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Keshub Mahindra: चुपचाप चला गया स्वदेशी व्यापार का पैरोकार

केशब महिन्द्रा कुछ महीने और जीवित रहते तो सौ साल के हो जाते। लेकिन जीवनभर व्यवसाय के नये नये मील पत्थर पार करने वाले केशब महिन्द्रा इस मील पत्थर को पार नहीं कर पाये और 99 साल 6 महीने की उम्र में संसार से विदा ले ली।

Keshub Mahindra passes away Indias oldest billionaire Keshub Mahindra profile

Keshub Mahindra: किसी व्यापारी का आकलन करते समय हम यह देखते हैं कि उसने कितनी संपत्ति पैदा की या फिर कितना बड़ा व्यापार खड़ा किया। केशब महिन्द्रा भी इसके अपवाद नहीं थे। उनकी संपत्ति की गणना भी होती थी और उनके फैलते व्यापार की चर्चा भी। लेकिन केशब महिन्द्रा इससे थोड़ा अलग थे। वो एक ऐसे व्यापारी थे जो स्वदेशी के प्रबल पैरोकार थे। भारतीय धर्म समाज में उनकी गहरी आस्था थी और इसके लिए समय समय पर काम भी करते रहते थे।

महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा ग्रुप के चालीस साल चेयरमैन रहने वाले केशब महिन्द्रा स्वदेशी को समर्थन करने वाली गतिविधियों के लिए भी जाने जाते थे। 1997 में जब मुंबई में स्वदेशी जागरण मंच नामक संस्था ने पहली बार स्वदेशी मेले का आयोजन करना चाहा तो केशब महिन्द्रा ने हर प्रकार से सहयोग किया। आरएसएस द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी जाने से उन्हें कभी कोई परहेज नहीं रहा जबकि उस समय भाजपा सत्ता में भी नहीं थी।

असल में केशब महिन्द्रा ने जो अतीत देखा था उसे वो चाहकर भी कभी झुठला नहीं सकते थे। महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा की स्थापना जालंधर के दो भाईयों ने मिलकर की थी। इनका नाम था जगदीश चंद्र महिन्द्रा और कैलाश चंद्र महिन्द्रा। लेकिन इनके साथ एक और व्यक्ति थे जो उनके इस व्यापार में साझीदार थे। उनका नाम था मलिक गुलाम मोहम्मद। एम एण्ड एम का जो शुरुआती नाम रखा गया उसका अर्थ महिन्द्रा एण्ड मोहम्मद ही था जो 1947 के बंटवारे के बाद महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा कर दिया गया।

1947 में ही मलिक गुलाम मोहम्मद ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया और तय किया वो एक इस्लामिक रियासत की आर्थिक बुनियाद रखेंगे। पाकिस्तान जाने पर उन्हें वहां का वित्त मंत्री बनाया गया और इस्लामिक रियासत का उन्होंने कैसा इस्लामिक अर्थशास्त्र गढ़ा, उसका नतीजा आज सबके सामने है। लेकिन इधर महिन्द्रा समूह अपने कारोबार की दिशा में आगे बढ़ चला।

कैलाशचंद्र महिन्द्रा के बेटे केशब महिन्द्रा ने उसी साल महिन्द्रा कंपनी ज्वाइन की जिस साल देश का बंटवारा हुआ था। करीब 16 साल बाद 1963 में वो इस कंपनी के चेयरमैन बनाये गये और लगभग पचास साल तक इस पद पर रहे। 2012 में बढती उम्र को देखते हुए उन्होंने महिन्द्रा कंपनी से अपने आप को अलग कर लिया और अपने भतीजे आनंद महिन्द्रा को महिन्द्रा ग्रुप का चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया।

हालांकि महिन्द्रा ग्रुप का मलिक मोहम्मद से जो ज्वाइंट वेन्चर हुआ था वह विल्ली जीप को आयात करने के लिए था। 1947 में मलिक मोहम्मद के अलग हो जाने के बाद भी महिन्द्रा समूह ने विल्ली जीप को आयात करके भारत में बेचने का काम शुरु किया लेकिन बदलते समय के साथ केशब महिन्द्रा ने स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दिया। उन्होंने महिन्द्रा जीप के कलपुर्जे भारत में बनाना शुरु किया और 1982 में ट्रैक्टर डिविजन की नींव डाली। केशब महिन्द्रा के कार्यकाल में ही साल 2000 में भारत की चर्चित एसयूवी ब्रांड स्कॉर्पियो लांच हुई।

आज महिन्द्रा का कारोबार जिन ऊंचाइयों पर है उसको पंख भले ही आनंद महिन्द्रा ने लगाये हों लेकिन उसकी जमीन केशब महिन्द्रा ने ही तैयार की थी। अपनी कारोबारी सफलता के कारण ही वो भारत के पहले अरबपति व्यापारी घोषित किये गये। हालांकि उनके दामन पर कुछ दाग ऐसे भी थे जिसे कभी धोया नहीं जा सका।

जिस यूनियन कार्बाइड प्लांट में गैस रिसाव के कारण 1984 में भयानक भोपाल गैस कांड हुआ था, उस समय अमरीकी कंपनी की भारतीय ब्रांच यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद केशब महिन्द्रा के पास था। 2010 में अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया और दो साल की सजा भी सुनाई गयी और एक लाख का फाइन भी लगा। हालांकि उन्हें तत्काल जमानत मिल गयी लेकिन भोपास गैस कांड में हुई मौतों का दाग कहीं न कहीं केशब महिन्द्रा के दामन पर सदैव लगा रहा।

व्यापार के अलावा सरकारी काम काज में भी उनको शामिल किया जाता रहा। 2004 से 2010 के बीच वो प्रधानमंत्री सलाहकार समिति का हिस्सा भी रहे जिसे औद्योगिक गतिविधियों पर सलाह देने के लिए बनाया गया था। लेकिन 2012 के बाद उन्होंने धीरे धीरे सभी प्रकार की सार्वजनिक गतिविधियों से अपने आप को अलग कर लिया। 12 अप्रैल को जब उनके भतीजे ने संसार से उनके विदा ले लेने की सूचना दी तब पता चला कि भारत के औद्योगीकरण में अपना अहम योगदान देने वाले केशब महिन्द्रा चुपचाप चले गये हैं।

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    हालांकि आज उनकी कंपनी दुनिया के 100 से अधिक देशों में व्यापार करती है। भारत की 20 बड़ी कंपनियों में शामिल है और उसे भविष्य में विश्व की 200 कंपनियों में शामिल होने का गौरव हासिल है लेकिन केशब महिन्द्रा का स्वदेशी के प्रति आग्रह ही था कि आज महिन्द्रा की पहचान भारत से की जाती है। बहुराष्ट्रीय कंपनी बनते हुए भी उसने अपनी भारतीय पहचान को कभी कमजोर नहीं होने दिया है।

    यह भी पढ़ें: Keshub Mahindra: जानें कितनी संपत्ति के मालिक थे केशब महिंद्रा? हाल ही में Forbes की लिस्ट में हुए थे शामिल

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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