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Oscar Awards: दो-दो भारतीय फिल्मों के लिए ऑस्कर गर्व की बात है, लेकिन…

Oscar Awards, आरआरआर (RRR)' फिल्म के गीत ‘नाटू नाटू' को बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग का ऑस्कर और नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ‘द एलीफेंट ह्विसपरर्स' को बेस्ट शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री का ऑस्कर अवॉर्ड मिला है।

Oscar Awards is a matter of pride for two Indian films, but

ये वाकई में हर देशवासी के लिए गर्व की बात है कि 'आरआरआर (RRR)' फिल्म के गीत 'नाटू नाटू' को बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग का ऑस्कर और नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री 'द एलीफेंट ह्विसपरर्स' को बेस्ट शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री का ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। लेकिन देश भर के फिल्ममेकर्स, समीक्षकों और फिल्मी दुनिया से किसी भी रूप मे जुड़े लोगों के बीच एक बहस भी शुरू हो गई है कि आखिर इस गाने या डॉक्यूमेंट्री में ऐसा था क्या, जो बाकी सैकड़ों डॉक्यूमेंट्रीज या गानों में नहीं था।

यूं खुशी की खबरों के बीच इस तरह की चर्चा अच्छे संदेश नहीं देती, सो पब्लिक प्लेटफॉर्म पर ऐसा कुछ भी लिखने से ये लोग परहेज कर रहे हैं, लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप्स और निजी बातचीत में ये चर्चाएं तेजी से बढ़ रही हैं। अब कुछ खबरें जानिए, जो इस बार ऑस्कर गई भारतीय फिल्मों या डॉक्यूमेंट्रीज के लिए प्रतिष्ठित अखबारों या वेबसाइट्स पर छप रही थीं।

इंडिया टाइम्स समेत कई वेबसाइट्स, अखबारों ने खबर छापी थी RRR के निर्देशक राजमौली ने ऑस्कर पुरस्कारों की लॉबिंग के लिए पूरे 80 करोड़ का बजट रखा है। अमेरिका के जाने माने मार्केटिंग एक्सपर्ट्स की टीम को हायर किया गया था और राजमौली ने खुद पूरी टीम के साथ 4 महीने पहले से लॉस एंजेलिस में डेरा डाल दिया था। हालांकि जिन स्टार्स की शूटिंग थी, वो आते जाते रहे।

आपको याद होगा कि जब 'लगान' ऑस्कर के लिए गई थी, तो आमिर खान ने भी ऐसा ही किया था और तब देश को पता चला कि ऑस्कर्स के लिए किस हद तक लॉबिंग होती है। आम भारतीय निर्माता तो ऑस्कर पुरस्कार के लिए इतनी लॉबिंब के बारे में सोच भी नहीं सकता। 80 करोड़ में तो वो कई फिल्में बनाकर रिलीज कर देगा, ना कि लॉबिंग के लिए खर्च करने की सोचेगा।

अगर राजमौली ने इतनी लॉबिंग की भी तो क्या मिला, पूरी फिल्म नहीं केवल एक गाने को ही नॉमिनेट किया गया। हालांकि उसे ऑस्कर मिलना बड़ी बात है, आमिर को तो वो भी नहीं मिला था। लेकिन 'स्लमडॉग मिलेनियर' और 'गांधी' जैसी फिल्मों को थोक में ये अवॉर्ड मिल जाते हैं क्योंकि उनका डायरेक्टर ही विदेशी था। उसी के चलते गांधी की ड्रेस डिजाइनर भानु अथैया, स्लमडॉग मिलेनियर के साउंड इंजीनियर रसूल पुकुट्टी और संगीतकार एआर रहमान को भी ऑस्कर मिल गया था।

यही सब कारण है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा तबका ऑस्कर को कभी तवज्जो नहीं देता। उनको पता है कि कभी किसी मूवी को बेस्ट फिल्म के लिए मिलने वाला तो है नहीं, बल्कि जिनको मिलता भी है, उसमें लॉबिंग की बड़ी भूमिका रहती है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अब तो कई भारतीय निर्माता निर्देशक भारत में होने वाले एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल गोवा (IFFI) में भी अपनी फिल्में नहीं भेजते। कभी कभी तो नेशनल अवॉर्ड्स में भी नहीं, बल्कि सीधे ऑस्कर के लिए भेजते हैं।

'आरआरआर' के निर्माता निर्देशक ने जहां ऑस्कर में लॉबिंग के लिए बड़ा पैसा खर्च किया वहीं IFFI में अपनी फिल्म तक नॉमिनेट करना जरूरी नहीं समझा। आरआरआर को यूं इफ्फी (IFFI) के इंडियन पैनोरमा 2022 में चुना गया है, लेकिन उसे डिस्ट्रीब्यूटर्स की एसोसिएशन ने भेजा था। उन्हें बखूबी पता था कि भारत सरकार के रास्ते भेजने से कोई फायदा नहीं होगा बल्कि वो खुद भी ऑस्कर के लिए नॉमीनेट होने के रास्ते जानते हैं। खतरा ये भी होता है कि अगर भारत सरकार के अवॉर्ड में उनकी मूवी या डॉक्यमेंट्री नहीं चुनी जाती तो ऑस्कर में उनकी स्थिति कमजोर पड़ जाती है।

