जब 121 दलबदलू हो गए तो 122वां भी सही
Arvinder Singh Lovely: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इंडी एलायंस पांच साल में पांच प्रधानमंत्री बनाने का एजेंडा लेकर चल रहा है| इससे पहले खिचड़ी सरकार की बातें भी की जा रही थीं| 1989 से 1991 और 1996 से लेकर 2014 तक देश ने खिचड़ी सरकारों का दौर देखा है|
देश में 2014 से शुद्ध भाजपा की भाजपा के एजेंडे वाली सरकार चल रही है, भले ही उसमें एनडीए के घटक दल भी शामिल हैं, लेकिन भाजपा का स्पष्ट बहुमत होने के कारण सरकार में उनकी हैसियत कुछ भी नहीं है| वैसे देखा जाए तो पिछले दस साल से शुद्ध भाजपा की सरकार भी नहीं चल रही, बल्कि भाजपा खुद भी शुद्ध नहीं रही, वह खुद ही खिचड़ी पार्टी बन गई है|

सत्रहवीं लोकसभा में भाजपा के 303 लोकसभा सदस्यों में एक तिहाई अन्य दलों से आए हुए सांसद हैं| देश में क्यों कि मोदी की हवा चल रही थी, बाकी सभी दलों के उम्मीदवार हार रहे थे, इसलिए मौकापरस्त नेता भाजपा में शामिल हो कर टिकट पा गए और सांसद बन गए| जैसे ही उनमें से किसी को लगता है कि वह अपनी मूल पार्टी में लौट कर चुनाव जीत सकता है, वह अपनी मूल पार्टी में लौट जाता है|
2014 से 2019 तक महाराष्ट्र से भाजपा सांसद रहे नाना पटोले अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में लौट गए थे, अब वह महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं| इस बार चौधरी बीरेन्द्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह कांग्रेस में लौट गए| इस बीच 2017 में भाजपा में शामिल हुए अरविन्दर सिंह लवली कांग्रेस में लौटकर 2019 में कांग्रेस टिकट पर ईस्ट दिल्ली सीट से चुनाव लड़े थे। इस बार कांग्रेस ने समझौते में उनकी सीट आम आदमी पार्टी को दे दी, तो उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है| शायद वह एक बार फिर भाजपा में एंट्री मारकर ईस्ट दिल्ली से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं|'

2019 में भाजपा ने पूर्वी दिल्ली से गौतम गंभीर को भाजपा टिकट दिया था, जिन्होंने कांग्रेस के अरविन्दर सिंह लवली और आम आदमी पार्टी की आतिशी मार्लिना को हराया था| अरविन्दर सिंह लवली दूसरे नंबर पर रहे थे, उन्होंने आतिशी मार्लिना से 86 हजार वोट ज्यादा हासिल किए थे| लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने अरविन्द केजरीवाल के सामने घुटने टेकते हुए यह सीट आम आदमी पार्टी को दे दी|
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए अब तक 439 उम्मीदवार घोषित किए हैं, इनमें से 121 बाहरी हैं, जो पहले किसी न किसी दल में रहे हैं| इन 121 में होशियारपुर से केन्द्रीय मंत्री सोमप्रकाश की पत्नी अनीता सोमप्रकाश या बठिंडा से रिटायर्ड आईएएस श्रीमती परमपाल कौर सिधू या मुम्बई से उज्ज्वल निगम जैसे वे उम्मीदवार शामिल नहीं हैं, जो पहले किसी दल में नहीं थे|
उज्ज्वल निगम को भाजपा का टिकट देकर मोदी ने उनकी राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और निष्ठा को सलाम किया है| आतंकवादी कसाब को फांसी की सजा दिलाने में उनकी अहम भूमिका थी| लेकिन उनके इस फैसले को भाजपा काडर शायद ही स्वीकार करेगा कि उन्होंने प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन का टिकट काटकर उज्ज्वल निगम को टिकट दिया है| पूनम महाजन ने युवा मोर्चे के अध्यक्ष के तौर पर तीन साल तक सारे देश में जमीन पर काम किया है|
नरेंद्र मोदी 2014 में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लेकर आए थे, लेकिन वह कांग्रेस को कांग्रेस मुक्त करके भाजपा को कांग्रेस युक्त बना रहे हैं| उनका देश को कांग्रेस मुक्त करने और भाजपा को भाजपा मुक्त करने का अभियान अब तक जारी है। अब तो यह कहा जाने लगा है कि मोदी भाजपा को ही कांग्रेस बना रहे हैं। सत्रहवीं लोकसभा में भाजपा के कम से कम सौ सांसद ऐसे थे, जो या तो सीधे कांग्रेस से आए थे, या कभी न कभी कांग्रेस में रहे थे| इस बार यह संख्या पिछली बार का रिकार्ड तोड़ सकती है|
पंजाब का उदाहरण हमारे सामने है, भाजपा ने जिन नौ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, उनमें से सिर्फ एक गुरदासपुर का उम्मीदवार भाजपा का अपना है| अमृतसर में रिटायर्ड आईएफएस और बठिंडा में रिटायर्ड आईएएस भाजपा ज्वाईन करते ही टिकट पा गए| जालन्धर में आम आदमी पार्टी के सांसद, लुधियाना और पटियाला में कांग्रेस के सांसद भाजपा ज्वाईन करते ही टिकट पा गए|
खंडूर साहिब सीट से भाजपा ने अकाली दल से आए मनजीत सिंह मन्ना को टिकट दिया है, जबकि भाजपा के पूर्व सांसद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना टिकट मांग रहे थे| होशियारपुर में पिछले चुनाव में मोदी ने भाजपा के सांसद और मोदी के पहले कार्यकाल में मंत्री विजय सांपला का टिकट काट कर रिटायर्ड आईएएस सोमप्रकाश को उम्मीदवार बनाया था, जीतने पर उन्हें मंत्री भी बनाया और अब उनका टिकट काट कर उनकी पत्नी को उम्मीदवार बना दिया|
