Millets as Shree Anna: मोटा अनाज नहीं, श्री अन्न कहिए श्रीमान

Millets as Shree Anna: भारत में गेहूं और चावल के उत्पादन पर जब से अधिक जोर दिया जाने लगा तब से भारत के परंपरागत अनाज को मोटा अनाज कहकर खारिज किया जाने लगा। न सिर्फ खेतों से बल्कि लोगों की थाली से भी भारत के परंपरागत अनाज गायब होने लगे। लेकिन तीन चार दशक की इस उपेक्षा के बाद मोटा अनाज दोबारा से मुख्यधारा में लौट आया है। इस बार उसे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नया नाम दिया गया है श्री अन्न। इस श्री अन्न में शामिल अनाज भारत के अपने परंपरागत अनाज हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत गुणकारी हैं।

इसीलिए वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 05 मार्च 2021 को एक संकल्प पारित किया। मोटे अनाज के समर्थन में इसका प्रस्ताव भारत की ओर से ही रखा गया था, जिसे 72 देशों का समर्थन प्राप्त था। भारत के प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 05 मार्च के दिन संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को मोटा अनाज वर्ष घोषित किया। प्रस्ताव भारत की तरफ से था, इसलिए भारत की नैतिक जिम्मेवारी अब इस अभियान के साथ जुड़कर काम करने के संबंध में बढ़ जाती है।

Prime Minister Modi named Millets as Shree Anna

इस संकल्प के पारित होने का अर्थ मोटे अनाज से स्वास्थ को होने वाले लाभ के संबंध में दुनिया में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम पर पड़ने वाले विपरित प्रभावों के बावजूद मोटे अनाज की पैदावार पर कोई विशेष संकट नहीं आता। उसे दूसरे अनाजों की तुलना में पानी कम चाहिए और वह स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद है। यह बात इस वर्ष घर घर तक पहुंचानी है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंगयू के अनुसार "इस महत्वपूर्ण फसल के महत्व को उजागर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय वर्ष की घोषणा एक समुचित कदम है। यह मोटे अनाज के पौष्टिक और स्वास्थवर्धक होने, प्रतिकूल और बदलती हुई जलवायु के उसकी खेती के लिए उपयुक्त होने के संबंध में जागरूकता पैदा करने तथा नीति निर्माताओं का ध्यान आकृष्ट करने का एक अनूठा अवसर है।''

मोटा अनाज रहा उपेक्षित

इस समय 130 से अधिक देशों में पैदा किए जा रहे मोटे अनाज एशिया और अफ्रीका में करोड़ों लोगों का पारंपरिक भोजन हैं। छोटे बीज की घास जिससे न्यूट्री मील या शुष्क क्षेत्रों में होने वाला अनाज भी कहा जाता है, का वर्गीकरण मोटे अनाज के रूप में किया जाता है। मोटा अनाज कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और आयरन, जिंक तथा विटामिन बी का अच्छा स्रोत है। यह ग्लूटेन-फ्री भी होते हैं, जिसके कारण यह उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं, जिन्हें ग्लूटेन युक्त भोजन से एलर्जी होती है।

भारत में मोटा अनाज मुख्यतः खरीफ की फसल है। जिनकी खेती के लिए इनके समान अन्य मुख्य फसलों से कम पानी और कृषि सामग्री की आवश्यकता होती है। आजीविका के अवसर सृजित करने, किसानों की आय बढ़ाने और विश्व भर में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में इन फसलों की अपार संभावनाओं के कारण मोटे अनाज का बहुत महत्व है। परंतु, इनसे अनेक लाभों के बावजूद गेहूं, चावल और मक्का जैसी मुख्य फसलों की तुलना में किसान, नीति निर्माता और आम जनता मोटे अनाज को उतना अधिक महत्व नहीं देते। पिछली सरकारों और हरित क्रांति के योजनाकारों के हाथों मोटे अनाज की खूब अनदेखी हुई। धीरे धीरे कम मेहनत, कम लागत से तैयार होने वाले अधिक पौष्टीक मोटे अनाज को हम भूलने लगे और हमारे खेतों में मोटे अनाज की फसल हटाकर गेहूं, धान और मक्के की फसल लहलहाने लगी।

