Imran Khan Arrest: एक इमरान खान और घुटने पर पूरा पाकिस्तान
आर्मी से उसकी दुश्मनी है और पुलिस वालों को वह पीटता है। यह कोई दुर्दांत आतंकी नहीं बल्कि पाकिस्तान का पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान है जिसने पूरे पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया है।

Imran Khan Arrest: 15 मार्च को लाहौर के जमान पार्क स्थित अपने घर में इमरान खान डट कर बैठे रहे और बाहर उनके समर्थकों और पुलिस में एक जंग चलती रही। पुलिस वाले पिट रहे थे और तहरीक ए इंसाफ वाले उन्हें पीट रहे थे। पुलिस की गाड़ियों और पानी की बौछार करने वाली मशीनों को आग के हवाले कर दिया गया और सबसे शर्मनाक बात यह कि इमरान को गिरफ्तार करने आए पंजाब के आला पुलिस अधिकारियों पर गिलगित बाल्टिस्तान के पुलिस वालों ने ही बंदूकें तान दी, जो इमरान खान की हिफाजत में लगाए गए थे। इमरान की गिरफ्तारी का आदेश इस्लामाबाद कोर्ट ने जारी किया था वह भी 13 मार्च को पेशी की छठी तारीख पर भी पेश नहीं होने के कारण। पंजाब पुलिस की लाज तब जाकर बची जब लाहौर हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगा दी।
अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आगे इमरान खान गिरफ्तार होते हैं या नहीं, अदालत जाते हैं या नहीं। फिलहाल तो उन्होंने पाकिस्तान की सत्ता के स्तंभों (कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों) को अपने पैरों तले कुचल कर रख दिया है।
मामला एक नहीं कई हैं। इमरान खान पर केस ही केस है। पर मजाल है कि उन केसों की जरा भी उन्हें परवाह हो। वह रैलियों में तो जाते हैं पर अदालतों को यह कह कर टरका देते हैं कि उनके पैर में गोली लगने के कारण वह ठीक से चल फिर नहीं सकते या सुरक्षा कारणों से उनके लिए खुले में अदालत पहुंचना जान जोखिम में डालना है। उनके लिए जज घंटों इंतजार करते हैं पर उन्हें नहीं आना होता तो नहीं आते हैं।
तोशाखाना मामले में केस दर्ज होने के बाद पिछले साल दिसंबर से ही अदालत इमरान खान का इंतजार कर रही है। आरोप तय करने के लिए इस्लामाबाद सेशन कोर्ट ने पांच तारीखें देने के बाद इमरान खान के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था, पर उसे धत्ता बताने के लिए इस बार भी जाना जरूरी नहीं समझा और गिरफ्तार करने आई पुलिस को सीधे चुनौती दे डाली।
इमरान ने समर्थकों को यह कह कर अपने इर्द-गिर्द में इकट्ठा किया कि जो जमान पार्क नहीं पहुंचेगा उसे वह चुनाव में टिकट नहीं देंगे। फिर क्या था सभी नेता इमरान के हुक्म पर तामीर के लिए लाठी डंडे, पेट्रोल बम और आग लगाने के सामान के साथ पहुंच गए। पाकिस्तान के चैनलों में यहां तक कहा गया कि इमरान ने जमान पार्क में कुछ ऐसे लोग भी जमा कर रखे हैं, जिनका ताल्लुक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से है।
इमरान केवल अदालतों को ही मामू नहीं बना रहे, वह तो पाकिस्तान की सरकार को ही कुछ नहीं मानते। वह मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बड़े भाई पीएमएल एन के रहनुमा नवाज शरीफ को नाम के साथ चोर और डाकू बुलाते हैं तो इंटीरियर मिनिस्टर राणा सनाउल्ला को कसाई। कई लोग तो इमरान खान के इसलिए करीब हैं कि वे ठीक ठाक सार्वजनिक मंचों से भी गाली गलौज कर लेते हैं। उनमें शेख रशीद, शाहबाज गिल और आजम स्वाती जैसे लोग शामिल हैं। इन लोगों ने पाकिस्तानी आर्मी तक को नहीं बख्शा है। इन सबको इस कारण जेल भी हो चुकी है।
