Madhya Pradesh Elections: मध्यप्रदेश में बागियों को छोटी पार्टियों से उम्मीद

Madhya Pradesh Elections: मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के बीच हमेशा से सीधा मुकाबला रहा है| 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा 41.02 फीसदी वोट पाकर भी 109 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि कांग्रेस ने 40.89 फीसदी वोटों पर 114 सीटें हासिल कर लीं थी| कांग्रेस के वोट में तीन फीसदी का इजाफा हुआ था, और इसका कारण मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण था| पिछले चुनावों से पहले कमलनाथ ने एक बैठक में कहा था कि अगर 90 फीसदी मुस्लिम वोट कांग्रेस के पक्ष में हो, तो वे सरकार बना सकते हैं| चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी का कारण भी मुस्लिम ध्रुवीकरण को माना गया था|

2011 की जनगणना में मध्यप्रदेश में मुसलमानों की आबादी 7 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 10 प्रतिशत मानी जा रही है| हालांकि वे 40 से ज्यादा सीटों पर बिखरे हुए हैं, लेकिन करीब 22 सीटों में जीत हार तय करते हैं| इस बार भी कांग्रेस की उम्मीद मुस्लिम प्रभाव वाली 22 सीटों पर टिकी है| 2018 में मुस्लिम मतदाताओं की एकतरफा वोटिंग के कारण ही इनमें से 10-12 सीटें 2018 में कांग्रेस के हाथ लग गई थी| वह 230 में से 114 सीटें जीतने में कामयाब हो गई और बसपा के दो और सपा के एक विधायक के समर्थन से सरकार भी बना ली थी, लेकिन 15 महीने बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 25 विधायकों के विद्रोह के चलते कमलनाथ सरकार गिर गई थी|

MP Elections 2023: Rebels in Madhya Pradesh have hope from small parties

कांग्रेस को यह भी डर है कि असदुद्दीन औवेसी मुस्लिम प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपने मुस्लिम उम्मीदवार उतार कर उसका खेल बिगाड़ सकते हैं| कमल नाथ ने जो बात 2018 में बंद कमरे की बैठक में मुस्लिम वोट बैंक के बारे में कही थी, उसके सामने आ जाने के बाद से उन्हें हिंदू ध्रुवीकरण से होने वाले नुकसान का भी डर भी सता रहा है| मध्यप्रदेश में संघ का व्यापक असर होने के कारण हिंदुत्व का प्रसार ज्यादा है, इसलिए 2018 के अपने बयान की प्रतिक्रिया से बचने के लिए कमलनाथ ने अपना हिन्दू चेहरा दिखाने की कोशिश की है|

हिंदू मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ही कमल नाथ ने बागेश्वर के धीरेन्द्र शास्त्री को अपने इलाके छिंदवाडा में बुला कर उनकी कथा करवाई और भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने में गुरेज भी नहीं किया| इस पर उनकी दिग्विजय सिंह से खुली तकरार भी हुई| हालांकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ही कांग्रेस के अर्जुन सिंह कैंप से ताल्लुक रखते थे, लेकिन कमलनाथ को डर है कि दिग्विजय सिंह अपनी खुली मुस्लिम परस्त राजनीति से उनका खेल बिगाड़ भी सकते हैं| इसलिए हाल ही में जब टिकट बंटवारे का विरोध हो रहा था, तो कमलनाथ ने उसका ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़ो|

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मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने लगभग सभी सीटों पर उम्मीदवारों का एलान कर दिया है| कांग्रेस की सिर्फ एक सीट आमला और भाजपा की गुना-विदिशा की दो सीटों पर उम्मीदवारों का एलान बाकी है| कांग्रेस में 42 सीटों पर और भाजपा में 22 सीटों पर घोषित उम्मीदवारों का विरोध शुरू हो चुका है| दोनों दलों में 6-6 सीटों पर खुली बगावत की स्थिति पैदा हो गई है|

दोनों ही दलों के प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस के कमल नाथ और भाजपा के वी डी शर्मा, कार्यकर्ताओं के रोष का सामना कर रहे हैं| कमल नाथ के बंगले के सामने कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास कर लिया था| पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव की बहू रोशनी यादव ने कांग्रेस को धमकी दी है कि उनकी सीट पर उम्मीदवार बदल कर उन्हें टिकट नहीं दिया गया, तो वह निर्दलीय लड़ेंगी| ऐसे संकेत मिले हैं कि कांग्रेस कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने पर विचार रही है और अखिलेश यादव को संतुष्ट करने के लिए कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार वापस भी ले सकती है|

इस बीच दोनों पार्टियों से ठुकराए हुए नेताओं के लिए केजरीवाल और मायावती ने अपनी अपनी पार्टियों के दरवाजे खोल दिए हैं| भाजपा या कांग्रेस का टिकट पाने से वंचित नेताओं ने छोटे दलों के दरवाजों पर दस्तक देना शुरू कर दिया है, कुछ को हाथों हाथ टिकट मिल भी गया है| चाचौड़ा से भाजपा की ममता मीणा आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर गई हैं, इसी तरह लहार से भी भाजपा के रसाल सिंह ने बसपा से ताल ठोक दी है| पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह के बेटे राकेश सिंह भी मुरैना से बसपा की टिकट पर लड़ रहे हैं| टिकट नहीं मिलने पर भिंड से भाजपा विधायक संजीव कुशवाह ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है| रैगांव से पुष्पराज बागरी और रानी बागरी ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है| सीधी के विधायक केदारनाथ ने भी निर्दलीय लड़ने का ऐलान किया है|

भाजपा से बड़ी बगावत कांग्रेस में है, क्योंकि कांग्रेसी उम्मीदवारों को लग रहा है कि भाजपा की तरफ से शिवराज सिंह चौहान का चेहरा घोषित नहीं होने से नाराज ओबीसी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ होगा और उनकी जीत पक्की है| इसलिए जिन्हें टिकट नहीं मिल रहा वे भड़के हुए हैं| मुरैना की सुमावली सीट से मौजूदा विधायक अजब सिंह कुशवाहा को टिकट नहीं मिला, तो वह अब बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे| पूर्व सांसद गजेन्द्र सिंह राजूखेडी ने धार जिले की धर्मपुरी सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया है| कांग्रेस के नेता नासिर इस्लाम भोपाल उत्तर सीट से चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं| केदार केशाना ने ग्वालियर ग्रामीण से चुनाव लड़ने का एलान किया हुआ है| हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए सुधीर यादव को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया, तो अब वह आम आदमी पार्टी के टिकट पर बन्दा सीट से चुनाव लड़ेंगे|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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