OBC Reservation: ओबीसी आरक्षण में 'ममता'मयी तुष्टीकरण
OBC Reservation: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ओबीसी आरक्षण अचानक से एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। उसके बाद पश्चिम बंगाल की ममता सरकार विवादों में आ गई है। आरोप है कि वहां चुपके-चुपके पिछड़े वर्ग से जुड़ी जातियों के अधिकारों में सेंधमारी करके उन्हें नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस आरक्षण पर पिछड़ी जातियों का अधिकार था, उसे ममता बनर्जी की सरकार रोहिंग्या मुसलमानों में बांट रही है।
इस संबंध में जब राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) ने बंगाल सरकार से जवाब मांगा तो उनकी तरफ से बताया गया कि जिन मुसलमानों को वे आरक्षण दे रहे हैं, उनमें अधिकांश लोग हिंदू से कन्वर्ट होकर मुसलमान बने हैं। जब तक वे हिन्दू थे तो उन्हें जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने की वजह से आरक्षण का लाभ दिया गया था। जब उन्होंने जाति से मुक्ति पा ली और इस्लाम कुबूल कर लिया फिर उन्हें आरक्षण देने की क्या आवश्यकता है? इस पर सरकार के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे गए कि उन्होंने मुस्लिम जातियों को आरक्षण देने का निर्णय किस आधार पर लिया। उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

एनसीबीसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल में ओबीसी सूची में 178 समुदाय हैं। कथित तौर पर इसमें से 118 जातियां मुसलमान हैं। राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग (ओबीसी) के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने संवाददाता सम्मेलन में यह सवाल पत्रकारों के बीच उठाया है कि ''जब हिंदुओं की आबादी पश्चिम बंगाल में अधिक है तो सूची में मुस्लिम समुदाय की जातियां अधिक कैसे हो सकती हैं?'' अहीर ने कहा कि वे मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन योग्य समुदायों को ही आरक्षण मिले इसके पक्षधर जरूर हैं। उन्होंने कहा कि "हमें कई शिकायतें मिलीं, जिन्होंने हमें इस मुद्दे पर गौर करने के लिए मजबूर किया।"
ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति अब किसी से छुपी हुई नहीं है। उन्होंने एक बार भाषण करते हुए इस बात की तरफ संकेत किया था कि हिन्दूओं से अधिक वह मुसलमानों पर विश्वास करती हैं। तीन महीने पहले उन्होंने रामनवमी के अवसर पर निकलने वाली यात्राओं पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुसलमानों के मोहल्ले में हमला हुआ तो वे छोड़ेंगी नहीं। उनका लहजा धमकी देने वाला था। अब पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या सहित कुछ ऐसे मुस्लिम समुदायों को जो पात्र नहीं हैं, ओबीसी आरक्षण देने की चर्चा हो रही है।
यहां एक तथ्य यह भी है कि उनके इस कदम से पश्चिम बंगाल में किसी को आश्चर्य नहीं हो रहा। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार और उनकी प्रमुख ममता बनर्जी पर विपक्षी पार्टी भाजपा पहले से ही मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है। अब बंगाल की मुख्यमंत्री ओबीसी आरक्षण में रोहिंग्याओं को शामिल करके उन पर लग रहे आरोपों को सच साबित करती हुई दिखाई देती हैं।
71 में 65 मुसलमान, 06 हिंदू
प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण के इस खेल का खुलासा एनसीबीसी के अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर ने किया है। पश्चिम बंगाल में हिन्दू 70.5 फीसदी हैं और 27 फीसदी मुस्लिम हैं। बावजूद इसके अति पिछड़ा में 81 जातियों में से 73 जातियां कैसे मुस्लिम शामिल हो गई? मुसलमान संख्या में चाहें हिन्दुओं से कम हों लेकिन आरक्षण का लाभ लेने में ममता की ममता से उन्होंने हिन्दुओं को पीछे छोड़ दिया है।
यह बात भी सामने आई कि 2011 तक पश्चिम बंगाल में कुल ओबीसी जातियों की संख्या 108 थी। इनमें से 53 मुसलमान और 55 हिंदू थे। लेकिन, 2011 के बाद ओबीसी लिस्ट में कुल 179 जातियां हो गईं। जिन 71 जातियों को इस लिस्ट में नए सिरे से जोड़ा गया, उनमें 65 मुस्लिम और 6 हिंदू जातियां हैं।
