भारतीय मूल के ऋषि सुनक से क्यों आस लगाए बैठा है ब्रिटेन?

भारत ब्रिटिश हुकूमत से आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और इसी अमृत महोत्सव के दौर में भारतीय मूल के ऋषि सुनक इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। कन्जर्वेटिव पार्टी में प्रधानमंत्री चुनने के लिए जो मतदान चल रहा है उसके तीसरे राउण्ड में ऋषि सुनक 115 वोट पाकर सबसे ऊपर हैं। सब अनुकूल रहा तो पांच सितंबर को 42 वर्षीष ऋषि सुनक गीता पर हाथ रख ईश्वर के नाम पर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ले लेंगे।

indian sage sunak rule uk leading in voting

महात्मा गांधी को अधनंगा फ़कीर कहकर तिरोहित करने वाले उस समय के ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर सर विंस्टन चर्चिल ने आज़ादी के आंदोलन से जल भुनकर कहा था, "सत्ता धूर्तों, दुष्टों, फ़्रीबूटर्स के हाथों में जाएगी। ठिगने कद के भारतीय नेता कम क्षमता वाले हैं। वे मीठी जुबान और मूर्ख दिल वाले हैं। वे सत्ता के लिए आपस में लड़ेंगे और भारत राजनीतिक झगड़ों में खो जाएगा।" अर्थात भारतीय लौटकर अंग्रेजों के पास आएंगे और कहेंगे कि हम नाकाबिल हैं। आओ काबिल अंग्रेज़ फिर से हम पर राज करो। लेकिन महज 75 साल में चर्चिल का उद्धरण उलटा साबित हो रहा है।

ऋषि सुनक सिर्फ योग्य राजनेता भर नहीं है। वो एक सफल टेक्नोक्रेट और धनाढ्य कारोबारी भी हैं। संपदा के मामले में 42 वर्षीय ऋषि सुनक ब्रिटेन के 222 वें सबसे अमीर नागरिक हैं। इनके ससुर नारायण मूर्ति के साथ मिलाकर 34 अरब 99 करोड़ की दौलत है। संभवत इतनी दौलत ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के पास भी नहीं है। हालांकि अब उनकी पहचान ऐसे प्रखर ब्रिटिश राजनेता की है, जिन्होंने 2020 से 2022 तक राजकोष के कुलाधिपति के तौर पर निपुणता से काम किया। जब पीएम बॉरिस जॉनसन ने आर्थिक सुधारों को पटरी से उतारना शुरू किया तो विरोध में सरकार से इस्तीफा देकर अलग हो गए।

इंग्लैंड के सॉउथम्पटन में 12 मई 1980 को भारतीय माता पिता के घर पैदा हुए ऋषि सुनक बेहतरीन राजनेता, टेक्नोक्रेट और व्यवसायिक रुझान वाले शख्सियत हैं। ऋषि सुनक ब्रिटिश कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्य हैं और 2015 से रिचमंड (यॉर्क) से सांसद हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात इंफोसिस वाले नारायणमूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से हुई और 2009 में दोनों ने शादी रचा ली। इस लिहाज से दो पीढी पहले विदेश में बसने के बाद भी वो किसी न किसी रूप में भारत से जुड़े हुए हैं।

ऋषि सुनक की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वो ब्रिटिश हुकूमत के प्राइम मिनिस्टर बनने के बहुत करीब हैं। लेकिन भारतीय मूल के अन्य ऐसे लोग भी हैं जो यूरोप से लेकर अमेरिका तक अपनी प्रतिभा के बल पर कामयाब हो रहे हैं। अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी भारतीय मूल की हैं जिनकी मां भारत से और पिता जमैका से हैं। इस तरह भारतीय मूल के अनगिनत लोग दुनिया में अपनी दक्षता का डंका बजा रहे हैं। इंग्लैंड में ही ऋषि सुनक के साथ दो साल पहले प्रीति पटेल और आलोक शर्मा ने मंत्री के तौर पर ईश्वर की शपथ ली थी।

ये लोग उस नई पीढ़ी के आदर्श हैं जिनको इस सदी को अपने नाम करना है। जाहिर तौर पर सदी के आरंभ के बड़े हस्ताक्षर के बाद आगंतुकों के लिए चुनौती बढ़ गई है। उनको समझना है कि किस संतुलित अंदाज में भारतीय मूल के लोगों ने विदेश की धरती पर सरोकार भरे काम किए जिसके कारण उनको अंगीकार करने में वहां के समाज में कोई संकोच और संशय नहीं बचा।

हमारी पीढी जो कि स्वतंत्रता के दस बीस साल बाद पैदा हुई थी उसका यौवन अंग्रेजों की गुलामी और उससे लड़ने की कहानियां सुनते हुए बीता। हम राज नहीं कर सकते बल्कि हम पर राज किया जा सकता है यह भाव परिवेश में भरा पड़ा था। इसमें धीरे धीरे क्रमवार तरीके से बदलाव आया। बीते सदी के आखिर में आई आईटी क्रांति विश्व बंधुत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण थी।

19 सदी के आखिर में जो श्रम स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के धर्म संसद में पहुंचने और भारत की श्लाघा के वर्णन के लिए किया था वह सौ वर्ष बाद तेजी से प्रतिफलित होता नजर आ रहा है। महात्मा गांधी ने संघर्ष के लिए अहिंसा के जिस अस्त्र को सफलतापूर्वक चलाकर पिछली सदी को दिखाया, संभवत उससे भारतीयों के जिद्दी होने का भान दुनिया को मिल गया। भारतीयों के मध्यम मार्गी होने की समझ मिली।

फिर तो भारतीय अध्यात्मिक गुरुओं मसलन रामकृष्ण मिशन के संत, योगानन्द, प्रभुपाद, ओशो रजनीश, महर्षि महेश योगी आदि ने विदेश की धरती पर जाकर भारतीय मनीषियों के प्रति श्रद्धा की हनक बनाई। विश्व बंधुत्व से भरी अध्यात्म परंपरा को सर्वांगिक साबित करने में खुद को झोंक दिया, उसने भी भारत के बारे में पश्चिम की धारणा को बदला। ऐसी बदलती धारणाओं ने ऋषि सुनक को इंग्लैंड के पीएम बनाने की दिशा में अग्रसर करने में नीव के पत्थर का काम किया है।

वह वर्ष 2000 की कोई तारीख रही होगी। नॉर्थ ब्लॉक में उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का कांफ्रेंस हॉल सजा था। आडवाणी जी स्वयं पत्रकारों को खास मेहमान से रुबरू करवा रहे थे। सामने थे पंजाबी व टूटी-फूटी हिंदी बोलते उज्जवल दोसांझ। वह ब्रिटिश कोलंबिया के प्रधानमंत्री बने थे। दोसांझ ने पूरे आत्मविश्वास से कहा था, "ब्रिटिश कोलंबिया को कनाडा का पंजाब, हरियाणा या बिहार जैसा कोई प्रांत मत समझिए। बल्कि गणराज्य है। अंग्रेजी के संग पंजाबी वहां की राजकीय भाषा है। कनाडा संघीय ढांचे में ढला देश है, लिहाजा ब्रिटिश कोलंबिया स्वतंत्र देश के माफिक काम करता है।"

उससे पहले हम ब्रिटिश साम्राज्य के पतन के साथ मॉरीशस, सूरीनाम, फ़िजी जैसे देशों में भारतीय मूल के प्रधानमंत्रियों और नेतृत्वकर्ताओं से प्रभावित हो चुके थे। लेकिन दोसांझ और कैरेबियन देशों व भारतीय मूल के लोगों का नेतृत्व देखने के बाद, जिनके शासन का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, उन जॉर्ज पंचम के गौरवर्णी देश के प्रधानमंत्री बनने की रेस में किसी भारतीय का पहुंच जाना अलग ही नहीं, अति महत्वपूर्ण बात है।

अब जबकि भारतीय मूल के शख्स को इंग्लैंड पीएम के तौर पर कबूल करने जा रहा है, तब उसकी विवशता को समझने की भी जरूरत है। दरअसल ब्रेक्सिट से निकलने के बाद ब्रिटेन में जॉब मार्केट का हाल खस्ता है। ज्यादातर नौकरियों को ब्रिटेन से उठाकर फ्रांस, जर्मनी, इटली आदि दूसरे यूरोपीय देशों में ले जाया गया है। टेक्नोलॉजी ने अंग्रेजी के आधिपत्य को कमजोर कर दिया है। आप किसी भाषा के जानकार हों, ट्रांसलेटर टूल्स संवाद में कोई मुसीबत खड़ा नहीं होने दे रहे। यूक्रेन और रूस की "करो या मरो" वाली लड़ाई से वर्ल्ड ऑर्डर बदलने की कगार पर है।

इससे बीती सदी के सिरमौर राष्ट्र सामान्य राष्ट्रों की कतार में खड़े हो रहे हैं। वैसे भी आधुनिक सभ्यता का नया प्रमाणित सच यही है कि तकनीकी चुनौतियों से मुकाबले के लिए प्राचीन सभ्यताओं वाले मानव मस्तिष्क ज्यादा उपयुक्त हैं। ऐसे में भारतीय माता पिता की संतान ऋषि सुनक को इंग्लैंड के लोग प्रधानमंत्री के रूप में ज्यादा स्थिर और संतुलित पाते हैं तो इसमें गलत क्या है?

यह भी पढ़ें: मेधा पाटकर: आंदोलन, प्रसिद्धि, राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा और भ्रष्टाचार का कीचड़

(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+