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Mo Sarkar-ओडिशा में डिजिटल शासन की वास्तविक क्षमता को कर रही साकार

By मनोज मिश्रा
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भुवनेश्वर, 30 दिसंबर: लोकतंत्र की विरासत को शासन का मॉडल मूर्त रूप दे रहा है। आज जिस तरह से आला दर्जे की टेक्नोलॉजी की वजह से डिजिटल गवर्नेंस पर जोर बढ़ा है, सरकारें नागरिकों के साथ बेहतर तरीके और गहराई से जुड़ने के लिए विचारों और संरचनाओं को नए सिरे शुरू कर रही हैं। खासकर के जब उद्योग तेजी से एनालॉग से डिजिटल की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, उत्तरदायी सरकारें प्रतिनिधि लोकतंत्र से सहभागी लोकतंत्र की ओर बढ़ रही हैं। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद यह विशाल और लगातार बदलाव वाला प्रबंध है, जो कि सांस्कृतिक और व्यवहारिक परिवर्तन से प्रभावित है कि कैसे सरकारें नागरिकों से प्राप्त फीडबैक से पब्लिक सर्विस डिलिवरी को बेहतर करती हैं।

Mo Sarkar scheme in Odisha is realizing the real potential of Digital Governance on the ground

टेक्नोलॉजी इस बदलाव में एक सहायक है, लेकिन सरकारी टूलकिट में नागरिक सशक्तिकरण की अगुवाई करने के लिए कई और साधन हैं, जो समावेश में निहित हैं। वो दिन जब सरकारी संस्थाओं को लोगों के फीडबैक का इंतजार रहता था, बीत चुके हैं। हम शासन के ऐसे उषा-काल में कदम रख चुके हैं, जहां सरकारों का रुख 'रिएक्टिव' से 'प्रोऐक्टिव' की ओर शिफ्ट हो रहा है। कोविड के बाद हमारे आसपास की दुनिया बदल रही है।

महामारी ने न सिर्फ कारोबार और अर्थव्यवस्था को बाधित किया है, बल्कि शासन की संरचनाओं को भी परखा है। सरकारें नागरिकों की अपेक्षाओं के प्रति कितनी संवेदनशील हैं और वे कितनी तेजी से कार्य कर सकती हैं, यह एक चुनौती है। पिछले कुछ वर्षों में सहभागी लोकतंत्र ने बहुत अधिक ध्यान खींचा है, खासकर सरकार और नागरिकों के बीच सोशल नेटवर्क पर दोतरफा डिजिटल इंटरफेस बढ़ने के बाद।

ताइवान जैसे देशों ने 'टेक-एनेबल्ड सिविक कल्चर' में भारी निवेश किया है, जिसमें नीचे से ऊपर की ओर सूचना साझा करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सामूहिक भागीदारी के साथ कार्रवाई शामिल है। ऑफलाइन की बात करें तो यूके में नागरिक सभाओं की शुरुआत और पेरिस और मैड्रिड में बजट बनाने में सहभागिता लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी की बात का समर्थन करता है।

भारत सरकार भी इस बात में दिलचस्पी ले रही है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के आदर्श वाक्य में 'सबका प्रयास' को शामिल करके सरकार ने राष्ट्र निर्माण में नागरिकों के योगदान के महत्त्व को रेखांकित किया है।

सरकारों के पास जनादेश हमेशा था। संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 16.6 सभी स्तरों पर प्रभावी, जवाबदेह और पारदर्शी संस्थानों के विकास की परिकल्पना करता है। लेकिन, स्पष्ट विवरण 16.6.2 बिंदु में है, जो सार्वजनिक सेवाओं के अपने पिछले अनुभव से संतुष्ट जनसंख्या के अनुपात को मापने का सुझाव देता है।

इसी मूलमंत्र के साथ ओडिशा सरकार ने मो सरकार (या मेरी सरकार) कार्यक्रम शुरू किया है। मो सरकार नागरिक को जोड़ने के अन्य अभियानों में से एक कदम आगे है, क्योंकि यह लोगों के फीडबैक पर अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक सेवाओं की डिजाइन और डिलिवरी में सुधार करने पर आधारित है।

मो सरकार- सहभागी शासन में एक नया युग
ढीले शासन संरचनाओं में नागरिक महज निष्क्रिय विषय होते हैं। अस्पतालों या पुलिस स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता पर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। मो सरकार एक बेहतरीन फीडबैक सिस्टम का इस्तेमाल करके इसी धारणा की बाधा को तोड़ने का प्रयास है, जिसमें मंत्री (मुख्यमंत्री समेत) और सर्वोच्च अधिकारी सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करने के बारे में नागरिकों से अपने अनुभव का आकलन करने को कहते हैं।

एक की जगह अनेक तरीकों से मो सरकार उत्तरदायी शासन में, अधिकारियों के साथ सीधे संवाद और अपनी असंतोष को आवाज देने के लिए नागरिकों को सशक्त करने के वास्ते ऐतिहासिक सुधार है। नागरिक को केंद्र में रखकर मो सरकार मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के 5टी शासन प्रतिमान- ट्रांसपरेंसी, टेक्नोलॉजी, टीमवर्क और टाइम-बाउंड ऐक्शन के जरिए ट्रांसफॉर्मेशन में अच्छी तरह से फिट बैठता है।

यह ओडिशा सरकार की ओर से शुरू की गई अपनी तरह की एक अनूठी पहल है, जिसके जरिए आकस्मिक फीडबैक मेकेनिज्म से नागरिकों और सरकार को सीधे जोड़कर सार्वजनिक कार्यालयों और पदाधिकारियों में व्यावसायिकता और सतत व्यावहारिक बदलाव लाना है। नागरिकों की फीडबैक मो सरकार को चलाने में आधारशिला के रूप में कार्य करती है और सुशासन के प्रतिष्ठित लक्ष्य के नजदीक पहुंचने में मदद करती है।

अधिकारियों को उत्तरदायी और जवाबदेह बनाना
मो सरकार यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक कार्यालयों में जाने वाले किसी भी नागरिक के साथ सम्मान के साथ बर्ताव किया जाएगा और उनकी समस्याओं का नैतिक और समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाएगा। जनता से फीडबैक मिलने के बाद सरकारी अधिकारी हरकत में आ जाते हैं।

मो सरकार असंतुष्ट नागरिकों के फोन नंबर और जनसांख्यिकी को सहेज लेता है। उनका विवरण मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जिले के अधिकारियों तक राज्य प्रशासन के सभी स्तरों के अधिकारियों के साथ साझा किया जाता है। सहभागी लोकतंत्र में यह पहल शीर्ष स्तर से प्रेरित है, क्योंकि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से यह पता लगाने के लिए आकस्मिक कॉल करते हैं कि क्या शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि के लिए समय पर और पेशेवर तरीके से शिकायतों का निवारण किया गया था।

यह योजना अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने के लिए समय-आधारित 'पुरस्कार और दंड' की धारणा का उपयोग करती है। नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत किया जाता है, जबकि अपने कर्तव्यों में चूक करने वाले दोषी सरकारी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाती है।

अधिकारियों की परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (पीएआर) नागरिकों की ओर से दर्ज किए गए असंतोष से निपटने में उनकी जवाबदेही और तत्परता से जुड़ी हुई है। अधिकारियों के पीएआर का 20 प्रतिशत शासन के 5टी चार्टर के लिए निर्धारित है, जिसमें से पांच प्रतिशत मो सरकार के तहत उनके प्रदर्शन के लिए है।

तकनीकी आधार- जनसांख्यिकीय समावेश के लिए 'संपर्क केंद्र'
मो सरकार एक तकनीकी तौर पर सक्षम, निर्बाध संपर्क केंद्र का लाभ उठाकर नागरिक तक पहुंचने की एक व्यापक प्रणाली से मजबूती हासिल करती है। संपर्क केंद्र एक विस्तृत स्केलेबल सिस्टम है, जिसमें कॉल को पंजीकृत करने, कॉलर के अनुभव को बेहतर करने, स्वचालित कॉल वितरण, कॉल रिकॉर्डिंग और गुणवत्ता विश्लेषण की उन्नत तकनीकी सहायता मौजूद है।

यह सिस्टम नागरिकों और सरकार के बीच डायरेक्ट इंटरफेस स्थापित करता है। यह एक सेंट्रलाइज्ड फीडबैक सिस्टम प्रदान करता है जो नागरिकों और सरकार के बीच रियल-टाइम संवाद की सुविधा देता है। इस समय फीडबैक सिस्टम के तहत प्रदेश के 27 विभाग और 250 सेवाएं कवर हो रहे हैं।

नागरिक विवरणों के एकीकृत भंडार के रूप में कार्य करते हुए, यह नागरिकों की अपेक्षाओं में उनके फीडबैक और इनसाइट का विश्लेषण करता है। अधिकारियों की जवाबदेही और विभाग के प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी निगरानी तंत्र भी मौजूद है, इससे सर्विस डिलिवरी और कार्य प्रक्रिया की दक्षता बेहतर हो रही है।

दूर-दराज जगहों के नागरिक जहां अभी भी डिजिटल विभाजन का सामना कर रहे हैं, आईवीआरएस प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए मो सरकार जनसांख्यिकीय समावेशन की चुनौती को सफलतापूर्वक निर्देशित करती है।

जमीन पर प्रभाव पैदा करने के लिए चुनौतियों से निपटना
2 अक्टूबर 2019 को मो सरकार कॉल सेंटर शुरू होने से पहले, राज्य प्रशासन को इसके निर्बाध तरीके से अमल में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लोगों से फीडबैक लेने के लिए कोई संस्थागत ढांचा मौजूद नहीं था। विभिन्न स्रोतों से असमान नागरिक डेटा स्ट्रीम किया गया; और डेटा को संचित करने के लिए कोई प्रणाली या रणनीति नहीं थी।

नागरिक शिकायतों के लिए स्वीकृत मैपिंग स्ट्रैटजी की कमी के अलावा, नागरिकों की फीडबैक में भाग लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के मूल्यांकन के लिए कोई तंत्र नहीं था। लेकिन, मो सरकार ने संपर्क केंद्र नामक एक मजबूत फीडबैक सिस्टम के आधार पर, पब्लिक सर्विस डिलिवरी में एक महत्वपूर्ण योजना के रूप में उभरकर प्रारंभिक चुनौतियों को मात दी है।

इस फीडबैक सिस्टम ने लगभग 1.6 करोड़ नागरिकों की जनसांख्यिकी को मंत्रियों और अधिकारियों को हर महीने प्राप्त होने वाले औसतन 10,000 फीडबैक कॉल के साथ मिलाया है।

मो सरकार जैसी योजनाओं की सफलता नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी की एक नई लहर का प्रमाण है, जो हमारे शासन के द्वार तक पर फैल रही है। पब्लिक सर्विस डिलिवरी को मजबूत करने के लिए फीडबैक की क्राउडसोर्सिंग सरकार-नागरिक इंटरफेस के लिए न्यू-नॉर्मल होने की उम्मीद है। तकनीक को मनोदशा के साथ मिलाना शासन की शैली की बेहतरी का वादा करता है।

(लेखक- सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी और साइंस एंड टेक्नोलॉजी हैं और ओडिशा के मुख्यमंत्री के ओएसडी हैं। उनसे mishramanoj@yahoo.com के जरिए संपर्क किया जा सकता है )

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English summary
Mo Sarkar scheme in Odisha is realizing the real potential of Digital Governance on the ground
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