मोदी जीते तो विपक्ष नकारेगा जनमत?
Chunav Parinaam: एग्जिट पोल जिस किसी के भी खिलाफ जाता है, वह उसे नहीं मानता| हारने वाले को चुनाव नतीजों तक मानना भी नहीं चाहिए| भले ही 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में एग्जिट पोलों ने अपनी साख बनाई है| लेकिन 2004 का उदाहरण भी हमारे सामने है, जब लगभग सारे एग्जिट पोल तीसरी बार भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे थे, लेकिन भाजपा की सीटें 182 से घट कर 138 रह गई थी|
इस बार 16-17 एग्जिट पोलों में से सिर्फ एक एग्जिट पोल ने त्रिशंकु सदन की भविष्यवाणी करते हुए इंडी एलायंस को एनडीए से थोड़ा आगे बताया है| जिस तरह 2004 में भाजपा से कांग्रेस की सात सीटें ज्यादा हो गई थी, उसी तरह इस एक एग्जिट पोल में इंडी एलायंस की सीटें एनडीए से 22 ज्यादा बताई गई है|

हारते हुए राजनीतिक दल या गठबंधन की ओर से एग्जिट पोल को नकारना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह पहला मौक़ा है कि कांग्रेस ने बहुत ही आक्रामक ढंग से एग्जिट पोल को न सिर्फ नकारा है, बल्कि उनके सामने अपने एग्जिट पोल को चुनौती की तरह पेश किया है| एग्जिट पोल से दो दिन बाद और नतीजों से एक दिन पहले 3 जून को कांग्रेस ने एक ऐसी प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें सभी प्रदेशों के कांग्रेस नेताओं को अपने अपने आंकड़ों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दिल्ली के मीडिया के सामने पेश किया गया| सभी ने अपना अपना आकलन मीडिया के सामने पेश किया|
कांग्रेस के तीन राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने न्यूज चेनलों की ओर से प्राईवेट कंपनियों से करवाए गए एग्जिट पोलों को चुनौती देते हुए कहा कि इन सभी का हाल 2004 जैसा होगा, जब सभी कह रहे थे कि एनडीए प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने जा रहा है, जबकि नतीजे एनडीए विरोधी दलों के पक्ष में आए थे, और यूपीए सरकार बनी थी|

कांग्रेस ने चुनाव नतीजों से पहले "आऊट गोईंग" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अगली सरकार के पहले 100 दिनों के कार्यक्रम तय करने के लिए अधिकारियों की बैठक बुलाने पर कड़ा एतराज जताया है| कांग्रेस को आशंका है कि कहीं ईवीएम मशीनों का खेल तो नहीं हो गया है| मोदी समर्थक मोदी का आत्मविश्वास देख कर खुश हैं, लेकिन मोदी ने चुनाव नतीजों का इन्तजार नहीं करके, अधिकारियों की बैठक बुला कर विपक्ष को सवाल खड़ा करने का मौक़ा दे दिया है|
नतीजे एग्जिट पोल के मुताबिक़ ही आते हैं तो ईवीएम पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष को मुद्दा मिल गया है| विपक्ष एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक़ आए नतीजों को नहीं मानेगा और देश में लोकतंत्र बचाओ नाम से आन्दोलन की शुरुआत हो सकती है, जिसकी नींव चुनावों के दौरान ही रख दी गई थी| कांग्रेस सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है, इसीलिए उसने सब एग्जिट पोलों को नकारते हुए इंडी एलायंस को 295 सीटें मिलने की बात कही है|
इंडी एलायंस के घटक दलों को मिलने वाली सीटों को जितना भी बढा कर जोड़ लें, कांग्रेस को 125 सीटें मिलें, तभी इंडी एलायंस का आंकडा 295 हो सकता है| तो क्या कांग्रेस को 125 सीटें मिल रही हैं ? इस सवाल का कांग्रेस के किसी प्रवक्ता ने जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि पहली जून को हुई बैठक में सभी दलों से उनका फीडबैक लेने के बाद 295 का आंकड़ा उभर कर सामने आया है, कांग्रेस कोई हवा में तीर नहीं मार रही| तो इसका मतलब क्या है, क्या यही मतलब है कि 295 के आंकड़े में कांग्रेस ने अपनी 125 सीटें जोड़ी हैं|
