Pathaan Movie Review: पाकिस्तानी आतंकवाद को क्लीन चिट देने की मुहिम में बॉलीवुड

बॉलीवुड की कुछ फिल्मों में एक फॉर्मूला जो कई बार आजमाया गया है, वो ‘पठान’ में भी प्रस्तुत किया गया है।

Pathaan Movie Review Bollywood campaign to give clean chit to Pakistani terrorism

Pathan Movie Review: पठान से पहले यशराज फिल्म्स के बैनर तले सलमान खान की मूवी बनी थी, 'टाइगर जिंदा है'। इस फिल्म में एक आतंकवादी था, जो भारत-पाकिस्तान की नर्सों को बंधक बना लेता है, और उनको छुड़ाने के लिए भारत और पाकिस्तान ज्वॉइंट ऑपरेशन करते हैं। उससे पहले आई 'एक था टाइगर' में कैटरीना आईएसआई एजेंट थीं, जो इस मूवी में एक्टर सलमान की बीवी थी।

इसी तरह सैफ अली खान की 'एजेंट विनोद' में रॉ एजेंट विनोद आईएसआई एजेंट करीना कपूर के साथ मिलकर आतंकवादियों से लड़ता है और अंत में ये निष्कर्ष निकालता है कि असली आतंकवादी लंदन में बैठा कोई बिजनेसमैन है। अब शाहरुख की 'पठान' में भी दीपिका आईएसआई एजेंट के रोल में शाहरुख के साथ मिलकर मिशन में जुटती हैं। पठान में भी दिखाया गया है कि कैसे एक पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर कादिर आतंकी समूह की मदद से कश्मीर लेने के लिए साजिश रचता है।

लेकिन आईएसआई एजेंट के तौर पर दीपिका कई सीन में पाकिस्तान के लोगों, उनकी सरकार को बचाने वाले डायलॉग्स बोलती हैं। वो ये साबित करने की कोशिश करती हैं कि ये लोग नॉन स्टेट एक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं, इसमें पाकिस्तान शामिल नहीं। यही बात तो अपनी सफाई में पाकिस्तान दशकों से कह रहा है, और हमारी फिल्में भी उसी के प्रोपेगंडा को आगे बढ़ा देती हैं। वो ऐसा जानबूझकर करती हैं या अनजाने में, लेकिन इसका क्या मकसद है यह स्पष्ट समझने की जरूरत है। क्या ऐसा वो पाकिस्तान और मुस्लिम देशों में अपनी मूवी बेचने के लिए करते हैं या भारत की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए?

पठान के निर्देशक हैं सिद्धार्थ आनंद। इससे पहले उनकी फिल्म आई थी 'वॉर'। ये फिल्म भी यशराज फिल्म की ही थी। उस फिल्म में पहली बार एक 'हिंदू' को आतंकवादी दिखाया गया था और आखिर तक ये नहीं बताया गया कि फिल्म का हीरो कबीर यानी हृतिक रोशन किस धर्म को मानने वाला है।

यही फार्मूला यशराज फिल्म्स ने 'पठान' में आजमाया है कि इस्लाम और पाकिस्तान का आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं है। पाकिस्तानी फौजी अफसर जरूर आतंरवाद का साथी दिखाया गया है लेकिन उस आतंकवादी और फौजी अफसर को आईएसआई एजेंट बनी दीपिका पादुकोण नॉन स्टेट एक्टर साबित कर देती है। मुख्य विलेन होता है 'जिम', यानी जॉन अब्राहम। आखिर तक लोगों को पता नहीं चलता, वो किस मजहब को मानने वाला था और आतंकवाद को क्यों बढ़ावा देता है।

मूवी के हीरो 'पठान' के बारे में भी यह पता नहीं चलता कि वो हिंदू है, मुस्लिम है, सिख है या कोई और। उसे पठान नाम क्यों मिला, बस ये बताया गया है। आखिर इन सबकी वजह क्या है? क्या बॉलीवुड के लोग मुस्लिम देशों में अपनी फैन फॉलोइंग को भी अपनी फिल्में दिखाना चाहते हैं, इसलिए मुस्लिम आतंकी को दिखाने से बच रहे हैं। जिस तरह 'वॉर' और 'पठान' में हीरो का भी मजहब छुपाया गया, उससे लगता है वो हिंदू जनता को भी कन्फ्यूज रखना चाहते हैं। लेकिन पठान नाम रखने से भारत और बाहर के मुस्लिमों को साफ संदेश चला गया कि पठान है तो मुस्लिम ही होगा जो देश को बचाने के लिए लड़ रहा है।

