Rahul in Rajasthan: राहुल गांधी की यात्रा से राजस्थान की राजनीति गरमाई
यदि कांग्रेस पूर्वी राजस्थान की उन 37 सीटों को बचा ले, जहां पिछली बार वह जीती थी तो यह भारत जोड़ो यात्रा की बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन सवाल है राहुल की यात्रा के लिए गहलोत और पायलट का जो युद्धविराम हुआ है, वह कब तक टिकेगा।

Rahul in Rajasthan: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्यप्रदेश से होते हुए राजस्थान पहुंच गई, और राजस्थान से हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी| दिल्ली में राहुल गांधी चार दिन विश्राम करेंगे और फिर हरियाणा पंजाब से गुजरते हुए अपने गन्तव्य कश्मीर पहुंचेंगे|

मध्यप्रदेश, राजस्थान और हरियाणा वे राज्य हैं, जहां अगले एक-सवा साल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं| हरियाणा में भाजपा के बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ करवाने की तैयारी चल रही है| वैसे अगले 15 महीनों में लोकसभा के चुनाव भी होने हैं|
लेकिन राहुल गांधी की यात्रा के दौरान पड़ने वाले हिन्दी हार्ट लैंड के इन तीन राज्यों की चर्चा इसलिए जरूरी है, क्योंकि राजस्थान पहुंचते ही उन्होंने कहा कि जब दक्षिण भारत से उनकी यात्रा शुरू हुई थी, तो कहा जा रहा था कि हिन्दी हार्ट लैंड में पहुंचते ही यात्रा कमजोर पड़ जाएगी| राहुल गांधी का दावा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्हें ज्यादा जोश दिखाई दिया, इन राज्यों की जनता ने खाने पीने तक के इंतजाम खुद किए|
भले ही कांग्रेस ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को चुनावी राजनीति से अलग रखने का दावा किया है, लेकिन रास्ते में राहुल गांधी का हर भाषण भाजपा पर हमले से शुरू होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले से खत्म होता है| इसलिए इस यात्रा का मकसद भविष्य के चुनावों में कांग्रेस की संभावनाए तलाशना और बढाना है|
हिन्दी हार्ट लैंड के इन तीन राज्यों में कांग्रेस का सब से बड़ा दांव राजस्थान में लगा हुआ है, क्योंकि राजस्थान उन दो राज्यों में से एक है, जहां कांग्रेस की सरकार बची है| राजस्थान की कांग्रेस इसे एक अवसर के तौर पर देख रही है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने जनाक्रोश यात्रा शुरू कर के चुनावी बिगुल बजा दिया है|
राहुल गांधी के राजस्थान पहुंचते ही भाजपा ने उन पर हमले तेज कर दिए| प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने उनसे तब तक हर रोज एक सवाल पूछने का एलान किया है, जब तक वह राजस्थान में रहेंगे| पहला ही सवाल ऐसा है कि गहलोत सरकार और राहुल गांधी दोनों कटघरे में खड़े हो गए हैं| पूनिया ने पूछा है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में आपने खुद सरकार बनने के दस दिन बाद किसानों का कर्ज माफ़ करने का वायदा किया था, अब तो 1447 दिन हो गए, वह वायदा कब पूरा होगा?
