NRF India: भारत में शोध की संस्कृति विकसित करने के लिए सबसे बड़ा निवेश
NRF India: इसकी चर्चा लंबे समय से चल रही थी लेकिन अब देश में शोध की संस्कृति विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान (एनआरएफ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित विधेयक के प्रस्ताव को पहले स्वीकृति मिली। अब लोकसभा से भी राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक-2023 पारित हो गया है। यह विधेयक साइंस एंड इंजीनयिरंग रिसर्च बोर्ड एक्ट 2008 का स्थान लेगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 अगस्त को लोकसभा में इसे पेश किया था।
एनआरएफ पर बड़े दायित्वों का दारोमदार है। शोध की स्थिति को लेकर भारत में पढ़ने लिखने की परंपरा की एक खास इको सिस्टम लगातार आलोचना करता था। उसके बावजूद बीते 70 से अधिक सालों में कोई खास परिवर्तन नहीं आया। अध्ययन और शोध जैसे विषय सिर्फ डिग्री और नौकरी हासिल करने के माध्यम भर बन कर रह गए थे। एनआरएफ की योजना देखकर लगता है कि आने वाले समय में यह देश के अंदर शोध का माहौल बनाने और इस संदर्भ में पढ़ने लिखने का एक वातावरण बनाने के लिहाज से एक बेहद अहम साधन साबित होगा। एनआरएफ का संचालन एक गवर्निंग बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसके सदस्य 15 से 25 जाने माने शोधकर्ता और विषय के जानकार होंगे।

क्या है योजना?
जैसा कि योजना है, एनआरएफ के तत्वावधान में होने वाले शोध और अध्ययन से सभी मंत्रालय प्रभावित होंगे, इसलिए प्रधानमंत्री इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री दोनों पदेन उपाध्यक्ष होंगे। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि अनुसंधान संस्थान का दायरा व्यापक रहने वाला है। एनआरएफ की कार्यकारी परिषद के प्रमुख वैसे प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ही होंगे।
इस पूरे अभियान को चलाने के लिए कोष की आवश्यकता होगी। किसी भी योजना का संसाधन नियोजन एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी उद्देश्य से इस पूरी योजना को वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए 50 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जायेंगे। कहां से कितना पैसा इस योजना के लिए आना है, इसकी एक संभावित रूपरेखा भी तैयार की गई है। 14 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित राशि भारत सरकार देगी, जबकि शेष 36 हजार करोड़ रूपये उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, सीएसआर आदि से जुटाया जायेगा।
केन्द्र सरकार के अनुसार, यह संस्थान 'अनुसंधान एवं विकास' का मार्ग प्रशस्त करेगा तथा देशभर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों तथा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं में अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देगा।
सबसे पहले तो शोध संस्थान को भारत के तात्कालिक मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक शोध लक्ष्यों की रूपरेखा तैयार करनी है। शोध की बिगड़ी स्थिति को ढर्रे पर लेकर आना है। इस प्रक्रिया में जो पहले से चल रहे अकादमिक एवं शोध संस्थान हैं, वहां शोध-अनुसंधान की संस्कृति को नए सिरे से बढ़ावा देने से लेकर उन्हें विकसित करने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगा। इस क्रम में देश भर में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में शोध-अनुसंधान विकास के प्रारंभिक चरणों पर सुधार की आवश्यकता पर बल दिया जाएगा। यदि प्रारंभिक स्तर पर स्थितियों की चिंता कर ली गई तो भारत में शोध के भविष्य के प्रति आशान्वित हुआ जा सकेगा।
शोध पर पहली बार होगा इतना बड़ा निवेश
नरेन्द्र मोदी की सरकार में पहली बार शोध विकास और नवाचार में इतने बड़े निवेश की चर्चा हो रही है। इसका मतलब साफ है कि सरकार इसकी आवश्यकता को भलीभांति समझती है। इससे पहले शोध की खराब स्थिति को लेकर लंबे लंबे शोध पत्र और पत्रिकाओं में लेख तो लिखे गए हैं लेकिन उसकी स्थिति सुधरे, उस दिशा में कोई गंभीर काम दिखाई नहीं पड़ा। जबकि शोध और नवाचार में निवेश किसी भी देश की वृद्धि एवं समृद्धि के लिए अति आवश्यक है। इसीलिए सरकार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए पहले से जिस बजट का प्रावधान था, उसमें सुधार किया है।
स्टार्टअप्स और उससे जुड़े नवउद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की योजनाएं बनी हैं। जिसका लाभ भी स्टार्ट अप की सहायता तलाश रहे लोगों को मिल रहा है। दूसरी तरफ अक्षय ऊर्जा जैसे विषय पर खूब काम हो रहा है। तकनीक के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसे क्षेत्रों में शोध को प्रोत्साहन देने की दिशा में सरकार की तरफ से कदम बढ़ाया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नए प्रयोग और शोध हेतु देश में प्रोत्साहन का माहौल बना है। इसी का परिणाम था कि कोविड के दौरान अपना कोविड 19 वैक्सिन कोवैक्सिन बनाया। जिससे ना सिर्फ भारतीयों की मदद हुई बल्कि दूसरे देशों के भी लाखों लोगों की जान इस खोज ने बचाई।
राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान बिल, 2023 शोध को लेकर केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता का अगला चरण है। इस विधेयक को गत चार अगस्त को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के उपरांत इससे राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान (एनआरएफ) की स्थापना संभव होगी। योजना के संबंध में पढ़कर और जानकर यह कहा जा सकता है कि यदि ईमानदारी से इसकी योजना के कार्यान्वयन पर काम हुआ तो भारत में शोध-अनुसंधान एवं विकास से जुड़े ढांचे के व्यापक परिवर्तन में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शोध के साथ शिक्षा पर भी ध्यान देने का समय
शोध की तरफ अब हमारा ध्यान गया है, यह अच्छी बात है लेकिन अब इसके साथ कुछ अन्य बातों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। जैसे कि दुनिया के श्रेष्ठ संस्थानों में दूर दूर तक हमारे देश का कोई शिक्षण संस्थान नहीं है। कोई देश का सम्मानित व्यक्ति अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भारत में रखना पसंद नहीं करता। आज स्थिति यह है कि अधिकांश बड़े उद्योगपतियों के बच्चे हों या फिर केन्द्रीय मंत्रियों के बच्चे, सभी भारत के बाहर जाकर शिक्षा ले रहे हैं।
यहां हमें विचार करना होगा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी क्या कमी रह गई कि देश से प्रेम करने वाले प्रतिभावान बच्चे भी पलायन करके बाहर जा रहे हैं। उनमें अधिकांश वहीं जाकर नौकरी पा लेते हैं। इस तरह हमारे देश का जो ऊर्जावान मस्तिष्क है, वह सुंदर पिचाई, शांतनू नारायण, सत्या नडेला, संजय मल्होत्रा, संजय झा तो बन जाता है लेकिन वह देश के बाहर जाकर बनता है। इससे यह बात तो साफ है कि हमारे देश में ऊर्जावान और क्षमतावान लोगों की कमी नहीं है। कमी है सही दिशा की और सही शिक्षा व्यवस्था की।
राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान (एनआरएफ) की स्थापना ने हमें यह अवसर प्रदान किया है कि देश की शोध की स्थिति के साथ साथ हम शिक्षा पर भी बात करें। शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने पर बात करें। हमारे देश के युवा बाहर जाने पर मजबूर ना हों, इसलिए विश्व स्तरीय शिक्षा उन्हें भारत में मिले। इस दिशा में भी अब अगला कदम बढ़ाने का समय आ गया है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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