Opposition Parties: भारत की जड़ों से कट कर मतिभ्रम का शिकार है विपक्ष

Opposition Parties: विपक्षी दल यह समझ कर चल रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी के कारण ही जीत रही है| इसलिए उनका सारा फोकस नरेंद्र मोदी पर बना हुआ है| पिछले दस साल से भाजपा आगे बढ़ती जा रही है, और विपक्षी दलों की कुंठा बढ़ती जा रही है| विपक्षी दल मोदी को अपने रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन मान रहे हैं| अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए सही रास्ता खोजने के बजाए, वे उन पर हमले कर रहे हैं| अपने विरोधी पर व्यक्तिगत हमले करना अच्छी राजनीति नहीं होती| वह सिर्फ निराशा और कुंठा होती है, जिससे वोटरों को कोई प्रभावित नहीं कर सकता| यही कारण है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मोदी पर हमले करके वोटरों का दिल नहीं जीत पा रहे|

विपक्षी दल मोदी के अंधे विरोध के चलते देश और मोदी में फर्क भी नहीं कर पा रहे| उनकी वही हमलावर रणनीति उनके लिए घातक साबित हो रही है| राजनीति विचारधारा पर आधारित होनी चाहिए, व्यक्ति आधारित नहीं| कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाईटेड सभी व्यक्ति और परिवार आधारित पार्टियां है, इसलिए उनकी सोच भी व्यक्ति और परिवार तक सीमित हो गई है|

Opposition Parties victim of hallucination only targeted narendra modi to win

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को पहले यह खोज करनी होगी कि भारतीय जनता पार्टी क्यों जीत रही है| उन कारणों की समीक्षा करनी होगी, फिर उनका तोड़ निकालना होगा| अगर मोदी अपनी नीतियों के कारण जीत रहे हैं, तो विपक्ष को अपनी नीतियाँ बदलनी होंगी| क्योंकि वोटर मोदी की नीतियों को पसंद कर रहे हैं| नीतियों में वर्ग विशेष को ध्यान में रख कर बनाई गई नीतियाँ काम नहीं आती, अगर आप वर्ग विशेष को ध्यान में रख कर नीतियाँ बनाते हैं, तो आप उस वर्ग के साथ जोड़ कर देखे जाते हैं|

कांग्रेस को शायद इतना नुकसान किसी नीति ने नहीं किया होगा, जितना यूपीए सरकार के समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस एक बयान ने किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक इस देश के अल्पसंख्यकों का है| अल्पसंख्यक का मतलब यहाँ मुस्लिम ही माना जाता है| 2014 में देश में सत्ता परिवर्तन के कई कारणों में से एक सबसे बड़ा कारण यह था| देश के संसाधनों पर पहला हक किसी भी वर्ग विशेष का नहीं हो सकता|

Opposition Parties victim of hallucination only targeted narendra modi to win

इस तरह के बयान और कृत्य करके कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समाज कल्याण का व्यापक दृष्टिकोण त्याग दिया था| यूपीए सरकार के किसी घटक दल ने मनमोहन सिंह के बयान को सुधारने की कोशिश नहीं की| इसके जवाब में जब मोदी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की बात करते हैं, तो वह सभी वर्गों को प्रभावित कर रहे होते हैं|

यूपीए जब दस साल तक सत्ता में थी, भारतीय जनता पार्टी ने उन दस सालों में 2004 और 2009 में हुई हारों की समीक्षा की| वे कारण खोजे, जिनके कारण वह वाजपेयी जैसे स्पष्टवादी, विशाल हृदय वाले लोकप्रिय नेता के होते हुए भी हार गई| क्या कांग्रेस या अन्य किसी विपक्षी दल ने कभी समीक्षा की कि भाजपा 2014 और 2019 में क्यों जीती और उसके बाद भी क्यों जीत रही है|

अभी तो कांग्रेस और विपक्षी दल यह मान कर चल रहे हैं कि बेरोजगारी और महंगाई की वजह से देश में मोदी के खिलाफ आक्रोश है| अगर ऐसा होता, तो इन विधानसभा चुनावों में मोदी के खिलाफ आक्रोश सामने आता| हिन्दी बेल्ट के तीनों राज्यों में मोदी खुद ही अपने चेहरे पर चुनाव लड़ रहे थे| विपक्ष यह नहीं कह सकता कि तीनों राज्यों में भाजपा अपने मुख्यमंत्रियों के चेहरों के कारण जीती|

