Land for Job case: राजनीतिक विद्वेष या राजनीतिक भ्रष्टाचार पर हमला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सीबीआई और ईडी को खुली छूट दे दी है। इसलिए सीबीआई और ईडी किसी का लिहाज नहीं कर रही। महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक और दिल्ली से लेकर बिहार तक।

नए पुराने सब मामले खोले जा रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद बंगाल की बारी आई थी। फिर दिल्ली की बारी आई, और अब बिहार का मोर्चा खुल गया है।
अब यह संयोग है या राजनीतिक बदले की कार्रवाई, यह अदालत तय करेगी। क्योंकि चारा घोटाले की जांच को भी राजनीतिक विद्वेष कहा जाता था, लेकिन अदालत में लालू यादव के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए और उन्हें जेल हुई।
हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला पर जब शिक्षकों की भर्ती में घोटाले के आरोप लगे थे, तो वे राजनीतिक विद्वेष बताते थे, फिर अदालत में आरोप सिद्ध हुए और उन्होंने जेल की सजा काटी।
दिल्ली के शराब घोटाले के सम्बंध में छापेमारी की खबरों के बीच ही लालू यादव के पूरे कुनबे पर लैंड फार जॉब मामले में चार्जशीट दाखिल हो गई है।
लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती समेत 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसी के साथ ही सीबीआई ने डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के प्राइवेट सेक्रेटरी संजय यादव को पूछताछ के लिए तलब भी किया है।
यानि चार्जशीट के बाद भी जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। यह घोटाला तब का है, जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। पर मामला प्रकाश में आया था 2017 में।
लालू यादव के रेल मंत्री रहते समय कई लोगों को पहले अस्थायी तौर पर नौकरी दी गई। ये नौकरियां रेलवे में बिना किसी विज्ञापन के दी गईं थीं।
अस्थायी तौर पर नियुक्ति के बाद नौकरी लेने वालों से जमीन गिफ्ट करवाई जाती थी। ये जमीनें लालू परिवार के लोगों के नाम पर रजिस्ट्री करवाई जाती थी। लैंड डील पूरी होने के बाद अस्थायी कर्मचारी को स्थायी कर दिया जाता था।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में जिन लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें नौकरी दी गई थी। इन में कुछ लालू यादव के रिश्तेदार भी हैं, यानि लालू यादव ने अपने सगे संबंधियों को भी फोकट में नौकरी नहीं दी। नौकरी देने की यह सारी प्रक्रिया गलत थी, क्योंकि बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया को अपनाए स्थाई नौकरी नहीं दी जा सकती।
उत्तराखंड में भी पिछले दिनों इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया था। मामला यह था कि जो भी विधानसभा का स्पीकर बनता था, वह दलालों के माध्यम से अपने कार्यालय में सीधी भर्ती कर लेता था। इस तरह स्पीकर कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या सैंकड़ों में हो चली थी।
आरोप लगे तो स्पीकर ऋतु खंडूरी ने जांच बिठाई, जांच रिपोर्ट आने के बाद सीधी भर्ती वाले सभी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। ठीक उसी तरह का घोटाला लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए हुआ।
सीबीआई ने चार साल की जांच के बाद 18 मई को यह केस दायर किया था। तब से कईयों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। कई जगह छापेमारी की गई। सीबीअई ने 27 जुलाई को भोला यादव और हृदयानंद चौधरी को कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था।
इनमें भोला यादव, लालू यादव के ओएसडी थे, जबकि हृदयानंद चौधरी की रेलवे में नियुक्ति हुई थी। भोला यादव लैंड फॉर जॉब्स स्कैम का मुख्य कर्ता-धर्ता था। ठीक उसी तरह, जैसे केजरीवाल सरकार के शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी का संचार प्रभारी विजय नायर मुख्य कर्ता धर्ता था। 27 जुलाई को भोला यादव को गिरफ्तार किया गया और 27 सितंबर को विजय नायर को गिरफ्तार किया गया।
इस तरह सीबीआई और ईडी धडाधड गिरफ्तारियां कर रही हैं। इस से पहले आप ने देखा कि महाराष्ट्र में उद्धव सरकार के समय एनसीपी कोटे के मंत्री अनिल देशमुख और नवाब मलिक गिरफ्तार किए गए। बंगाल में ममता सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी गिरफ्तार किए गए। अब दिल्ली में मनीष सिसोदिया, बिहार में लालू यादव और उन के बेटे तेजस्वी की गिरफ्तारी हो सकती है।
भोला यादव की गिरफ्तारी के बाद उससे हुई पूछताछ के आधार पर सीबीआई ने जब अगस्त में फिर से छापेमारी की थी, तो लालू परिवार और आरजेडी नेताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। तब सीबीआई को पटना और अन्य इलाकों में कई जमीनों के सेल और गिफ्ट डीड मिले थे। इसी पर तेजस्वी यादव ने सीबीआई अफसरों को धमकाया था। उन्होंने कहा था कि लैंड फॉर जॉब स्कैम में जांच के नाम पर सीबीआई गरीब परिवारों को परेशान कर रही है। गरीबों को पीटा जा रहा है, रेलवे में ग्रुप डी के तहत जिन लोगों को नौकरियां मिली थीं, वे गरीब परिवारों से हैं, सीबीआई जांच के बहाने उन्हें परेशान कर रही है।
तेजस्वी ने उन्हें धमकाते हुए कहा था कि क्या वे हमेशा सीबीआई अधिकारी ही रहेंगे, कभी रिटायर्ड नहीं होंगे? जब सत्ता बदलेगी तब उनका क्या होगा? यह ठीक उसी तरह की धमकी थी, जैसी नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ आन्दोलन कर रहे मुस्लिमों पर पुलिस कार्रवाई के बाद असदुद्दीन ओवेसी ने उत्तर प्रदेश के पुलिस कर्मियों को दी थी, कि सरकार बदलने पर एक एक को देख लिया जाएगा। इसलिए सीबीआई ने तेजस्वी की जमानत याचिका खारिज करने की अपील भी दाखिल की थी।
अब मजेदार बात यह है कि पिछली गठबंधन सरकार के दौरान जब लालू परिवार पर जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप लगा था तो नीतीश कुमार ने 2017 में आरजेडी से नाता तोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी। अब उसी घोटाले के मामले में 27 जुलाई को भोला यादव की गिरफ्तारी के बावजूद उन्होंने 10 अगस्त को लालू यादव के साथ दुबारा गठबंधन सरकार बना ली है, तो उन के स्वर बदल गए हैं।
नीतीश कुमार ने लालू परिवार का बचाव करते हुए कहा कि, "कुछ नहीं है। हम लालू- नीतीश एक साथ आ गये हैं, इसलिए भाजपा विद्वेष की राजनीति कर रही है. इसका कोई मतलब नहीं है। यह कोई तरीका नहीं है।"
खैर लालू यादव के कुनबे के खिलाफ यह नई चार्जशीट ठीक उस समय दाखिल हुई है, जब लालू यादव एक बार फिर आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। 9 और 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले आरजेडी के अधिवेशन में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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