Women Reservation: क्या भाजपा में महिला युग की शुरुआत होगी?
Women Reservation: जब से संसद के विशेष सत्र का एलान हुआ है, तबसे अटकलों का बाज़ार गर्म है कि सत्र का एजेंडा क्या है| सवाल यह उठ रहा है कि संसदीय मामलों की केबिनेट कमेटी के सामने कोई एजेंडा था या उन्होंने ऊपर के आदेश से विशेष सत्र का एलान कर दिया| अगर एजेंडा था तो उसे सत्र के एलान के साथ ही जाहिर क्यों नहीं किया गया| संसदीय मामलों की केबिनेट कमेटी में आठ मंत्री हैं, और चार मंत्री विशेष आमंत्रित हैं|
इस समय जो संसदीय मामलों की केबिनेट कमेटी है, उसके चेयरमैन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह हैं, और गृहमंत्री अमित शाह भी सदस्यों में से एक हैं| इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि केबिनेट कमेटी को एजेंडे की जानकारी नहीं रही होगी। संभव है कि कमेटी की मीटिंग में अमित शाह ने विशेष सत्र बुलवाने का आदेश दे दिया हो और बाकी सदस्यों को एजेंडा नहीं बताया गया हो| संसद सत्र की तारीखों के एलान के साथ ही सत्र का एजेंडा जाहिर करने की परंपरा रही है| यही कुछ बाते हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को प्रभावित करती हैं| लोकतंत्र में पारदर्शिता एक अनिवार्य अंग है| क्योंकि पारदर्शिता नहीं है, मीडिया को दूर रखा जाता है, इसलिए अटकलों का बाज़ार गर्म होता है|

31 अगस्त को जैसे ही विशेष सत्र का एलान हुआ, राजनीतिक अटकलबाजी शुरू हो गई| विशेष सत्र को विपक्षी गठबंधन इंडी एलायंस की बढ़ती सक्रियता के साथ जोड़ कर देखा गया| जिस दिन पटना में गठबंधन की पहली बैठक हो रही थी, उसी दिन हड़बड़ी में मोदी ने भी एनडीए की बैठक बुला ली। जिस दिन मुम्बई में चौथी बैठक शुरू होने वाली थी, उस दिन विशेष सत्र का एलान कर दिया गया| आमतौर पर सत्र से पहले विपक्ष के साथ भी अनौपचारिक विचार विमर्श होता है, वह भी नहीं किया गया|
इसलिए विशेष सत्र को मोदी सरकार के राजनीतिक एजेंडे के तौर पर ही देखा जा रहा है| जिन चार मुद्दों को लेकर अटकलें शुरू हुई उनमें "एक देश एक चुनाव" की सबसे ज्यादा अटकल है, क्योंकि उसी दिन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी| क्योंकि एक देश एक चुनाव मोदी का राजनीतिक एजेंडा बन गया है, इसलिए कमेटी में शामिल किए गए कांग्रेस के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने कमेटी से किनारा कर लिया है|

वैसे भी इंडी एलायंस के दल संसदीय कमेटी में एक देश एक चुनाव को संघीय ढाँचे पर प्रहार बता चुके हैं| दूसरा चर्चित विषय है महिला आरक्षण बिल, तीसरा जनसंख्या नियन्त्रण बिल और चौथा समान नागरिक सहिंता| राष्ट्रपति की ओर से जी-20 के मौके पर भेजे गए रात्रिभोज निमन्त्रण में "प्रेजिडेंट आफ भारत" लिखे जाने के बाद अटकलों में देश के नाम वाले संविधान के पहले अनुच्छेद में संशोधन भी जुड़ गया है|
वैसे तो विशेष सत्र में एक से ज्यादा बिल भी रखे जा सकते हैं| लेकिन इनमें सबसे ज्यादा संभावित है संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण बिल| चुनावी दृष्टि से यह नरेंद्र मोदी के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद हो सकता है| वैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं| फायदा भी हो सकता है, नुकसान भी हो सकता है|
भारतीय समाज, भले ही वह हिन्दू हो, या मुस्लिम, पुरुष प्रधान समाज है| इसलिए महिला आरक्षण बिल से पुरुष समाज मोदी से खफा होकर बाजी पलट भी सकता है, लेकिन इसके उल्ट महिला सशक्तिकरण का दांव सीधा भी पड़ सकता है| महिला सशक्तिकरण को मोदी चुनावी नजरिए से ही देखते हैं, इसलिए वह जब से प्रधानमंत्री बने हैं, महिला सशक्तिकरण के लिए कई ठोस कदम उठा चुके हैं|
महिला वोटरों को ध्यान में रख कर मोदी एक एक कदम आगे बढ़ रहे हैं| उज्ज्वला योजना, हर घर नल, दो करोड़ लखपति दीदी, ये सब योजनाएं महिलाओं के विकास को ध्यान में रख कर बनाई गई हैं| भाजपा की अंदरुनी बैठकों में मोदी कई बार कह चुके हैं कि महिलाएं भाजपा का साइलेंट वोटर है| इस सायलेंट वोटर को और मुखर करने के लिए भाजपा अपने महिला काडर और महिला लीडरशिप को आगे लाने की तैयारी कर रही है, जिसे इसी साल होने वाले विधानसभा चुनावों में देखा जा सकेगा|
