Land Jihad Uttrakhand: हरि के द्वार से पहाड़ पार तक फैलती 'अवैध कब्जे' की हरी चादर
उत्तराखंड में अवैध अतिक्रमण की हरी चादर तेजी से फैल रही है। हरिद्वार से लेकर भीतर पहाड़ तक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि विधानसभा में भी अब लैंड जिहाद का मुद्दा उठ गया है।

Land Jihad Uttrakhand: देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार हरिद्वार से लेकर ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी, नैनीताल, रुड़की, सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के रामपुर, खुशहालपुर, ढाकीरानी, शंकरपुर, जमनपुर, सेलाकुई, देहरादून के विकासनगर, हरबर्टपुर, पछुवादून, लालतप्पड़, पौड़ी गढ़वाल, यमकेश्वर जैसे शहर और इलाके समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी के कारण जनसंख्या असंतुलन का सामना कर रहे हैं। इसके कारण उत्तराखंड में लव जिहाद और लैंड जिहाद के मामले 200 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। पहली बार लैंड जिहाद का मुद्दा राज्य विधानसभा में उठा है।
सत्ताधारी दल भाजपा के रुद्रपुर से विधायक शिव अरोरा ने विधानसभा में लैंड जिहाद का मुद्दा उठाते हुए अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि साम्प्रदायिक ताकतें देवभूमि की संस्कृति को प्रभावित करने में लगी हैं। हाल ही में एक न्यूज चैनल ने उत्तराखंड में 1000 से अधिक अवैध मजार का समाचार देकर राज्य की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सार्वजनिक रूप से यह कहना पड़ा कि राज्य सरकार की जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्तमान में हालात यह है कि वन विभाग की जमीन से लेकर पीडब्ल्यूडी की जमीनों, रिजर्व फ़ॉरेस्ट तथा जिम कार्बेट पार्क में अवैध मजारों और निर्माणाधीन मस्जिदों की संख्या का अनुमान सरकारी तंत्र को भी नहीं है।
हरिद्वार से शुरू हुआ कब्जे का खेल
उत्तर प्रदेश से अलग उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हरिद्वार भले ही उत्तराखंड में शामिल किया गया किन्तु उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों की सीमा हरिद्वार से लगती है। जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अलग नहीं हुए थे तब हरिद्वार में औद्योगीकरण की नींव रखी गयी थी। उस समय मुख्यमंत्री एनडी तिवारी थे जो नोएडा और हरिद्वार जैसे औद्योगिक क्लस्टर विकसित कर रहे थे। उस समय आसपास के जिलों से मुस्लिम आकर हरिद्वार में बस गये थे। धीरे-धीरे गंगा किनारे मुस्लिम बस्तियां बसती गईं और आज स्थिति यह है कि हरिद्वार के कई इलाके मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। ज्वालापुर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
जमीयत उलेमा हिंद, देवबंद से जुड़े मुस्लिम संगठन गजवा-ए-हिंद की नीयत से हरिद्वार में लगातार मुस्लिमों को बसने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पिछले वर्ष उत्तराखंड की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने तीन मुस्लिम युवकों को अवांछनीय गतिविधियों में लिप्त होने के चलते गिरफ्तार किया था जिसमें एक युवक बांग्लादेशी मुस्लिम अली नूर भी था जो अवैध रूप से हरिद्वार में रह रहा था। वह यहां मदरसे में बच्चों को गजवा-ए-हिंद की शिक्षा दे रहा था।
हरिद्वार में कब्जे से शुरू हुआ यह खेल अब उत्तराखंड के सीमांत जनपदों, नदी के किनारों, रेलवे की जमीन तक फैल गया है और मुस्लिम समुदाय ने जमीनों पर कब्जा कर अपनी बस्तियां बसा ली हैं। हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा का मामला तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था और सुप्रीम कोर्ट ने ही फिलहाल कब्जा खाली कराने पर रोक लगा रखी है। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों के बाद अब पर्वतीय क्षेत्र भी धीरे-धीरे मुस्लिमों के अवैध कब्जों से परेशान होने लगे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग पहाड़ों में जाकर घरों और खेतों में मजार बनाकर कब्जे का खेल कर रहे हैं।
अवैध कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण
अनुमान है कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है जिनमें से एक चौथाई आबादी बंगाली-बिहारी, बांग्लादेशी, रोहिंग्या मुस्लिमों की है। यदि हरिद्वार को ही केंद्र में रखें तो 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में मुस्लिम आबादी 2001 में 4,78,000 से बढ़कर 6,48,119 हो गई थी अर्थात जिले की कुल आबादी में 34.2 प्रतिशत मुसलमान हैं। एक अनुमान के अनुसार 2023 में हरिद्वार जिले में ही मुस्लिमों की आबादी आठ लाख से अधिक हो जाएगी जो किसी भी सेकुलर पार्टी के लिए एक बड़ा वोटबैंक है।