पूनिया के आने वाले सवाल क्या होंगे, यह तो नहीं पता, लेकिन उनके इस कदम ने राम जेठमलानी की याद ताज़ा कर दी| 1987 में जब बोफोर्स घोटाला खुला था, तब राम जेठमलानी राजीव गांधी को कटघरे में खड़ा कर रहे थे| राजीव गांधी से जब एक पत्रकार ने जेठमलानी के बयान पर पूछा, तो राजीव गांधी ने कहा था कि मुझे हर भोंकते कुत्ते को जवाब देने की जरूरत नहीं है|
इस पर राम जेठमलानी ने राजीव गांधी को चिठ्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने लिखा था, "डियर प्राइम मिनिस्टर, आप भाग्यशाली हैं कि मैं भौंकने वाला कुत्ता हूँ, कोई शिकारी कुत्ता नहीं, लेकिन याद रखिएगा कुत्ता तभी भौंकता है, जब चोर को देखता है|" आगे उन्होंने लिखा था कि वह अगले तीस दिन तक हर रोज उनसे दस सवाल पूछेंगे| उन सवालों का जवाब देना होगा या इस्तीफा|
अगले 30 दिन तक इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर जेठमलानी के 10 सवाल छपते रहे| बाकी अख़बारों ने भी ये सवाल छापने शुरू कर दिए थे| राजीव गांधी को तब तक साफ़ छवि का नेता माना जाता था, लेकिन हर रोज़ उठते सवालों के बीच राजीव की चुप्पी ने देश की हवा बदल दी थी| ये सवाल अगले चुनावों में निर्णायक साबित हुए, राजीव गांधी चुनाव हार गए| सतीश पूनिया के ये दस सवाल राजस्थान में कांग्रेस को भारी पड़ सकते हैं, क्योंकि सवाल उनके चुनावी वायदों और गहलोत सरकार की कारगुजारियों पर होंगे, जिनमें मुस्लिम तुष्टिकरण प्रमुख है|
राहुल गांधी वैसे तो राजस्थान के सात जिलों में से गुजरेंगे, लेकिन पूर्वी राजस्थान के अगल बगल के सारे जिलें जोड़ लें तो झालावाड, कोटा, बारा, बूंदी, टौंक, सवाई माधोपुर,करोली, दौसा, धोलपुर, भरतपुर और अलवर कुल ग्यारह जिले बनते हैं| यह सारा वह इलाका है, जिसकी बदौलत 2018 में कांग्रेस सत्ता में आई थी| इनमें से वसुंधरा राजे का झालावाड जिला छोड़ दें, जहां की चारों सीटें भाजपा जीती थी|
बाकी के दस जिलों की 52 सीटों में से 37 कांग्रेस जीती थी, यानि कांग्रेस ने 2018 में जो 99 सीटें जीतीं थी, उनमें से 37 तो इस इलाके से जीतीं थीं जहां से राहुल गांधी गुजरेंगे| भाजपा को इन 52 में से सिर्फ 11 सीटें मिलीं थी| यानि यह इलाका कांग्रेस का गढ़ है| यह संयोग है कि राहुल गांधी का राजस्थान में प्रवेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार को चुनौती देने वाली वसुंधरा राजे के झालावाड जिले से हुआ|
2018 चुनाव में झालावाड़ की एक भी सीट पर कांग्रेस नहीं जीती| यहां की झालरापाटन सीट से खुद वसुंधरा राजे विधायक हैं| यह वो सीट है, जहां 1998 के बाद से कांग्रेस नहीं जीती है| वसुंधरा राजे लगातार 4 बार से यहां से चुनाव जीत रही हैं| पिछले चुनाव में भी राजे लगभग 35 हजार वोटों से चुनाव जीती थीं| जिले की बाकी तीनों सीटें भी भाजपा बड़े मार्जिन से जीती थी| झालावाड़ से भले ही यात्रा तय रूट के अनुसार निकल रही हो, लेकिन कांग्रेस इसे अपने लिए यात्रा के साथ-साथ राजनीतिक मौके के रूप में भी देख रही है|
2017 में सचिन पायलट ने बारां से झालावाड़ तक 100 किलोमीटर की यात्रा की थी| वसुंधरा राजे यहां 2 बार यात्रा निकाल चुकी हैं| तो कुल मिला कर कांग्रेस राहुल गांधी की यात्रा का अगर यह फायदा उठा लेती है कि वह इन 37 सीटों को बचा ले, तो यह भारत जोड़ो यात्रा की बड़ी उपलब्धि होगी| लेकिन सवाल यह है कि राहुल की यात्रा के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट का जो युद्धविराम हुआ है, यात्रा गुजर जाने के बाद वह कितने दिन चलेगा|
अब चलते चलते बता दें कि झालावाड़ से निकलने के बाद लगभग 10 किलोमीटर तक राहुल गांधी पैदल नहीं चलेंगे क्योंकि जंगल के इस रास्ते में तीन टाईगर है| राहुल गांधी हरियाणा से होते हुए दिल्ली पहुंचेंगे और 24 से 28 दिसंबर तक दिल्ली में विश्राम करेंगे, क्योंकि 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार है| यात्रा का कार्यक्रम इस ढंग से बनाया गया था कि क्रिसमस वाले दिन राहुल अपनी मां और बहन के परिवार के साथ घर पर ही रहें| वैसे उसके बाद दो दिन शीत सत्र के दौरान लोकसभा में हाजिरी लगाएंगे, ताकि एक नया इवेंट भी यात्रा में जुड़े|
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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