अब तक की आनाकानी के बावजूद अब आसार बन रहे हैं कि भाजपा राजस्थान में वसुंधरा राजे ही नहीं, बल्कि एक और राज्य में भी महिला का चेहरा आगे करके मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की रणनीति खेल सकती है| सब से पहला दांव होगा महिला आरक्षण | राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कह दिया है कि सरकार संसद के विशेष सत्र में महिलाओं को तोहफा देने जा रही है|
जिन चार पांच मुद्दों पर अटकलें बनी हैं, उनमें महिला आरक्षण ही ऐसा मुद्दा बनता है, जिसे मोदी आसानी से पास करवा सकते हैं, और उसका राजनीतिक लाभ भी हासिल कर सकते हैं| अगर संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पास होता है, तो इसे पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में लागू करके मोदी बाजी को अपने पक्ष में कर सकते हैं|
जहां तक लोकसभा का सवाल है तो 2026 तक डीलिमिटेशन पर रोक लगी हुई है| 2026 के बाद मौजूदा आबादी के हिसाब से डीलिमिटेशन होती है, तो लोकसभा सीटें 545 से बढ़कर 848 हो सकती हैं, लेकिन उस पर भी भारी विवाद है क्योंकि आबादी के हिसाब से डीलिमिटेशन हुआ तो अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें उतनी नहीं बढ़ेंगी, जितनी उत्तर भारत के कई राज्यों में बढ़ जाएंगी, जहां जनसंख्या वृद्धि पर कोई नियन्त्रण नहीं किया गया|
इस पर नरेंद्र मोदी सरकार नया सुझाव दे सकती है, वह यह कि 2026 के बाद भी डीलिमिटेशन न किया जाए, लेकिन मौजूदा सीटों पर महिलाओं के लिए अतिरिक्त 33 प्रतिशत बढ़ाकर उन्हें चुनने का फार्मूला निकाला जाए| इस फार्मूले से वह पुरुष और महिला दोनों वर्गों का संतुलन बना कर रख सकते हैं| अगर सहमति बने तो वह दोनों सदनों की 33 प्रतिशत सीटें बढ़वाने का संविधान संशोधन भी करवा सकते हैं, क्योंकि कांग्रेस ने महिला आरक्षण का वायदा किया हुआ है|
2017 में जब महिला आरक्षण का मुद्दा फिर से उछला था तो सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिठ्ठी लिख कर कहा था कि हमारे पास स्पष्ट बहुमत नहीं था इसलिए हम लोकसभा में बिल पास नहीं कर पाए थे, अब आपके पास बहुमत है, आप लोकसभा में महिला आरक्षण बिल लाइए, हम उसका समर्थन करेंगे|
अगर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें बढ़ाने पर सहमति नहीं बनती है, तो मौजूदा सीटों में से ही 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं| मोदी सरकार 2023 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों में ही महिला आरक्षण का दाव चल सकती है| इसमें कोई शक नहीं कि इंडी एलायंस बनने के बाद भाजपा की लगभग डेढ़ सौ सीटों पर कड़े मुकाबले के आसार बन गए हैं, ऐसे में महिला वोटर अहम भूमिका निभा सकती हैं|
महिला आरक्षण का समर्थन कर रही कांग्रेस के लिए यह बिल गले की हड्डी बन रहा है, अभी तक किसी ने महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं किया है| मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक से इंडी एलायंस में गहरे मतभेद उभर आएंगे| अगर यह क़ानून तीन महीने बाद होने वाले पांच विधानसभा चुनावों में ही लागू हो गया, तो कांग्रेस को तो मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 33 प्रतिशत महिला उम्मीदवार ढूंढना ही मुश्किल हो जाएगा| भाजपा ने तो पिछले पांच साल में महिला वोट बैंक में ही सेंध नहीं मारी, महिला नेतृत्व भी पैदा किया है|
18 सितंबर से शुरू होने वाला संसद सत्र 22 सितंबर शुक्रवार को खत्म होगा, सोमवार 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जयपुर में चुनावी बिगुल बजाएंगे| फिलहाल राजस्थान भाजपा की चार यात्राएं चारों दिशाओं से शुरू हो चुकी हैं| संसद से महिला आरक्षण बिल पास करवा कर नरेंद्र मोदी राजस्थान में वह मास्टर स्ट्रोक मार सकते हैं, जिसका भाजपा का महिला वोट बैंक लंबे समय से इंतजार कर रहा है| वैसे पिछले एक हफ्ते में 2 सितंबर को जेपी नड्डा ने सवाईमाधोपुर में, 3 सितंबर को अमित शाह ने डूंगरपुर में, 4 सितंबर को राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में और 5 सितंबर को नितिन गडकरी ने हनुमानगढ़ में संकेत दे दिए| संकेत आ रहे हैं कि मोदी ने महिला आरक्षण के साथ महिला मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के एलान का मास्टर स्ट्रोक बचा कर रखा हुआ है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications