। राम का अर्थ है 'प्रकाश'। किरण, कान्ति एवं आभा जैसे शब्दों के मूल में राम् है। अग्नि तत्व बीज अक्षर 'रा' का अर्थ है आभा और सोम तत्व बीजाक्षर 'म' का अर्थ है मैं, मेरा और मैं स्वयं। अर्थात मेरे भीतर प्रकाश, मेरे अनाहत् में प्रकाश।

रामायण एक शाश्वत कथा के रूप में लोक मानस में अंकित है। हम सब भी राम चरित के प्रसंग सुनते हुए बड़े हुए हैं। जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हमारे दादी - नानी के बचपन में रहे होंगे। रामायण का भावार्थ आध्यात्मिक ज्ञान से भरा हुआ है। रामकथा आभ्यंतरिक प्रकाश अर्थात्‌ आत्मज्ञान प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ की अनुशंसा करता है। आत्मज्ञान से ही सभी प्रकार की नकारात्मकता और मन के विरूपण पर नियंत्रण सम्भव हो सकता है। राम को अन्य किसी विशेषण से नहीं अलंकृत नहीं किया गया, उन्हें मर्यादापुरुषोत्तम कहा गया। राम की कथा, मर्यादा के साथ पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देती है। यही सनातन धर्म है और राम इस धर्म के कालातीत सर्वस्वीकृत सर्वोच्च लोकनायक।

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