Ram Mandir: 22 जनवरी को कांग्रेस क्या करेगी?

Ram Mandir: कांग्रेस नेतृत्व ने जब राम जन्मभूमि मन्दिर में रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा का बायकाट करने का एलान किया था, तो उसने सोचा नहीं होगा कि उसका यह स्टैंड कितना भारी पड़ेगा|

कांग्रेस के लगभग सभी प्रादेशिक नेताओं ने आमन्त्रण को स्वीकार करके अपने नेतृत्व को बता दिया है कि धर्म के मामले में वह उसका अनुसरण करने को तैयार नहीं है|

ram mandir inauguration What will Congress do on 22 january

सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने आमन्त्रण को स्वीकार करते हुए आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद का आभार जताया, उसके बाद तो कांग्रेस के कई नेता उनकी लाईन अपनाते दिखाई दे रहे हैं| ग्वालियर के पुराने कांग्रेस नेता आनन्द शर्मा ने सिर्फ इस बात पर कांग्रेस छोडी है कि उनके नेतृत्व ने श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बायकाट किया है| दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का भी कठोर बयान आया है|

हालांकि कांग्रेस ने रामजन्मभूमि मन्दिर पर वही लाईन अपनाई है, जो जवाहर लाल नेहरू के वक्त से कांग्रेस अपनाती चली आ रही थी| कांग्रेस की सरकारों ने अदालतों में लगातार विश्व हिन्दू परिषद के उस दावे का विरोध किया था कि विवादास्पद ढांचा ही रामजन्म भूमि है| विश्व हिन्दू परिषद ने 1989 में 9 नवंबर को शिलान्यास का एलान किया था, तो कांग्रेस की नारायण दत्त तिवारी सरकार विहिप को रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट गई थी|

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हालांकि हाईकोर्ट ने शिलान्यास पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था| तब कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी ने कहा था कि अगर शिलान्यास किया गया, तो पहला फावड़ा उनकी पीठ पर चलेगा| वह तो अरुण नेहरु थे, जिन्होंने राजीव गांधी को शिलान्यास के लिए राजी किया| राजीव गांधी ने बूटा सिंह को लखनऊ भेजा, जिन्होंने नारायण दत्त तिवारी से अनुमति देने को कहा, ताकि शाहबानों केस के बाद हिन्दुओं में बढ़ी नाराजगी को दूर किया जा सके|

9 अगस्त 2019 के सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद और उससे कुछ पहले राम जन्मभूमि मंदिर का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस के कई नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया था कि विवादास्पद ढांचे पर ताले भी राजीव गांधी ने खुलवाए, और 1989 का शिलान्यास भी राजीव गांधी ने करवाया| लेकिन 1989 में हुआ शिलान्यास बाबरी ढाँचे के मध्य वाले उस गुबंद से 192 मीटर दूर था, जिसे रामजन्मभूमि का स्थान माना जाता है|

अब बन कर तैयार हो रहे मन्दिर के सिंहद्वार के स्थान पर शिलान्यास हुआ था, जिसे विश्व हिन्दू परिषद ने एक दलित कामेश्वर प्रसाद से पहली ईंट रखवा कर शिलान्यास करवाया था| अगर राजीव गांधी ने ताले खुलवाए और शिलान्यास करवाया तो कांग्रेस से गलती कहाँ हुई| गलती तब हुई, जब रामसेतु के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार ने कोर्ट में यह हल्फिया बयान दिया कि राम के पैदा होने के ही प्रमाण नहीं हैं|

नेहरू की जिस गलती ने हिन्दुओं को कांग्रेस से दूर करना शुरू किया था, उसे राजीव गांधी ने अगर सुधारना शुरू किया था, तो उनकी पत्नी सोनिया गांधी और बेटे राहुल गांधी ने 2004 से 2014 के बीच पूरी तरह बिगाड़ दिया| 2004 के बाद से कांग्रेस ने पूरी तरह मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति शुरू कर दी, जिसका नतीजा यह निकला कि कांग्रेस में हिन्दुओं की वकालत करने वाला कोई नहीं बचा|

एक समय था, जब कांग्रेस में हर धारा के लोग होते थे, वे पार्टी के भीतर अपनी धारा की पैरवी करते थे| पार्टी सभी विचारधाराओं का संगम थी| गांधी से पहले अगर बाल गंगाधर तिलक कांग्रेस में हिन्दुओं की पैरवी करते थे, तो आज़ादी के समय तक पंडित मदन मोहन मालवीय और राजगोपालाचारी, गोविन्द वल्लभ पन्त, सरदार पटेल, डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद, पुरुषोतम दास टंडन, लाल बहादुर शास्त्री, और एनवी गाडगिल जैसे नेता हिन्दुओं की पैरवी करते थे| वे कांग्रेस के भीतर हिन्दू विरोधी स्टैंड लेने से रोकने में सक्षम थे| लेकिन 2004 के बाद कांग्रेस में कोई नेता ऐसा नहीं बचा जो पार्टी के भीतर हिन्दू हितों की रक्षा में बोल सके|

कांग्रेस अब पूरी तरह से वामपंथी रंग में रंग गई है| श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमन्त्रण इन दोनों ही पार्टियों ने ठुकराया है| कांग्रेस और वामपंथियों को छोड़कर इंडी एलायंस के सभी दलों ने अयोध्या की राह पकड़ ली है| शुरू में न्योता ठुकराने वाले अखिलेश यादव ने भी अपनी गलती सुधार ली है|

जब प्राण प्रतिष्ठा हो रही होगी, तब जयश्रीराम के नारे से बिदकने वाली ममता बनर्जी भी कोलकात्ता में मन्दिरों के दर्शन की यात्रा पर निकलेंगी| तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने अपने शहरों में मन्दिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों में घूम रहे होंगे| अरविन्द केजरीवाल ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले दिल्ली के मन्दिरों में सुन्दरकाण्ड का पाठ शुरू करवा दिया है| आम आदमी पार्टी के नेता भाजपा नेताओं के साथ बैठ कर सुन्दरकाण्ड का पाठ कर रहे हैं|

नीतीश कुमार प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में अपनी सरकार और पार्टी का प्रतिनिधि भेज रहे हैं| उद्धव ठाकरे ने उस समय नासिक के कालाराम मन्दिर में संकीर्तन रखा है| मान्यता है कि भगवान राम अपने वनवास के समय उसी जगह रूके थे, जहां कालाराम मंदिर है| नरेंद्र मोदी ने भी प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिन का विशेष पूजा पाठ इसी कालाराम मन्दिर से शुरू किया था|

यहाँ तक कि बीजू जनता दल ने भी जगन्नाथ पुरी में 11 दिन की परिक्रमा शुरू कर दी है| दस हजार से ज्यादा लोग इस परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं| यानी जब देश भर में लोग मन्दिरों में पूजा पाठ करके दिवाली मना रहे होंगे, उसमें कांग्रेस और वामपंथियों को छोड़कर सारे राजनीतिक दल भी शामिल होंगे| शरद पवार, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविन्द केजरीवाल, नीतीश कुमार, सभी ने कांग्रेस को मझधार में छोड़ दिया है| इन सभी ने अपने कार्यक्रमों के जरिए 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा को मान्यता दे दी है|

हो सकता है दक्षिण भारत में असर कुछ कम देखने को मिले, लेकिन यह तय है कि समूचे उत्तर भारत में 22 जनवरी को दिवाली मनाई जाएगी| सवाल यह कि 22 जनवरी को जब देश भर के हिन्दू दीवाली मना रहे होंगे, मन्दिरों, बाजारों, गलियों, मोहल्लों , घरों में दीपमाला हो रही होगी| उस दिन कांग्रेस क्या कर रही होगी, या कांग्रेस के हिन्दू नेता क्या कर रहे होंगे| अगर 22 जनवरी को राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा किसी मंदिर में जाते हैं, तो किसी हद तक अपनी और अपनी पार्टी की साख बचा लेंगे|

कांग्रेस के ही बड़े नेता आचार्य प्रमोद ने तो कहा है कि कांग्रेस पर भगवान राम का प्रकोप शुरू हो चुका है| गांधी परिवार ने हिन्दू कांग्रेसियों को भारी मुश्किल में डाल दिया है| भाजपा इस मुश्किल का फायदा उठाने में जुट गई है वह उन कांग्रेसियों को साध रही है, जो कांग्रेस नेतृत्व के आत्मघाती निर्णय से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं| रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने कांग्रेस के राम भक्त आचार्य प्रमोद को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्योता भिजवा दिया है| आने वाले दिनों में ऐसे अन्य कांग्रेसी भी न्योता हासिल करेंगे|

दो शंकराचार्यों से प्राण प्रतिष्ठा का विरोध करवाना भी कांग्रेस को उलटा पड़ गया है| विरोध करने वाले शंकराचार्य कांग्रेस की लाईन वाले हैं| सारे वामपंथी पत्रकार ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वानन्द का इंटरव्यू लेने दौड़ रहे हैं| उसी समय उनके वे पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं, जब वह 2014 और 2019 में वाराणसी में मोदी का विरोध करने गए थे|

जगन्नाथ पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती तो बड़े गर्व से कहते हैं कि सोनिया गांधी का नाम उन्होंने सुवर्णा रखा है| लेकिन सोनिया तो कभी शंकराचार्य से मिलने भी नहीं गई होगी, जबकि मोदी और अमित शाह के उनके चरणों में बैठे फोटो वायरल हो रहे हैं| जगन्नाथ पुरी में शंकराचार्य की पीठ के सामने से नवीन पटनायक की पार्टी परिक्रमा पथ पर हर दिन 10 हजार लोगों से परिक्रमा करा रही है|

दोनों बड़बोले शंकराचार्यों ने हिन्दुओं में ही अपनी भद्द पिटवा ली, क्योंकि आम हिन्दू को इससे कोई मतलब नहीं कि कौन आ रहा है, और कौन नहीं आ रहा, कौन समर्थन कर रहा है, कौन विरोध कर रहा है| वह इसी बात से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि 500 साल के संघर्षों के बाद राम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण हो गया|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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