ओबीसी समुदाय को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी ए और श्रेणी बी। इनमें श्रेणी ए में जिन पिछड़ी जातियों को शामिल किया गया है, उन्हें अधिक लाभ मिल रहा है। श्रेणी बी वालों को कम लाभ मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के अंदर श्रेणी ए में नब्बे प्रतिशत मुस्लिम पिछड़ी जातियों को रखा गया है और श्रेणी बी में 90 प्रतिशत हिन्दू जातियां हैं। इन विसंगतियों की तरफ बंगाल सरकार को ध्यान देना चाहिए। इन्हीं वजहों से उस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगता रहा है।
बिहार, राजस्थान और पंजाब में भी गड़बड़ी
इसी साल फरवरी से मई महीने के बीच नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस (एनसीबीसी) द्वारा कराये गये सर्वे में यह बात सामने आयी है कि इन चार गैर भाजपा शासित राज्यों में ओबीसी को मिलनेवाले आरक्षण का लाभ उचित तरीके से नहीं दिया जा रहा है। मसलन, राजस्थान में जहां बैकवर्ड क्लास से आनेवाले अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं वहां सात जिलों में ओबीसी का सर्टिफिकेट ही नहीं जारी किया जा रहा है। इसी तरह पंजाब में जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है वहां ओबीसी रिजर्वेशन 12 प्रतिशत तक सीमित है जबकि दलित आरक्षण 25 प्रतिशत है। आरक्षण का 50 प्रतिशत कोटा पूरा करने के लिए आयोग ने पंजाब सरकार से कहा है कि वह अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण का कोटा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित करे।
बिहार में तो साफ्टवेयर ही खराब है। ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए पुराना सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा है जिसके कारण झारखण्ड में जा चुकी जाति को भी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। इसी तरह क्रीमी लेयर के नीचे रखने के लिए क्लास 3 और क्लास 4 के कर्मचारियों की कृषि आय दिखाकर उन्हें क्रीमी लेयर के नीचे रखा जा रहा है ताकि अनैतिक तरीके से उनके परिवार को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता रहे।
राजनीति में शक्तिशाली समूह बना ओबीसी
ओबीसी या अन्य पिछड़ा वर्ग भारतीय राजनीति में एक शक्तिशाली समूह के रूप में ही देखा जाने लगा है, जिसे अपने पक्ष में करने के दांव पेंच में सभी राजनीतिक दल शामिल हैं। इसकी वास्तविक वजह देश की आबादी में उनकी 52 फीसदी की हिस्सेदारी है। इस समूह को जनता पार्टी की सरकार में तैयार मंडल कमीशन (1979) के दौर में पहचान मिली। उससे पहले सवर्ण और अन्य पिछड़ी जातियां एक साथ थीं और अनुसूचित जातियों से अगड़ी मानी जाती थी। कमीशन लागू होने के बाद आरक्षण के लिए कई जातियां खुद को पिछड़ी जाति में शामिल होने के लिए सड़क पर उतर आईं। मराठा, जाट, गुर्जर, पटेल आदि कई जातियां हैं जो स्वयं को पिछड़ा वर्ग में अपने आपको शामिल करने का आंदोलन करती रही हैं।
1980 में आई मंडल आयोग की रिपोर्ट ने सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ी 3,743 जातियों की पहचान की थी। 1980 से लेकर 2004 तक का साल ओबीसी राजनीति के गढ़ने और संवरने का साल था। इस बीच संसद में ओबीसी सदस्यों का प्रतिशत 11 से बढ़कर 26 हो गया। देश में गठबंधन की राजनीति का उदय हुआ तो ओबीसी राजनीति का महत्व राष्ट्रीय पार्टियों ने भी समझा और क्षेत्रीय पार्टियां तो कई राज्यों में इसी ओबीसी वर्ग की राजनीति ही कर रही हैं।
चुनाव विश्लेषक इस बात को स्वीकार करते हैं कि 2014 के बाद ओबीसी मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न बदला है। ओबीसी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा अब बीजेपी के पास एकमुश्त आ गया है, जबकि पहले ये क्षेत्रीय दलों के मतदाता माने जाते थे। अब ऐसे में ममता बनर्जी ने हिन्दू ओबीसी मतदाताओं की उपेक्षा करके मुस्लिम ओबीसी के प्रति जो प्रेम दिखाया है तो उसके पीछे की एक वजह 2014 के बाद सामने आया ओबीसी मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न भी हो सकता है। ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम जातियों को इस व्यापक स्तर पर शामिल करके वो एक तीर से दो शिकार करना चाहती हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications