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Maharashtra Politics: राजनीतिक दावपेंच में महाराष्ट्र का जवाब नहीं

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से कुछ पक रहा है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को शनिवार को एक कार्यक्रम में पुणे जाना था, लेकिन वह अचानक अपने घर सतारा चले गए। पुणे में अजीत पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री अस्वस्थ हैं, इसलिए वह आराम करने सतारा चले गए। लेकिन वह कितने अस्वस्थ हैं, क्या बहुत ज्यादा अस्वस्थ हैं, या राजनीति में कुछ बड़ा पक रहा है।

शिंदे शिवसेना के ही एक विधायक संजय शिरसाट ने शनिवार को ही कहा कि 15 अगस्त के बाद एकनाथ शिंदे को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करवाया जाएगा। शनिवार 12 अगस्त को ही शरद पवार और अजित पवार की पुणे में एक कारोबारी के घर पर हुई मुलाक़ात की भी चर्चा है। इस मुलाक़ात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल है।

Maharashtra Politics

आखिर अजीत पवार बार बार शरद पवार से मुलाकातें क्यों कर रहे हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी को इन मुलाकातों पर आश्चर्य नहीं होता। कहने को तो कहा जा रहा है कि अजीत पवार की कोशिश शरद पवार को अपने साथ लाने की है। वह चाहते हैं कि एनसीपी एकजुट हो कर रहे, लेकिन शरद पवार मान नहीं रहे, उन्होंने इस बार भी अजीत पवार को दो-टूक जवाब दिया है कि वह भाजपा के साथ कभी नहीं जाएंगे।

पहली बात तो यह है कि अगर भाजपा शरद पवार को अपने साथ लाना चाहती, तो यह बात प्रधानमंत्री के स्तर से होती, अजीत पवार के स्तर पर नहीं। नरेंद्र मोदी अपने स्तर पर शरद पवार को भाजपा के साथ लाने की कई बार कोशिश कर चुके हैं। इन कोशिशों के बार बार विफल होने के बाद ही भाजपा ने अजीत पवार को तोड़ा।

Ajay Setia

2016 में जब राजनीति में शरद पवार के 50 साल पूरे होने का पुणे में जश्न मनाया गया तो पवार को सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री दवेंद्र फड़नवीस दोनों मौजूद थे। पवार और मोदी दोनों ने एक दूसरे की तारीफ़ की, मोदी ने यहां तक कहा कि राजनीति के शुरुआती दिनों में पवार ने उनका साथ दिया था।

तब शरद पवार ने उनकी तारीफ़ करते हुए कहा था कि वह मोदी के काम करने के तरीके से आश्चर्यचकित हो जाते हैं, कल वह जापान में थे और सुबह वह गोवा गये, दोपहर में बेलगाम आये और अब वह वीएसआई पूना में हैं। मुझे नहीं पता कि वह रात में कहां जा रहे हैं। पवार ने कहा यह देश के हित के प्रति उनकी पूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके कुछ महीने बाद ही मोदी सरकार ने जनवरी 2017 में शरद पवार को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

2021 में एक बार फिर पुणे में ही शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करते हुए खुलासा किया था कि 2004 में जब वह मनमोहन सिंह सरकार में कृषि मंत्री थे, तो उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक आधार पर बदले की कार्रवाई का विरोध किया था। उन्होंने खुलासा किया कि जब केन्द्रीय जांच एजेंसियां नरेंद्र मोदी के खिलाफ हाथ धोकर पड़ी थीं, तब वह यूपीए की बैठकों में सभी को समझाते थे कि भले ही नरेंद्र मोदी के साथ कितने ही राजनीतिक मतभेद हों, यह नहीं भूलना चाहिए कि वह निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं।

मोदी की तारीफ़ करते हुए शरद पवार ने कहा था कि वह जो काम अपने हाथ में लेते हैं, उसे कभी बीच में नहीं छोड़ते, काम पूरा करके ही छोड़ते हैं। और यह बात उन्होंने तब कही थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कृषि कानूनों के कारण पूरे देश में विरोध हो रहा था। शरद पवार कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ बाकी राजनीतिक दलों की तरह मुखर नहीं थे। विपक्ष की बेंगलुरु बैठक के बाद इसी महीने 2 अगस्त को भी शरद पवार ने इंडिया गठबंधन की नाराजगी के बावजूद पुणे में उस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जिसमें नरेंद्र मोदी को तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अब यह बात किसी के पल्ले नहीं पड़ रही कि अजीत पवार की मुलाकातें शरद पवार को भाजपा के साथ लाने की कोशिशों का हिस्सा है। कुछ दिन पहले जब अजीत पवार और अन्य मंत्री अचानक शरद पवार से मिलने पहुंच गए थे, तो सुप्रिया सुले को समझ नहीं आया था कि यह क्या हो रहा है। उन्हें डर था कि अजीत पवार दबाव डाल कर शरद पवार से कुछ गलत न करवा लें, इसलिए उन्होंने फोन करके महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल को बुला लिया था। लेकिन शनिवार 12 अगस्त को पुणे में हुई गोपनीय बैठक में जयंत पाटिल भी मौजूद थे।

इस मीटिंग की खास बात यह रही कि अजित पवार सरकारी काफिला छोड़कर पहुचे थे, तो जयंत पाटिल कार्यकर्ता की गाड़ी में पहुंचे थे। यह बैठक पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र के एक बंगले में एक घंटे से ज्यादा चली। बैठक को गुप्त रखा गया था, लेकिन एक क्षेत्रीय समाचार चैनल को भनक लग गई तो उसने शरद पवार को दोपहर करीब एक बजे कोरेगांव पार्क क्षेत्र में कारोबारी के आवास पर पहुंचते दिखाया। शाम करीब पांच बजे शरद पवार चले गए, उसके लगभग दो घंटे के बाद अजित पवार को शाम पौने सात बजे कैमरे से बचने की कोशिश करते हुए कार में परिसर से बाहर निकलते देखा गया।

राजनीतिक अटकल यह लगाई जा रही है कि शरद पवार गुट के जयंत पाटिल किसी न किसी तरह एनसीपी को एकजुट करने की कोशिशों का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन राजनीतिक समीक्षक अजीत पवार का एनसीपी मीटिंग में दिया गया वह भाषण याद दिलाते हैं कि बाकी राज्यों के क्षेत्रीय दलों तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति और मेघालय की एनपीपी की तरह एनसीपी इतनी ताकतवर क्यों नहीं बन सकी कि उसका महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री हो।

अजीत पवार महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। यह तब तक संभव नहीं है, जब तक शरद पवार उनके साथ खड़े नहीं हों। लेकिन सवाल है कि क्या वह भाजपा के कंधों पर सवार होकर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, या उद्धव ठाकरे की तरह, जो भी उन्हें मुख्यमंत्री बना दे, वह उसके साथ चले जाएंगे। जयंत पाटिल का उद्धव ठाकरे से भी संपर्क बना हुआ है।

हाल ही के दिनों तक खुद को शरद पवार के निकटतम बताने वाले और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनवाने के रणनीतिकार शिवसेना के सांसद संजय राउत की टिप्पणी कुछ आश्चर्यचकित करने वाली है। अजीत पवार को गद्दार कहने वाले संजय राउत ने कहा है कि अगर नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ मिल सकते हैं, तो शरद पवार और अजीत पवार क्यों नही मिल सकते?

इधर दो दिन पहले कल्याण में शिवसेना के दोनों गुट एक कार्यक्रम में मौजूद थे, जिसने शिवसेना में ही कुछ खिचड़ी पकने के संकेत दिए। कहीं शिवसेना के विधायक शिंदे को अलग थलग तो नहीं कर रहे। संजय शिरसाट का बयान आश्चर्यचकित करने वाला है कि 15 अगस्त के बाद शिंदे को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करवाया जायेगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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