उत्तर भारत के तीनों राज्यों ने विपक्ष की इस धारणा को ही नकार दिया कि वोटर बेरोजगारी और महंगाई के कारण मोदी से खफा है| दूसरा विपक्षी नेता यह मान कर चल रहे हैं कि विपक्षी दल भाजपा के सामने साझा उम्मीदवार खड़ा करेंगे, तो वे मोदी को हरा देंगे| क्या उन्होंने कभी सोचा है कि भाजपा मोदी के अलावा भी किन्ही कारणों से जीत रही होगी| क्योंकि विपक्षी दलों ने यह सोचा ही नहीं, इसलिए इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह हार गई|

विधानसभा चुनाव हों, या लोकसभा चुनाव, विपक्ष भाजपा को तब तक नहीं हरा सकता, जब तक वह भाजपा की असली ताकत को नहीं समझेगा| भाजपा की ताकत सिर्फ मोदी का व्यक्तित्व ही नहीं है| भाजपा चार कारणों से जीत रही है| सबसे पहला कारण है, उसकी हिंदुत्व की विचारधारा, दूसरा कारण है राष्ट्रवादी सोच| तीसरा है संगठन की ताकत| नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इन तीनों कारणों में चौथा कारण जोड़ा है गरीबों, जरुरतमंदों और वास्तव में वंचितों को सरकारी खजाने से सीधा लाभ पहुंचाना|

जब तक समूचा विपक्ष, या जिसे अब इंडी एलायंस कहा जा रहा है, वह इन चार में से तीन पर भाजपा की बराबरी नहीं करता, वह भाजपा को कभी नहीं हरा सकता| जिन अहिन्दी भाषी राज्यों में क्षेत्रीय दल जीत रहे हैं, उसका एक बड़ा कारण यह है कि अहिन्दी भाषी राज्यों में राष्ट्रवाद की जगह क्षेत्रीय स्वाभिमान ज्यादा हावी हो जाता है| कांग्रेस भी उन्हीं राज्यों में जीत रही है, जहां क्षेत्रीय आकांक्षाएं और क्षेत्रीय भाषा का जोर ज्यादा है| दक्षिण के राज्यों में भाजपा को हिन्दी भाषी माना जाता है, इसलिए उसके पाँव वहां नहीं जम रहे|

मोदी ने भाजपा की हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा को और प्रखर करने का काम गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू कर दिया था| उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में भी उनके उसी काम की भूमिका थी| प्रधानमंत्री बनने के बाद काशी विश्वनाथ कोरिडोर और उज्जैन के महाकालेश्वर कोरिडोर का निर्माण करवा कर तथा पड़ोसी मुस्लिम देशों में सताए जा रहे हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देने का क़ानून बना कर उन्होंने हिंदुत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई|

बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राईक करवा कर, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान से किसी तरह की बातचीत को बंद करके और जम्मू कश्मीर से 370 हटाकर मोदी ने राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया| उन्होंने यह धारणा बनाई कि भारत विश्वगुरु था, और वह ऊँचाई फिर से हासिल करनी है| अगर मोदी अपनी विचारधारा के कारण जीत रहे हैं, तो विपक्ष को भी वक्त के मुताबिक़ अपनी विचारधारा में परिवर्तन लाना होगा| क्योंकि विपक्षी दलों की विचारधारा वक्त की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही थीं, इसलिए जनता ने उनको सत्ता से बाहर फेंक दिया|

देश की अधिकांश जनता आज़ादी के बाद से इन्तजार कर रही थी कि कोई नेता आए, जो उनकी रोजमर्रा की जिन्दगी की समस्याओं का निवारण करने के साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत को फिर से ऊंचाईयों पर ले जाने का काम करे| मोदी ने सिर्फ विचारधारा और राष्ट्रवाद पर उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं की, लोगों की आम जिन्दगी की दुश्वारियां खत्म करने के लिए भी बहुत काम किए|

