Lok Sabha Elections: मोदी की गारंटी पर सवार भाजपा क्या जाएगी चार सौ के पार?
Lok Sabha Elections: साल के आरंभ में हिमाचल प्रदेश औऱ कर्नाटक विधानसभा चुनावों में मिली पराजय से मंद पड़ा "मोदी है, तो मुमकिन है" का नारा साल के आखिर में "मोदी गारंटी" के नाम से चमक पड़ा है। सियासी मायनों में बीत रहा साल जबरदस्त सफलताओं के साथ भारत और केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी दोनों के लिए अमृत काल साबित हुआ है। साल के अंत में तीन राज्यों में भाजपा को बंपर जीत मिली है। जीत अप्रत्याशित है। भाजपा के हौसले बुलंद हैं। इस आधार पर आगामी लोकसभा चुनाव में चार सौ प्लस पाने के मंसूबे बांधे जा रहे हैं। साथ ही मई में लोकसभा चुनाव के साथ ज्यादा से ज्यादा राज्यों में विधानसभा चुनाव करा लेने की तैयारी है।
अगला साल राजनीतिक चुनौतियों और उत्साह से भरा है। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राममंदिर के उद्घाटन की तैयारी है। फिर मई में अठारहवीं लोकसभा का चुनाव है। केंद्रीय चुनाव आयोग के कैलेंडर में लोकसभा चुनाव के अलावा अगले साल अलग-अलग समय पर आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव सपन्न कराने हैं। आयोग के पास एक देश, एक चुनाव का उत्साही प्रपोजल विचार के लिए पड़ा है। ऐसे में मुमकिन है कि राजनीतिक दलों में आम सहमति बनाने का उपक्रम चल पड़े और ज्यादातर राज्यों की विधानसभा का चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही करा लिया जाए।

चुनाव के लिहाज से अगले साल राजनीतिक दलों को जटिल अग्निपरीक्षा से गुजरना है। साल 2023 की जबरदस्त सफलताओं से उत्साहित केंद्र में सत्तारुढ़ भाजपा अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को जीत की गारंटी वाली मान रही है। अब न सिर्फ लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने की गारंटी दी जा रही है बल्कि दावा किया जा रहा है कि अगली बार भाजपा चार सौ के पार। यानी 540 सदस्यों वाली अगली लोकसभा में विपक्ष को हाशिए पर धकेलने में सफल हो रही भाजपा अपने बूते चार सौ से ज्यादा सांसदों को जीता लाने की तैयारी में है।
2019 में हुए बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को सहयोगी दलों के साथ 353 सीटों पर भारी जीत मिली थी। यह अभेद्य रिकार्ड माना गया था। खुद भाजपा के तीन सौ तीन सांसद जीते थे। अब जब मोदी की गारंटी का सिक्का चमक उठा है, तो लक्ष्य ऊंचा उठाया जा रहा है। अपने ही रिकार्ड को ध्वस्त कर राजनीति में असंभव लगने वाले लक्ष्य को साधने की तैयारी है। राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है। लिहाजा साल के प्रथम और मध्य प्रहर में भाजपा को हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनावों की करारी हार से जो झटका लगा था, वह साल बीतने से पहले तीन बड़े राज्यों में भाजपा को मिली बपंर जीत के जश्न में धुल गया है।
बीत रहे साल में सिर्फ देश की राजनीति में ही नहीं आर्थिक मोर्चे और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की साख मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी औऱ केंद्र की सरकार के मान सम्मान और यश में जबरदस्त बढोत्तरी हुई है। दुनिया की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के हिचकोलों से गुजर रही है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर ठीक ठाक प्रदर्शन से भारत का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा है। जहां जलवायु परिवर्तन के खतरों और कई मोर्चों पर जारी युद्धों की वजह से दुनिया के अन्न उत्पादन में भारी कमी आने की अटकलें हैं, गरीबी बढ़ने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, वहीं भारत ने आगे वेलफेयर स्टेट बने रहने की चादर को और मजबूती से ओढे रखने का फैसला लिया है।