जाहिर है ऐसे में मुस्लिमों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त हो रहा है। कांग्रेस ने अवैध मजारों और निर्माणाधीन मस्जिदों के मुद्दे पर कहा है कि धामी सरकार 2024 के आम चुनावों को देखते हुए राज्य में हिंदू-मुस्लिम कर रही है। जबकि इतिहास कहता है कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए राज्य में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी और अवैध कब्जों पर चुप्पी साध ली थी। खासकर स्व. एनडी तिवारी और हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते मुस्लिमों को योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया। वर्तमान हालात यह है कि जहां भी मुस्लिम आबादी बढ़ी है वहां कांग्रेस के नेता आसानी से चुनाव जीत रहे हैं।
कांग्रेस द्वारा मुस्लिम समुदाय को अवैध कब्जों के लिए बढ़ावा देने का सबसे बढ़ा उदाहरण हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित गफूर बस्ती का है जहां हाल ही में अतिक्रमण हटाने के उच्च न्यायालय के आदेश और कार्रवाई के समय कांग्रेस के विधायक से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री तक उनके पक्ष में उच्चतम न्यायालय चले गए। उन्होंने तो रेलवे की जमीन को भी मुस्लिम समुदाय की जमीन बता दिया और अब यह मामला अधर में लटका है। इसके अलावा मुस्लिम आबादी को खुश करने और मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने तक की घोषणा कर दी थी।
पूरे देश में लैंड जिहाद का विरोध
लैंड जिहाद के ऐसे मामले उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं है। अब पूरे देश से ऐसी खबरें भी आ रही हैं और उसके विरोध में लोग भी सड़कों पर उतर रहे हैं। 29 जनवरी, 2023 को मुंबई में सकल हिन्दू समाज के बैनर तले एक लाख से अधिक लोगों ने मुंबई में बढ़ते लैंड जिहाद के मामलों के विरोध में रैली निकाली जिसमें भाजपा, बालासाहेबंची शिवसेना सहित विश्व हिन्दू परिषद् के सैकड़ों कार्यकर्ता भी सम्मिलित हुए। नागपुर, अमरावती, पुणे, वर्धा, बुलढाणा, शिर्डी, श्रीरामपुर और सतारा समेत महाराष्ट्र में 31 जगहों पर ऐसे मोर्चे निकाले जा चुके हैं जो मुस्लिम समुदाय द्वारा जमीन कब्जाने का विरोध कर रहे हैं।
गुजरात के भावनगर में हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू करने की मांग को लेकर 20 मार्च, 2023 को एक रैली का आयोजन किया गया। आरोप है कि लंबे समय से भावनगर के तिलक नगर, कृष्णा नगर के बोर्डी गेट समेत कई हिंदू बहुल इलाकों में मुस्लिम समुदाय के लोग बाजार कीमतों से अधिक अदा कर प्रॉपर्टी और मकान खरीद रहे हैं जिससे स्थानीय लोगों को डेमोग्राफी बदलने और इलाके में अशांति फैलने का डर सता रहा है।
इसके अलावा झारखंड के विभिन्न इलाकों, खासकर साहिबगंज, संथाल-परगना में जनजातीय युवतियों से मुस्लिम लड़के प्रेम के नाम पर दुष्कर्म, हत्या और उनकी जमीनों को हड़पने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की शादियों के जरिए प्रतिबंधित संगठन पीएफआई ने झारखंड की करीब 10,000 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया है।
मध्य प्रदेश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर में कई ऐसे मुस्लिम हैं जिन्होंने सहरिया जनजाति की महिलाओं से विवाह कर उनके नाम से जमीनों पर कब्जा कर लिया है। आज स्थिति यह है कि पूरे देश में जनजातीय इलाकों में मुस्लिमों का प्रभाव और दबदबा तेजी से बढ़ रहा है और वे बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं।
कुछ ऐसे ही हालात उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे तराई इलाकों में भी दिख रहे हैं जहां अचानक से समुदाय विशेष की जनसंख्या बढ गयी है। तराई इलाकों में इस जनसंख्या असंतुलन पर यूपी की खुफिया एजंसियां अलर्ट जारी कर चुकी हैं। स्वाभाविक है लैंड जिहाद के जरिए देश के अलग अलग हिस्सों में अवैध रूप से समुदाय विशेष के लोगों को बसाने और अरबी संस्कृति के प्रचार का खेल व्यापक स्तर पर चल रहा है। समय रहते सचेत न हुए तो कश्मीर छोड़िए हरिद्वार में अलगाववाद का संकट खड़ा दिखाई देगा।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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