निकिता से लेकर अंकिता तक लव जिहाद का एक जैसा पैटर्न क्यों?
समाज में जब एक ही पैटर्न पर कोई घटना बार बार घटित होती है तब किसी व्यक्ति विशेष का अपराध मानकर उसकी अनदेखी नहीं कर सकते। उन घटनाओं के जरिए हमें समाज के भीतर चल रही गतिविधियों को जांचने की जरूरत पड़ती है। आखिर क्या कारण है कि अंतर्धार्मिक प्रेम संबंधों में हरियाणा से लेकर झारखंड तक एक ही पैटर्न दिखाई देता है।

दो साल पहले 26 अक्टूबर 2020 को हरियाणा के फरीदाबाद में तौसीफ नाम के एक मुस्लिम नौजवान ने सरेआम चाकू से हमला करके निकिता तोमर को इसलिए मार दिया था क्योंकि निकिता उसका इकतरफा प्रेम प्रसंग स्वीकार करने को तैयार नहीं थी। तौसीफ को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उसने निकिता की हत्या ही कर दी।
अब लगभग उसी पैटर्न पर झारखंड के दुमका में शाहरुख नामक युवक ने एक 19 वर्षीय लड़की अंकिता सिंह की हत्या कर दी है। अंकिता मोहल्ले में ही रहनेवाले शाहरुख के इकतरफा प्यार को स्वीकार नहीं कर रही थी। 23 अगस्त की रात को शाहरुख अंकिता के घर पहुंचता है और जिस कमरे में अंकिता सो रही थी, उसमें खिड़की से पेट्रोल छिड़क कर आग लगा देता है। अंकिता बुरी तरह झुलस जाती है और उसे रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। लेकिन चार दिन जिंदगी की जंग लड़नेवाली आखिरकार 27 अगस्त को इस संसार से विदा हो जाती है। शाहरुख का इकतरफा प्यार उसके जीवन का काल बन जाता है।
23 अगस्त को ही दुमका के पीजेएमसीएच अस्पताल में मजिस्ट्रेट को दिये अपने बयान में अंकिता ने बताया कि शाहरुख ने उसकी किसी सहेली से उसका नंबर ले लिया था। वह बार बार फोन करके उससे अपने प्यार का इजहार कर रहा था। अंकिता ने अपने बयान में यह भी बताया है कि शाहरुख उसे धमकी भी दे रहा था कि अगर उसने मना किया तो वह उसकी हत्या कर देगा। शाहरुख ने सिर्फ धमकी ही नहीं दी बल्कि अंकिता के मना करने के बाद 22-23 अगस्त की रात में उसके घर जाकर जिंदा जलाकर उसकी हत्या भी कर दी।
ऐसी ही एक घटना दो साल पहले 17 जून 2020 को दिल्ली से सटे गाजियाबाद में घटित हुई थी। यहां भी एक बदनाम बस्ती में रहनेवाला शाहरुख एक सिक्ख लड़की नैना कौर से इकतरफा प्यार करने लगता है। वह नैना के घर भी आता जाता है और नैना के घर वाले बिना किसी भेदभाव के अपने यहां आने जाने देते हैं। परिवार को शायद नहीं पता कि वो उनके घर के कामों में इतनी मदद क्यों कर रहा है लेकिन शाहरुख खान जानता था।
घर में आने जाने के बहाने शाहरुख लगातार नैना पर शादी का दबाव भी बनाने लगा लेकिन नैना उससे प्यार और शादी के लिए हां नहीं करती। नैना पढी लिखी थी जबकि शाहरुख आवारा और बदमाश। परिवार वालों को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने शाहरुख से पीछा छुड़ाने के लिए आनन फानन में इंदौर में एक सिक्ख लड़के से नैना का विवाह तय कर दिया। ये बात जैसे ही शाहरुख को पता चली उसने विवाह से पांच दिन पहले भरे बाजार में नैना पर चाकू से हमला करके उसकी हत्या कर दी।
लव जिहाद की अनगिन घटनाओं और वीभत्स कहानियों में बीते दो साल में ये तीन कहानियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन तीनों में ही किसी शाहरुख या तौसीफ ने अपने इकतरफा प्यार के कारण लड़की की हत्या कर दी। फरीदाबाद में निकिता तोमर का हत्यारा तौसीफ अच्छे खासे परिवार से संबंध रखता है। निकिता पर उसने ही नहीं बल्कि उसकी मां ने भी दबाव बनाया था कि वह तौसीफ से निकाह कर ले। निकिता संभवत: इसलिए तैयार नहीं हो रही थी कि तौसीफ और उसकी मां दोनों उस पर धर्म बदलने का दबाव भी डाल रहे थे।
नैना कौर का हत्यारा शाहरुख जिसकी अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक हैसियत नैना कौर के आसपास नहीं ठहरती थी, वह भी नैना से निकाह करना चाहता था। अब कुछ ऐसा ही मामला दुमका के शाहरुख का है जिसने अंकिता को जलाकर मार दिया है। दुमका का शाहरुख भी एक मजदूर है और उसने भी न केवल अंकिता को हां करने का दबाव बनाया बल्कि धमकी भी दी कि अगर अंकिता ने उसे ना किया तो वह उसे जान से मार देगा। परिवारवालों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने शाहरुख से बात करने और समझाने की बात कही थी लेकिन शाहरुख ने किसी को बात करने का अवसर ही नहीं दिया और जो करना था, कर दिया।
सबसे चौंकानेवाली बात ये है कि झारखंड पुलिस ने जब शाहरुख को गिरफ्तार किया तो हत्या जैसा जघन्य अपराध करने के बाद भी उसके चेहरे पर इसका कोई पछतावा नहीं दिखा। पुलिस हिरासत में भी वह हंसता मुस्कुराता नजर आया। स्वाभाविक है उसने जो किया उसका उसे कोई पछतावा नहीं है। किसी की हत्या से ज्यादा जघन्य अपराध दूसरा हो नहीं सकता लेकिन ऐसा जघन्य अपराध करने के बाद भी अगर शाहरुख मुस्कुरा रहा है तो निश्चित रूप से उस समुदाय को समझने की जरूरत है जिस समुदाय में शाहरुख जैसे लोगों की परवरिश होती है।
शाहरुख जिस समुदाय विशेष से आता है वह मर्दवादी समुदाय है। मुस्लिम समुदाय की संरचना कुछ ऐसी है कि महिलाओं को सम्मानजनक दृष्टिकोण से देखना उनके स्वभाव में नहीं होता। इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार मुस्लिम समुदाय में शादी की कोई वैसी नैतिक और सामाजिक व्यवस्था नहीं है जैसा कि देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं में है। वहां परिवार में ही चाचा ताऊ की लड़की से शादी करना इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार जायज होता है। स्वाभाविक है ऐसे समुदाय में जहां संबंधों में ऐसी गिरावट हो वहां नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था की बात सोचना ही बेमतलब होता है।
इसके अलावा इस्लाम में निकाह भी मेहर या उजरत देकर औरत खरीदने वाली ही व्यवस्था है। तीन तलाक, मुताह निकाह और हलाला जैसे इस्लामिक सिद्धांतों के कारण मुस्लिम समुदाय में स्त्रियों की कोई खास हैसियत बचती नहीं है। इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार औरतें आधे दिमाग की होती हैं। मुस्लिम महिलाओं से बलात्कार या जिना जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में भी इस्लाम के मुताबिक मुस्लिम महिला के बयान का कोई महत्व नहीं होता।
स्वाभाविक है ऐसे सामुदायिक परिवेश में पलने बढनेवाला व्यक्ति महिलाओं का सम्मान भला कैसे कर सकेगा? उसकी अपनी सोच समझ इस मामले में बहुत हद तक साफ होती है कि महिलाओं को अपने बारे में निर्णय लेने का कोई अधिकार ही नहीं है। इस्लाम के आदर्श राज्य सऊदी अरब में अब जाकर महरम वाली व्यवस्था को खत्म किया है वरना साल दो साल पहले तक वहां लड़कियां और महिलाएं अकेले घर से बाहर भी नहीं निकल सकती थीं। उन्हें अपने साथ परिवार का कोई मर्द रखना होता था जिसे महरम कहा जाता है। इन अमानवीय इस्लामिक सिद्धांतों का गैर मुस्लिम महिलाएं तो कभी कभार शिकार होती हैं लेकिन मुस्लिम महिलाएं तो रोजमर्रा की जिन्दगी में इसका शिकार होती हैं।
निश्चित रूप से निकिता, नैना या अंकिता की दिल दहला देनेवाली हत्याओं के पीछे एक असभ्य और क्रूर मानसिकता काम कर रही होती है जो महिलाओं के अस्तित्व तक को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। ऐसे में इन असभ्य लोगों की नजर जब किसी गैर मुस्लिम लड़की पर पड़ती है तो वह ठीक उसी तरह उनके साथ व्यवहार करते हैं जैसी उनकी सामुदायिक परवरिश हुई है। लेकिन इन असभ्य और क्रूर लोगों के कर्मों की गंभीर कीमत वह गैर मुस्लिम लड़की और उसका परिवार चुकाता है जिस पर इनकी नजर गड़ जाती है। निश्चित रूप से यह लॉ एण्ड आर्डर की ही समस्या नहीं है, बल्कि कहीं अधिक गंभीर एक सामुदायिक समस्या है जिसका समाधान सामाजिक स्तर पर जनजागरण और सतर्कता से ही निकल सकता है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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