फरीदकोट में दिल्ली के सांसद हंस राज हंस को इस बार उनके गृह जिले फरीदकोट से टिकट दिया गया है, वह भी पिछली बार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे| फिरोजपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित करने के लिए भाजपा जलालाबाद के पूर्व कांग्रेसी विधायक रमिंदर आंवला का पार्टी में आने का इन्तजार कर रही है|
नरेंद्र मोदी की भाजपा ने जिन दलबदलुओं को टिकट दिया है, उनमें 38 कांग्रेस से, 9 भारत राष्ट्र समिति से, 9 बहुजन समाज पार्टी से, सात तृणमूल कांग्रेस से, छह बीजू जनता दल से, सात राष्ट्रवादी कांग्रेस, अन्नाद्रमुक और समाजवादी पार्टी से 6-6, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और निषाद पार्टी से एक-एक नेता टिकट पाए हैं|
जब 121 दलबदलू पहले से टिकट पा गए हैं, तो अरविन्दर सिंह लवली अगर फिर से लौटकर भाजपा में आते हैं, तो उन्हें टिकट देने में क्या हर्ज है| दिल्ली से एक सिख उम्मीदवार भी हो जाएगा| अरविन्दर सिंह लवली ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर दिल्ली में भाजपा का काम ही आसान किया है|
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे और दिल्ली के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित भी लवली के साथ आ कर खड़े हो गए हैं| संदीप दीक्षित पहले दिन से आम आदमी पार्टी का समर्थन करने पर कांग्रेस हाईकमान को चेता रहे थे| लवली और संदीप दीक्षित ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन का विरोध ही नहीं किया, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी से आए कन्हैया कुमार और जातिवादी राजनीति करने वाले उदित राज को टिकट दिए जाने का भी खुला विरोध किया है|
कन्हैया कुमार कांग्रेस के लिए मुसीबत बन कर खड़े हो गए हैं| राहुल गांधी पहले उन्हें बिहार से टिकट देना चाहते थे, लेकिन लालू यादव ने कहा कि वह कन्हैया को बर्दाश्त नहीं करेंगे| इसलिए राहुल ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के विरोध के बावजूद उन्हें दिल्ली से टिकट दे दिया| लेकिन कन्हैया के खिलाफ कांग्रेस में विद्रोह हो गया है, अलबत्ता उदित राज के खिलाफ भी विद्रोह की चिंगारी भड़क उठी है|
ये दोनों न सिर्फ बाहरी हैं, बल्कि कन्हैया कुमार पर भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने का आरोप है, उन पर देशद्रोह का मुकद्दमा भी लंबित है| उदित राज अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए मशहूर हैं, उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मूर्मू पर मोदी की चमचागिरी करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसी राष्ट्रपति किसी देश को न मिले| वह सुप्रीमकोर्ट के खिलाफ भी अक्सर टिप्पणियाँ करते हैं| श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर की प्राणप्रतिष्ठा से पहले उन्होंने कहा कि 500 साल बाद भारत में फिर से मनुवाद की शुरुआत हो रही है|
अरविन्दर सिंह लवली ने मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजी अपनी चार पेज की चिठ्ठी में केजरीवाल सरकार पर भ्रष्ट होने का आरोप लगा कर कांग्रेस को असहज कर दिया है| उनके इस्तीफे की खबर दिल्ली में आग की तरह फ़ैली तो 35 पूर्व कांग्रेसी विधायक उनके समर्थन में उतर आए हैं| कन्हैया कुमार और उदित राज के खिलाफ कांग्रेसी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं|
अरविन्दर सिंह लवली ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे का बड़ा कदम उठा कर दिल्ली के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को आम आदमी पार्टी के चारों उम्मीदवारों के खिलाफ लामबंद कर दिया है| कांग्रेस से ज्यादा आम आदमी पार्टी सकपका गई है| आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर लिखा कि भाजपा पूर्वी दिल्ली से उमीदवार बदल कर अरविन्दर सिंह लवली को टिकट देगी| इस पर लवली ने उन्हें जवाब दिया है कि क्या वह सारे राजनीतिक दलों की टिकटें तय करते हैं|
लवली ने फिलहाल कांग्रेस से इस्तीफा दिया है, बिलकुल वैसे ही जैसे गौरव वल्लभ और रोहन गुप्ता ने पहले कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। फिर कुछ दिन बाद दोनों भाजपा में शामिल हो गए थे| इन दोनों ने राम मन्दिर के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ी थी, रोहन गुप्ता ने तो लोकसभा का टिकट ठुकरा कर कांग्रेस छोड़ी थी|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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