पहली जून की इंडी एलायंस की बैठक में ममता बनर्जी नहीं आई थीं, उन्होंने पार्टी की तरफ से किसी अन्य को भी नहीं भेजा था| लेकिन बैठक के दौरान ममता बनर्जी से फोन पर बात करके तृणमूल कांग्रेस की संभावित सीटें पूछी गई थीं, जिन्हें 295 में जोड़ा गया है| एग्जिट पोल से कांग्रेस जितना ही ममता बनर्जी भी असहमत हैं|
वह 2021 में विधानसभा चुनावों के समय हुए एग्जिट पोलों का उदाहरण देती हैं, जब लगभग सभी दस एग्जिट पोलों ने भाजपा को 109 से लेकर 185 तक सीटों की भविष्यवाणी की थी, लेकिन कोई भी भविष्यवाणी सही साबित नहीं हुई, क्योंकि भाजपा एग्जिट पोलों की भविष्यवाणी से आधे 77 पर निपट गई थी| एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के एग्जिट पोल ने तो तृणमूल कांग्रेस को अधिकतम 88 सीटों पर निपटा दिया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस की सीटें 2016 की 211 सीटों से से भी चार ज्यादा 215 सीटें आई थी|
ममता बनर्जी सभी एग्जिट पोलों को नकारते हुए यह मानने को तैयार नहीं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सीटें तृणमूल कांग्रेस से ज्यादा आ सकती हैं| बंगाल में इंडी एलायंस के तीनों बड़े घटक दलों तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वामपंथी मोर्चे में सीट शेयरिंग नहीं हुआ था| ममता बनर्जी ने इंडी एलायंस को 24 सीटें जीतने का आंकड़ा भेजा है, पिछली बार भी तृणमूल कांग्रेस को 22 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं थीं|
हालांकि सोनिया गांधी ने बहुत ही सुलझी हुई प्रतिक्रिया जाहिर की है कि नतीजों में सब पता चल जाएगा, राहुल गांधी ने एग्जिट पोलों को मोदी के एग्जिट पोल कहा, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने संभवत पहली बार एग्जिट पोलों को चुनौती देते हुए अपने आंकड़े मीडिया के सामने रखे हैं| जिनमें कांग्रेस की अपनी सवा सौ सीटों का दावा है| कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्षों से जो फीडबैक हासिल किया है, उसमें बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के एग्जिट पोलों को खासकर चुनौती दी गई है|
यही तीन राज्य हैं जहां इंडी एलायंस का एनडीए से सबसे ज्यादा कड़ा मुकाबला हुआ है| कांग्रेस ने बिहार में गठबंधन को 40 में से 22 से 24 सीटें तक जीतने का दावा किया है, जिसमें से सात कांग्रेस की, 12 -13 राजद और वामपंथियों को 3-4 सीटें शामिल हैं| महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने गठबंधन को 48 में 40 सीटें जीतने का फीडबैक दिया है, जिसमें से 24 अपनी खुद की यानी कांग्रेस की बताई है|
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने 28 में से 15 सीटें जीतने का दावा किया है| इसी तरह पंजाब में इंडी एलायंस सारी की सारी 13 सीटें जीतने, राजस्थान में 9, हरियाणा और मध्य प्रदेश में सात-सात, छत्तीसगढ़ में 5 और झारखंड में दस सीटें जीतने का दावा किया है| आश्चर्यजनक आंकड़ा उत्तर प्रदेश का है, जहां कांग्रेस ने अपनी सीटें तो नहीं बताई, लेकिन इंडी एलायंस को 40 सीटें मिलने का दावा है|
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद इंडी एलायंस की मीटिंग में मौजूद थे, इसलिए यह आंकड़ा उन्हीं का दिया हुआ हो सकता है| लेकिन नतीजों से एक दिन पहले अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव ने यह कह कर चुनाव नतीजों के बाद किसी बड़े आन्दोलन की चेतावनी दे दी है कि जनता गांधी जी के सिद्धांत करो या मरो की राह पर चल रही है, और देश के युवा फिर से कह रहे हैं कि मेरा रंग दे बसंती चोला|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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