मोदी भाजपा की विचारधारा की कसौटी पर भी खरे उतरे हैं, और लोगों की रोजमर्रा की जिन्दगी की दुश्वारियां दूर करने में भी खरे उतरे हैं| क्या देश के किसी प्रधानमंत्री ने पहले यह सोचा था कि एससी, एसटी और ओबीसी के अलावा आर्थिक आधार पर आरक्षण का भी प्रावाधान होना चाहिए| किसी भी सरकार का उद्देश्य ख़ास वर्गों का ख्याल रखना होना चाहिए या सभी का ख्याल रखना होना चाहिए| अधिकांश जनता को मोदी की विचारधारा और कार्यक्रम विपक्ष की विचारधारा और कार्यक्रमों से बेहतर लगे, इसलिए वोटर बार बार मोदी को चुन रहे हैं|

इसके जवाब में कांग्रेस कह सकती है कि जिस विचारधारा पर चलते हुए उसने साठ साल तक जनादेश हासिल किया, वह गलत कैसे हो सकती है| तो कांग्रेस को मंथन करना पड़ेगा कि देश में शिक्षा का विस्तार होने के बाद देश के वोटरों की सोचने की क्षमता में भी विस्तार हुआ है| आप अपनी विचारधारा उन पढ़े लिखे वोटरों पर लाद नहीं सकते, जो खुद सही और गलत का फर्क करना जानने लगे हैं|

कांग्रेस ने आज़ादी के बाद से ही हिन्दुओं को बाहरी और बेगाना बना दिया था| जवाहर लाल नेहरू ने डिस्कवरी आफ इंडिया में कांग्रेस को थ्योरी दे दी थी कि जैसे मुगल बाहर से आए थे, वैसे ही हिन्दू भी बाहर से आए थे| कांग्रेस उस झूठी थ्योरी से कभी बाहर नहीं निकल पाई, जबकि आज़ादी के बाद से देश का 80 प्रतिशत हिन्दू खुद को लूटा हुआ आहत महसूस कर रहा था|

आर्य बाहर से आए थे, यह थ्योरी गलत साबित हो चुकी है, उसी तरह कांग्रेस भी गलत साबित हो गई है| धरती चपटी वाली थ्योरी गलत साबित हो गई है, तो अब कोई नहीं कहता कि धरती चपटी है| इसलिए कांग्रेस को अपनी विचारधारा पर मंथन करना चाहिए| 2014 के चुनाव हारने के बाद ए.के. एंटनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यही बात जरा दूसरे शब्दों में कांग्रेस को समझाने की कोशिश भी की थी| अब तो बात सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ने की होने लगी है| ऐसे में इंडी एलायंस कैसे देश को जीतने की बात सोच सकता है|

राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत भूमि की प्राचीन विचारधारा है| बाहर से आए जो लोग राष्ट्रवाद में विश्वास नहीं रखते उन्होंने देश के टुकड़े करवा कर अपना अलग देश बना लिया| इसके बाद देश के नेतृत्व को राष्ट्रवाद को सर्वोपरि मान कर राष्ट्र विकास की अवधारणा पर काम करना चाहिए था| शुरू के पचास साल तक होता भी रहा, राष्ट्रगान और वंदे मातरम का किसी ने अपमान करने की हिम्मत नहीं की थी|

लेकिन अस्सी के दशक में आतंकवाद की शुरुआत के बाद से कट्टरवाद ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का अपमान शुरू किया| जिसे कांग्रेस और विपक्षी दलों ने आँख मूँद बर्दाश्त करना शुरू कर दिया| बात यहाँ तक पहुंच गई कि जिस कांग्रेस ने देश को आज़ादी दिलाई थी, उसका अध्यक्ष विदेश जाकर कहता है कि भारत कोई राष्ट्र ही नहीं है, यह यूरोपियन यूनियन की तरह राज्यों का समूह है| हाल ही में यहाँ तक कह दिया गया कि भारत माता क्या चीज है| जागृत भारत को समझे बिना, जागृत भारत की आकांक्षाओं को समझे बिना कांग्रेस या इंडी एलायंस भाजपा को हराने की कल्पना भी नहीं कर सकता|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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