पठान का विरोध कर रहे लोगों को कुछ और बातों से भी आपत्ति हो सकती है। अपनी पत्नी की मौत से खफा जॉन अब्राहम जब भारत के खिलाफ हो जाते हैं, तो पठान शाहरुख एक डायलॉग बोलते हैं, "मैं अपने आपको उसका आशिक समझता था और तुम बेटा... वो है भारत मां''। ये ठीक है कई लोगों ने वतन को मां की जगह महबूब माना है, मनोज मुंतशिर के गीत तेरी मिट्टी में मिल जांवा में भी... यही रुख है। लेकिन या तो मां का जिक्र होता है या वतन से आशिकी का। यहां दोनों को मिलाकर डायलॉग विवादित लगता है, मानो कह रहे हों कि वो भारत मां के आशिक हैं।

पठान के ट्रेलर में एक सीन दिखाया गया था जिसमें शाहरुख कहते हैं, ''पार्टी पठान के घर रखोगे, तो पठान तो आएगा ही और पटाखे भी लाएगा''। ट्रेलर देखकर ये लगा था कि पठान कह रहा है कि हिंदुस्तान में कुछ करोगे तो पठान रोकेगा, लेकिन मूवी में हकीकत कुछ और है। ये डायलॉग अफगानिस्तान में बोला गया है, जहां शाहरुख एक परिवार को अपना मानता है। चूंकि पठानों का घर अफगानिस्तान माना जाता है, और शाहरुख भी अपने को अफगानी पठान मूल का होने का दावा करते आए हैं, सो शाहरुख एक ही मूवी में अलग अलग दर्शक वर्ग को साधने की कोशिश करते दिखते हैं।

यशराज फिल्म्स की मूवीज में जैसे पाकिस्तान और इस्लामिक आतंक को क्लीन चिट देने की मुहिम सी चल पड़ी है, उसी तरह एक नई शुरूआत रणवीर कपूर की मूवी 'शमशेरा' से हुई है। अब आजादी की लड़ाई के विलेन अंग्रेज नहीं होंगे, बल्कि सवर्ण होंगे। अंग्रेजों को इस मूवी में अच्छा दिखाया गया और सवर्ण व्यापारियों और दारोगा शुद्ध सिंह (संजय दत्त) को मूल खलनायक। ये कोई सोचा समझा एजेंडा है या बस लेखक और निर्देशक की कुछ अलग करने की जिद, भांपना थोड़ा मुश्किल है।

आतंकवाद को लेकर भारत सरकार ने जब भी पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की कोशिश की, हमेशा ही पाकिस्तान ने धोखा दिया है। पहले इंदिरा गांधी जुल्फिकार अली भुट्टो और जिया उल हक की बातों में आ गई थीं। अक्षय कुमार की फिल्म 'बैलबॉटम' में इसे दिखाया भी गया था कि कैसे भारतीय विमान हाईजैक होते थे, आतंकी पाकिस्तान में ले जाते थे, पाकिस्तान मदद का नाटक करके मध्यस्थता करता था और उनके बदले कई आतंकी भारत से छुड़ा लेता था।

इसी तरह आतंकवाद के मुद्दे पर राजीव गांधी ने भी धोखा खाया, बेनजीर की बातों में आकर रॉ और आईएसआई की मीटिंग्स शुरू करवा दीं, ताकि खालिस्तानी आतंकियों को पकड़ा जा सके। जबकि इधर वो बातचीत करते रहे, उधर पाकिस्तान कश्मीर के आतंकियों को अफगानिस्तान में ट्रेनिंग दिलवाता रहा। अफगानिस्तान से नजीबुल्ला ने राजीव गांधी को इसकी जानकारी के कई संदेश भेजे, लेकिन उनको समझ नहीं आया। एक दिन उन्हीं आतंकियों ने 1990 में कश्मीर घाटी में कहर बरपाया, जिसकी कहानी आज की पीढ़ी को 'कश्मीर फाइल्स' मूवी से पता चली। ये सब जानकारी पूर्व रॉ ऑफिसर बी रामन ने अपनी किताब 'द काव बॉयज रॉ' में लिखी हैं। अटलजी ने भी पहले नवाज शरीफ से दोस्ती की, लाहौर बस ले गए, लेकिन बदले में हमें कारगिल मिला।

Recommended Video

    Pathaan Break Records|Box Office पर चला 'पठान' का जादू, Release के साथ तोड़े रिकॉर्ड| वनइंडिया हिंदी

    ऐसे में आतंकवाद पैदा करने वाले पाकिस्तान को ही आतंकवाद का पीड़ित दिखाकर, भले ही बॉलीवुड वालों को मुस्लिम देशों में दर्शक मिल जाते हों, लेकिन ये भारत सरकार के रुख से उलटा है। शायद सेंसर बोर्ड का ध्यान इन सब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बातों की तरफ जाता भी नहीं। लेकिन इसके दूरगामी असर अच्छे नहीं होंगे। फिल्में जनमानस खासतौर पर नई पीढ़ी के मन पर असर छोड़ती हैं और वो फिल्मों में दिखाई गयी बातों को ही सच्चाई मान लेते हैं।

    यह भी पढ़ें: 32 साल बाद कश्मीर के थिएटरों के बाहर दिखा HouseFull बोर्ड, शाहरुख खान की 'पठान' ने किया ऐसा कमाल

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+