कुपोषण के खिलाफ विशेष पोषण माह

यह अच्छी बात है कि भारत सरकार मोटे अनाज के महत्व को अब खूब समझ रही है। वह मोटे/ पोषक अनाज वर्ष को जनांदोलन बनाने की दिशा में गंभीर है। इसलिए राष्ट्रीय पोषण अभियान के अन्तर्गत पंचायत समितियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों और एएनएम नर्सों के साथ मिलकर सरकार ने कुपोषण उन्मूलन की योजना बनाई है। ऐसे में कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं को क्रियान्वित किया जाना स्वाभाविक है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण अभियान 2023 के अंतर्गत 1 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक विशेष पोषण माह मनाए जाने की योजना है।

मोटे अनाज की खेती

मोटे अनाज के क्षेत्र में भारत की स्थिति का आंकलन करें तो 170 लाख टन से अधिक मोटे अनाजों का उत्पादन अपने देश में होता है, जो एशिया के उत्पादन का 80 प्रतिशत और वैश्विक उत्पादन का 20 प्रतिशत है। मोटे अनाजों की वैश्विक औसत उपज 1229 किलोग्राम/ हेक्टेयर है, वहीं भारत में इनकी उपज 1239 किलोग्राम/ हेक्टेयर है। भारत ने 2021-22 में मोटे अनाजों के उत्पादन में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले वर्षों में मोटे अनाजों का उत्पादन 15.92 एमएमटी (million metric tonnes) था।

मोटे अनाजों में बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, कुटकी, कोदो, सावां, काकुन और चना आते हैं। भारत में इन सभी नौ प्रमुख मोटे अनाजों का उत्पादन होता है। अपना देश दुनिया में मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत में मोटे अनाजों के प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएमएस) कार्यक्रम के अन्तर्गत एनएफएसएम-पोषक अनाज को 14 राज्यों के 212 जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है।

भारत में मोटे अनाजों की मूल्य वर्धित श्रृंखला (value added chain) में 500 से स्टार्ट अप वर्तमान में काम कर रहे हैं, जबकि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 'रफ्तार' के अन्तर्गत 250 स्टार्ट अप को प्रोत्साहन मिला है।

उत्तराखंड में खेती को मिल रहा प्रोत्साहन

उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्र में मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। वहां सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करने का कार्य हो रहा है। राज्य के पर्वतीय जनपदों के किसानों से सहकारिता विभाग एवं उत्तराखण्ड कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से मंडुवा, झंगोरा, चौलाई जैसे मोटे अनाजों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है।

प्रत्येक वर्ष सहकारिता एवं विपणन बोर्ड द्वारा पर्वतीय जिलों के कृषकों से उनके गांव के निकट ही मंडुवा, झंगोरा आदि की खरीद करके किसानों को उनके खाते में ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इससे न सिर्फ किसानों की आय में बढोतरी हो रही है बल्कि मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर स्थानीय किसान प्रोत्साहित भी हो रहे हैं। उत्तराखण्ड की जलवायु मोटे अनाज की खेती के लिए अनुकूल है। प्रदेश में इसकी खेती को लेकर किसान जागरूक हो रहे हैं। उत्तराखंड के अंदर लोक पर्वों और त्योहारों में मोटे अनाज के उत्पादों का उपयोग बढ़ाने को लेकर भी अभियान चलाए जा रहे हैं।

श्री अन्न की नयी पहचान

मार्च में अंतरराष्ट्रीय 'मोटा अनाज वर्ष' सम्मेलन का विज्ञान भवन में उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशी प्रतिनिधियों को मोटे अनाज के लिए भारत की ब्रांडिंग संबंधी पहल के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि भारत में मोटे अनाज या मिलेट्स को अब 'श्री अन्न' की पहचान दी गई है। भारतीय परंपरा से परिचित लोग इस बात से अच्छी तरह अवगत हैं कि हमारे यहां किसी के आगे 'श्री' ऐसे ही नहीं जुड़ता है और जहां श्री होती है, वहां समृद्धि भी होती है, और समग्रता भी होती है। इस तरह मोटे अनाजों को प्रधानमंत्री मोदी से एक नया नाम श्री अन्न मिला। इस वर्ष बजट में भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोटे अनाजों को श्री अन्न कहा। इस तरह मोटे अनाज को श्री अन्न के नाम से एक नई पहचान मिली।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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