आचार संहिता उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर केवल सलाह क्यों?

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। एक्शन के बदले क्यों दी सिर्फ सलाह? चुनाव आयोग ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष को क्यों बख्शा? राहुल गांधी के 'न्याय’ की आलोचना कर अगर राजीव कुमार ने चुनाव आचार संहिता तोड़ी है तो उन्हें सिर्फ 'समझाइश’ क्यों? सज़ा क्यों नहीं? चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ और राजीव कुमार को अलग-अलग मामलों में आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी तो पाया है, मगर कोई एक्शन नहीं लिया। उन्हें बख्श दिया सिर्फ भविष्य में ऐसा नहीं करने की उम्मीद जताकर। ऐसा क्यों? क्या इन दोनों को सत्ताधारी दल के पक्ष में होने का फायदा मिला है? यह सवाल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर हमेशा के लिए चस्पां हो चुके हैं।

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भारतीय सेना के पराक्रम को 'मोदी की सेना’ का पराक्रम बताने पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नोटिस जारी किया, योगी ने जवाब दिया, चुनाव आयोग जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। पर, आखिर में हुआ क्या? चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ को सलाह दी है कि वे आगे से ऐसा नहीं करें।

निर्देश टूटा तो सलाह दी, सलाह नहीं माने तो क्या हो?

चुनाव आयोग ने 19 मार्च 2019 को सभी पार्टियों के लिए यह निर्देश जारी कर दिया था कि राजनीतिक प्रचार में सैन्य बलों के बारे में कोई संदर्भ ना दें। इसके बावजूद निर्देश का उल्लंघन हुआ। खुद चुनाव आयोग ने कहा है, 'चूकि श्री योगी वरिष्ठ नेता हैं, अतएव उन्हें अपने राजनीतिक संबोधनों में अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी।' निर्देश के उल्लंघन पर सलाह। सलाह के उल्लंघन पर क्या? चुनाव आयोग जिस तरीके से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों से निबट रहा है, उससे आने वाले समय में गम्भीर स्थितियां पैदा होने वाली हैं। सवाल ये है कि अगर कोई अन्य मामला ऐसा ही आता है यानी फिर से कोई 'मोदी की सेना’ की तुलना भारतीय सेना से करता है तब आयोग का रुख क्या होगा? उदाहरण के लिए बीजेपी के ही नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने भी लगभग वही बातें कही हैं। तो क्या उनके लिए भी आयोग नोटिस की औपचारिकता पूरी करने और उनका पक्ष सुन लेने के बाद असंतुष्ट होने पर भी सलाह ही जारी करेगा? अगर हां, तो ऐसी प्रक्रियाओं से वास्तविक मकसद क्या पूरा होता है?

अब दूसरों पर भी '**सलाह वाली सज़ा’** होगी लागू?

सवाल यह भी है कि जो सज़ा के बदले सलाह देने का जो मानदंड योगी आदित्यनाथ के लिए चुनाव आयोग ने दिखाया है क्या यही मानदंड बीजेपी के अलावा दूसरी पार्टियों के नेताओं के लिए भी होगा? अगर हां, तो चुनाव आयोग के निर्देश की अवहेलना घटेगी क्यों? यह तो और बढ़ेगी। बीते दिनों नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने राहुल गांधी के 'न्याय’ घोषणा पर सवाल उठाए थे। शीर्ष अधिकारी की ओर से राजनीतिक घोषणा पर टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया। नोटिस जारी किए। जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। आखिरकार चुनाव आयोग का फैसला आया। ठीक उसी तर्ज पर जैसा कि योगी आदित्यनाथ के मामले में आया। चुनाव आयोग ने कहा, “आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि आपके (राजीव कुमार) बयानों से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। इसके मद्देनजर आयोग इस पर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए अपेक्षा करता है कि भविष्य में आप इस बारे में सतर्कता बरतेंगे।”

सरकारी अफसरों में राजनीतिक बयानों की मच सकती है होड़

सवाल ये है कि अब क्या अगले चुनाव में सतर्कता की अपेक्षा रखेगा चुनाव आयोग? नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बीजेपी सरकार के प्रति अपनी निष्ठा को मजबूती से व्यक्त कर दिया। कीमत सिर्फ इस रूप में चुकानी पड़ी कि चुनाव आयोग ने उन्हें आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया और बदले में उनसे भविष्य में सतर्क रहने की उम्मीद जतायी। जाहिर है भविष्य में दूसरे अधिकारी भी ऐसा ही व्यवहार करेंगे, तो क्या वे उनके साथ अलग किस्म का सलूक करेंगे? क्या चुनाव आयोग का यह व्यवहार सत्ताधारी दल की चापलूसी करने के लिए सरकारी अधिकारियों को प्रेरित नहीं करता? क्या इसे विपक्षी दल के विरुद्ध 'कुछ भी बोलने’ के लिए प्रोत्साहन नहीं माना जाना चाहिए?

चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दो मामले साफ तौर पर सामने आ चुके हैं। एक में मुख्यमंत्री हैं तो दूसरे में योजना आयोग के उपाध्यक्ष। दोनों पर सलाह के इतर किसी एक्शन की जरूरत थी। तभी यह दूसरे नेताओं के लिए सबक की तरह होता। इसके बिना दंड की मर्यादा टूटी है।

जब सज़ा होगी,तभी अपराध रुकने की उम्मीद की सकती है। आने वाले समय में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का हर आरोपी यही उम्मीद करेगा कि उसे भी दोषी पाए जाने के बावजूद सज़ा से दूर रखा जाए। क्या ऐसा करना उचित रहेगा? और, अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो क्या चुनाव आयोग भेदभाव करता नहीं दिखेगा?

(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं.)

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