यूं भारत सरकार IFFI के इंडियन पैनोरमा में चुनी गई फिल्मों और चुनी गई डॉक्यूमेंट्रीज के निर्माता निर्देशकों, टीम को अपने खर्चे पर साल भर दुनिया भर के कई अवॉर्ड समारोहों में भेजती है। लेकिन इस साल चुनी गई दोनों ऑस्कर विजेताओं के पास पैसों की कोई कमी नहीं, इंटरनेशनल फेस्टीवल्स का उन्हें पुराना तजुर्बा है, सो उन्होंने भी IFFI में फिल्म ना भेजना ही बेहतर समझा।

इफ्फी समेत कई फिल्म फेस्टीवल्स की ज्यूरी में रहे इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री मेकर श्याम मलिक देवआनंद के भाई विजय आनंद की आत्मकथा 'एक था गोल्डी' के हवाले से बताते हैं कि, ''विजय आनंद ने लिखा है कि उनकी फिल्म 'गाइड' इसी वजह से ऑस्कर नहीं जीत पाई क्योंकि गाइड फिल्म की लॉबिंग के लिए वह और देवआनंद पैसा नहीं जुटा पाए और इंडिया लौट आए''। श्याम मलिक का मानना है कि इंटरनेशनल पॉलिटिक्स भी ऑस्कर अवॉर्ड्स में भूमिका निभाती है। वो कहते हैं, ''चूंकि आरआरआर का नाटू नाटू गीत यूक्रेन के प्रेसीडेंशियल पैलेस में फिल्माया गया है, इसलिए पूरी पश्चिमी लॉबी उसके साथ थी''।

श्याम मलिक का दावा ऐसे ही नहीं है। मशहूर पत्रिका वैरायटी ने 2016 में एक अनुमान छापा था कि 3 मिलियन डॉलर से 10 मिलियन डॉलर तक का खर्च किसी भी मूवी के लिए ऑस्कर की लॉबिंग में आता है। हालांकि न्यूयॉर्कर ने छापा कि जो मूवीज पश्चिमी देशों की नहीं हैं, या फिर अनजान निर्माताओं ने बनाई है, उनके लिए ये खर्च और भी बढ़ जाता है। कई गैर पश्चिमी निर्माता निर्देशक तो फिल्में बनाने से पहले ही अपनी स्क्रिप्ट में इस तरह के बदलाव लाते हैं, जिससे ऑस्कर के समय पश्चिमी देशों को खुश करने वाली स्टोरीज वहां की मीडिया में छपवाई जा सके और इसके लिए स्क्रिप्ट में बदलाव और शूटिंग लोकेशंस तय करने तक के लिए एक्सपर्ट्स को हायर किया जाता है।

जब 'द एलीफेंट व्हिसपर्स' को ऑस्कर नॉमीनेशन मिला था, तो लोग चौंके थे, क्योंकि उन्होंने इसका नाम ही नहीं सुना था। जिन लोगों ने नेटफ्लिक्स पर ये डॉक्यूमेंट्री देखी है, वो भी इसे सामान्य ही बताते हैं। हाथी के बच्चे को वन विभाग की मदद से एक परिवार पालता है बस इतनी सी कहानी है। सिनेमेटोग्राफी छोड़कर आप उस डॉक्यूमेंट्री में ऑस्कर लायक क्या क्या है, ये पता करने के लिए काफी बहस करेंगे। हालांकि मासूम जानवर होने से आपका इमोशनल पक्ष उसे पसंद करेगा। लेकिन उसकी निर्माता के तौर पर दिल्ली की लड़की गुंजीत मोंगा का नाम पिछले कुछ सालों में ही काफी बड़ा हो गया है।

खासतौर पर जब से वो अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फिल्मों से जुड़ीं तब से। उनकी एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री 'पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस' को पहले ही 2019 में ऑस्कर मिल चुका है, जबकि शॉर्ट फिल्म 'कवि' को 2010 में ऑस्कर में नॉमीनेशन मिल चुका है। उनकी होम प्रोडक्शन 'लंच बॉक्स' को बाफ्टा अवॉर्ड्स में नॉमीनेशन मिल चुका है। जाहिर है उनको पता है कि ऑस्कर आदि इंटरनेशनल अवॉर्ड्स में कैसे जाना है, किससे मिलना है और कैसे अपनी डॉक्यूमेंट्रीज के लिए लॉबिंग करनी है। उस पर उनकी फिल्म की निर्देशक कार्तिकी गोन्साल्विस डिस्कवरी और एनीमल प्लानेट जैसे इंटरनेशनल चैनल्स के लिए पहले से काम कर रही हैं, सो पहले से ही इंटरनेशनल फिल्म लॉबीज के सम्पर्क में हैं।

कहने का मतलब यह है कि आम भारतीय फिल्म निर्माता, निर्देशक या कलाकार चाहे वो आमिर खान या अमिताभ बच्चन ही क्यों ना हो ऑस्कर जीतना नामुमकिन जैसा है, लेकिन पर्याप्त सम्पर्कों, राजनीतिक प्रतीकों के इस्तेमाल और लॉबिंग के जरिए ये मुकाम हासिल करने के मौके बढ़ जाते हैं। ये भी सच है कि 'नाटू नाटू' सांग को ऑस्कर भले ही ना मिलता, देश के बच्चे बच्चे ने उसे अपना ऑस्कर पहले ही दे दिया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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