Parliament Session: 26 बनाम 38 की जोर आजमाइश का सत्र
Parliament Session: नवनिर्मित संसद भवन की बजाय पुराने संसद भवन में ही आज से संसद का मानसून सत्र शुरु हो गया है। इस बार संसद के मानसून सत्र में प्रेस, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, डाक सेवा, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण, संविधान संशोधन, जैविक विविधता सहित कुल 32 विधेयकों पर विचार किया जाना है। हालांकि बहु राज्य सहकारी सोसाइटी संशोधन विधेयक, जन विश्वास विधेयक और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार विषयक अध्यादेश को लेकर सदन के भीतर गर्मी बढ़ने की संभावना है लेकिन बहुप्रतीक्षित समान नागरिक संहिता को लेकर विधि आयोग द्वारा समय सीमा बढ़ाए जाने के कारण उसके पेश होने की संभावना कम है।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम मानसून सत्र राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सत्र में अभी-अभी बंगलुरु में यूपीए से बदल कर इंडिया बना विपक्ष जोर शोर से अपनी एकजुटता की मुहिम का राजनीतिक प्रदर्शन करना चाहेगा तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष, विपक्षी खेमे की कोशिशों को सदन के भीतर ही हराकर उसके पेच ढीले करने की कोशिश करेगा।

मालूम हो कि संसद का मानसून सत्र आज 20 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कुल 17 बैठकें होंगी। सत्र में कुल 32 अहम विधेयक पारित करने का प्रयास किया जाएगा। इसमें उस अध्यादेश को भी कानूनी रूप दिया जाएगा जिसका प्रयोग करके दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरशाहों पर मिले अधिकार को खत्म कर दिया गया था। कांग्रेस पहले ही इस मुद्दे पर केजरीवाल का साथ देने की बात कह चुकी है, इसलिए जिस दिन यह विधेयक संसद में आयेगा, हंगामा होना तय है।
पिछले सत्र का अनुभव कड़वा रहा है। अडानी के मामले पर विपक्ष ने संसद के कामकाज में लगातार अड़ंगा लगाया। संसद ने सभी वर्गों के हित में कानून बनाने की अपनी बुनियादी जवाबदेही ठीक से नहीं निभाई। किसी ना किसी बहाने सांसदों ने काम कम कोहराम ज्यादा मचाया। तर्कसंगत विरोध, असहमति और फिर आम राय से किसी नतीजे पर पहुंचने की अवधारणा गंभीर रूप से घायल हुई। पिछले सत्र में सभापति जगदीप धनखड़ ने कई बार याद दिलाया कि संसद किसलिए और किसके खातिर बनी है? इस पर सांसदों को गौर करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सदन के अंदर ऐसे हंगामे को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मौजूदा राजनीतिक हलचलों को देखते हुए लगता है कि मानसून सत्र में भी संसद में काम कम बातें अधिक होंगी। सत्र के दौरान दिल्ली प्रशासन से जुड़े अध्यादेश का ऐसा मुद्दा आना है जिसमें विपक्षी दलों को अपनी एकजुटता दिखाने का मौका मिलेगा। विपक्ष की रणनीति होगी कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को राज्यसभा में परास्त कर आम चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर किया जाए। इसके अतिरिक्त मणिपुर की हिंसा और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के मामले पर हंगामे के आसार हैं। महंगाई के बहाने विपक्ष आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरने की घोषणा कर चुका है। बेरोजगारी का मसला भी विपक्ष जोर शोर से उठाना चाहता है।
मानसून सत्र में सदन के भीतर कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट होगी। इंडिया के सहयोगी दलों के सुर ताल की भी जांच हो जाएगी। वहीं, जिन पांच बड़े राजनीतिक दलों ने किसी भी गठबंधन में शामिल ना होकर अपना अलग वजूद बनाए रखने का दम भरा है, सदन के भीतर उनके तेवर कैसे हैं, इसका भी अंदाजा मिलेगा।
दूसरी तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने किसी भी सूरत में मानसून सत्र में अपनी पकड़ कम नहीं होने देने के साथ-साथ अहम बिलों को पास कराने की योजना तैयार की है। सरकार इसके लिए अन्य दलों से संवाद स्थापित करने और मौका मिलने पर विपक्षी दलों में सेंध लगाने का भी प्रयास कर सकती है। सरकार को भरोसा है कि बीजू जनता दल और वाईएसआर जैसे राजनीतिक दल विपक्ष के खेमे में नहीं जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन का आकार लगातार बड़ा हो रहा है। शिवसेना और एनसीपी की टूट का सीधा फायदा बीजेपी को पहुंचा है। राजग गठबंधन में अब तक छोटे-बड़े 38 दल शामिल हो चुके हैं।
समान विचार रखने वाले अन्य दलों को भी साथ जोड़ने की गरज से सरकार मौजूदा सत्र में ही समान नागरिक संहिता विधेयक लाकर बड़ी लकीर खींचना चाहती थी। विधि आयोग ने जब इस विषय पर लोगों से 14 जुलाई तक राय देने के लिए कहा तब इसकी संभावना और बढ़ गई थी, लेकिन बाद में आयोग ने समय सीमा बढ़ाकर 28 जुलाई कर दी है। इसलिए लगता है कि मौजूदा सत्र में यह बिल शायद ही आए। कुल मिलाकर मौजूदा मानसून सत्र 26 बनाम 38 की जोर आजमाइश का ही सत्र होने का संकेत है।
बहरहाल, इस मानसून सत्र में जिन विधेयकों को पारित करने का प्रयास किया जाएगा, वे हैं:
निरसन और संशोधन विधेयक, 2022,
जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021,
बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) विधेयक, 2022,
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2022,
मध्यस्थता विधेयक, 2021,
वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023,
संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022,
संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022,
सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2019,
डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019,
राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक, 2023,
राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2023,
संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023,
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 (19 मई, 2023 को प्रख्यापित किया गया),
संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023,
सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2023 (प्रमाण प्राप्त),
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023,
संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश संशोधन विधेयक, 2023 (छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में),
अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023,
राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक, 2023,
जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023,
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023,
करों का अनंतिम संग्रहण विधेयक, 2023,
औषधि, चिकित्सा उपकरण और प्रसाधन सामग्री विधेयक, 2023,
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023,
डाक सेवा विधेयक, 2023,
राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2023,
प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन) विधेयक, 2023,
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और बैंक अधिनियम,1945 का निरसन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और बैंक विधेयक, 2023,
प्रेस और आवधिक पंजीकरण विधेयक, 2023, और
रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2022,आदि।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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