गरीबोन्मुखी होने की राह तय करते हुए केंद्र सरकार ने अस्सी करोड़ से ज्यादा भारतीयों के लिए मुफ्त अनाज बांटने की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) को अगले पांच साल तक बढ़ाने का ऐलान किया है। यह योजना कोविड -19 महामारी के दौरान अप्रैल 2020 में लांच की गई। बीते साल दिसंबर में इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नियम का विलय कर दिया गया। अब इसके तहत 81.35 करोड़ लाभार्थियों को अगले पांच साल तक मुफ्त अनाज दिया जाएगा। इस मद में अगले पांच साल में लगभग 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च आएंगे।
जब देश पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के इंतजार में वक्त गुजार रहा था तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आखिरी महीने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन कॉप-28 में शिरकत के लिए दुबई जाकर की। संयुक्त अरब अमीरात शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों के तय संबोधन के अलावा ऊर्जा से भरे प्रधानमंत्री ने चौबीस घंटों के बीच किसी तीसरे देश में जाकर दुनिया के सात राष्ट्राध्यक्षों के साथ कूटनीतिक संबंधों की बुलंदी के लिए वन टू वन बैठकें कर नया कीर्तिमान गढ़ने का काम किया। इसे बीते साल दिल्ली में जी 20 सम्मेलन की सफलता का विस्तार बताया जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी की गारंटी का सिक्का जमता नजर आ रहा है।
इजराइल- फिलीस्तीन युद्ध में जनसंहार रोकने के प्रयास में इजराइल के खिलाफ राय जताने वाले नैतिक बल के प्रदर्शन का मौका हो या रुस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन पर युद्ध के बजाए यूक्रेन से बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालने की सलाह देने की बात, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक राय जताकर बता दिया है कि भारत विश्व मंच पर किसी लाभार्थी गुट में फंसे रहने के बजाय मानवीय पक्ष में बेलाग राय रखने वाला मुल्क बना रहेगा।
मानवीय दृष्टिकोण की प्रधानता से युद्ध प्रमाद के झंझावातों में फंसी दुनिया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशिष्ट पहचान बन रही है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बढ़ती चिंता के बीच अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीन की गिरती साख, पेट्रो डॉलर की डगमग हालात, इसराइल-फिलिस्तीन व रुस-यूक्रेन युद्ध आदि को लेकर बनते बिगड़ते विश्व ऑडर्र में भारत के उन्नत भविष्य के लिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर भी ग्रेट ब्रिटेन को भारत काफी पहले ही पीछे छोड़ चुका है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने प्रसार भारती के एक कार्यक्रम में भारत के कुशल नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ में कहा है कि आजादी के सौंवे साल यानी 2047 या उससे पहले तक भारत विश्व की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनने जा रही हैं। नवंबर 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था कुलांचे भर रहा है। त्यौहारी महीने के जारी आंकड़ों के मुताबिक 17.4 ट्रिलयन रुपए का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन हुआ है। यह महीने भर में यूपीआई से पेमेंट होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी धनराशि है।
जीएसटी कलेक्शन 1.68 लाख करोड़ रुपए हुआ है। मैनुफैक्चरिंग पीएमआई 56 प्रतिशत रहा है। यह विनिर्माण क्षेत्र में व्यापक विस्तार को इंगित करता है तो इस महीने बिजली की खपत 119.64 बिलियन यूनिट्स आंकी गई है। घरेलू उड़ान भरने वाले विमान यात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड उछाल आया। यह एक करोड़ 27 लाख 16 हजार की संख्या तक पहुंच गया है।
मतलब मोदी न केवल राजनीतिक वादे कर रहे हैं बल्कि आर्थिक, कूटनीतिक स्तर पर उसे पूरा भी कर रहे हैं। इसलिए भाजपा ने नया नारा गढ़ा है मोदी की गारंटी। इस गारंटी पर देश की जनता अगर भरोसा कर रही है तो बड़ी से बड़ी जीत का लक्ष्य निर्धारित करने में समस्या क्या है?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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