इमरान खुद रोज ही आर्मी के बड़े ओहदेदारों को लानत मलानत भेजते हैं। पूर्व आर्मी चीफ जनरल बाजवा द्वारा आर्मी को न्यूट्रल कहे जाने पर इमरान ने जानवर करार दिया और बाजवा की तुलना मीर जाफर से कर दी। दूसरे शब्दों में सीधे धोखेबाज बता दिया। इमरान खान मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिफ मुनीर को भी नहीं छोड़ रहे। इस समय पाकिस्तान में जो कुछ भी उनको लेकर हो रहा है, उसके पीछे आर्मी चीफ का हाथ होने का दावा कर रहे हैं। घरेलू और विदेशी मीडिया में जनरल मुनीर को रोज घसीट रहे हैं।
पाकिस्तान के चुनाव आयोग पर भी इमरान खान को भरोसा नहीं है और वह चुनाव आयोग के किसी भी फैसले को सीधे मानने से इंकार कर देते हैं। वह मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा को नवाज शरीफ का पिट्ठू बताते हैं और आयोग की विश्वसनीयता पर करारी चोट करते हैं। इमरान ही क्यों, तहरीक ए इंसाफ पार्टी के हर बड़े नेता चुनाव आयोग के खिलाफ बयानबाजी का मुकदमा झेल रहे हैं। इमरान खान के बेहद करीबी फव्वाद चौधरी तो हाल में मुख्य चुनाव आयोग को जान की धमकी देने पर जेल की यात्रा कर आए हैं। पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान पर विदेशी लोगों व एजेंसियों से चंदा लेने और उसकी जानकारी आयोग को नहीं देने, पाकिस्तानी खजाने से मनमाने तरीके से तोहफों को गायब करने और चुनाव का पर्चा भरते समय अपनी एक बेटी होने की जानकारी छुपाने का मामला दर्ज कर रखा है और इमरान खान को चुनाव लड़ने से पांच साल के लिए प्रतिबंधित करने का फैसला भी सुना रखा है, लेकिन इमरान ने अदालती फैसलों के जरिए चुनाव आयोग को फिलहाल नाउत्तर कर रखा है।
इमरान खान अभी किसी ओहदे पर नहीं है, लेकिन उनका रूतबा पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी पर खूब चलता है। डॉक्टर अल्वी सदर के रूप में कम इमरान के ताबेदार के रूप में ज्यादा काम करते हैं। कभी वह आर्मी के बड़े आफिसर्स और इमरान खान की गुप्त बैठकें करवाते हैं तो कभी वह उनके लिए राजनीतिक बयानबाजी कर देते हैं। और तो और सभी प्रोटोकॉल तोड़कर पाकिस्तानी राष्ट्रपति के ओहदे पर होने के बावजूद डॉ अल्वी खुद इमरान खान से मिलने उनके घर चले जाते हैं। उन्होंनें तो इमरान खान की मर्जी के मुताबिक चुनाव आयोग को अपने घर बुलाकर पंजाब और खैबरपख्तुनख्वा में चुनाव की तारीख बताने का फरमान जारी कर दिया। जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस काम के लिए राष्ट्रपति भवन जाने से इंकार कर दिया तो डॉ अल्वी ने खुद ही चुनावों की तारीख का ऐलान कर दिया। बाद में मामले को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया और चुनाव आयोग के अधिकार को खारिज करते हुए राष्ट्रपति द्वारा चुनाव की तारीख तय किए जाने को सही करार दिया। उल्लेखनीय है कि डॉ अल्वी ने इमरान खान के हटने के बाद बीमारी का बहाना बनाकर शहबाज शरीफ को वजीर ए आजम पद की शपथ दिलवाने से इंकार कर दिया था।
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मतलब, सत्ता में नहीं होने के बावजूद इमरान के लिए पाकिस्तान का इकोसिस्टम काम कर रहा है। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार ने हाल ही में यह स्वीकार किया है कि रिटायरमेंट के बाद भी वह इमरान खान और पूर्व आईएसआई जनरल फैज के संपर्क में रहे हैं। उन्होंने यह भी माना कि खुद इमरान खान ने उन्हें फोन कर के अदालती मामलों में सहयोग करने का निवेदन किया। अब यह आम तास्सुर है कि साकिब निसार और जनरल फैज आज भी इमरान खान के लिए अदालतों को मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए पाकिस्तान की मौजूदा पीडीएम की सरकार इमरान के सामने एक दम पंगु दिखाई दे रही है। इमरान इस सरकार की हैसियत को खुली चुनौती दे रहे हैं और सरकार सिर्फ बेचारगी का सबूत दे रही है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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