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India Afghanistan T20: अफगानिस्तान के सामने टी20 विश्व कप की उम्मीदें जगाए भारत

India Afghanistan T20: "कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है, सॉल्यूशन कुछ पता नहीं..." फिल्म 'थ्री इडियट' के एक गाने की ये लाइन 1 जून से अमेरिका और वेस्टइंडीज़ की संयुक्त मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप टूर्नामेंट को लेकर रणनीति बना रही भारतीय क्रिकेट टीम पर फिलहाल फिट बैठती दिख रही है।

India Afghanistan T20

वक्त अब ज्यादा नहीं बचा है। ऐसे में हर कन्फ्यूजन का सॉल्यूशन तलाशने का भारतीय टीम और उसके चयनकर्ताओं के पास बस एक आखिरी मौका है। और उनका समय शुरू होता है अब।

भारतीय क्रिकेट टीम को टी20 विश्व कप से जुड़े अपने हर सवाल का जवाब बस मैदान पर तीन मैचों में या कहें तो तीन चालों में तलाशना है। ये मौका उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ गुरुवार से शुरू हो रही तीन टी20 मैचों की सीरीज में मिलेगा। टी20 की इस बाजी में टीम इंडिया को न सिर्फ वर्ल्ड कप की तैयारी जांचने वाली बिसात बिछानी है बल्कि ऐसा विनिंग कॉम्बिनेशन भी मैदान पर उतारना है जो अफगानिस्तान को तो हराए ही, टी20 विश्व कप जीत की उम्मीदें भी जगाए। भारतीय टीम 17 साल पहले अफ्रीकी मैदानों पर 2007 में हुए पहले वर्ल्ड टी20 के बाद से हर बार खिताब जीतने में नाकाम रही है। वैसे अफगानिस्तान से सीरीज के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों को आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग में भी खुद को आजमाना है, लेकिन वो अलग बात है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच टक्कर अगर किक्रेट के किसी और फॉर्मेट में होती तो शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी इसे गंभीरता से लेता। हालांकि मुकाबला खेल के सबसे छोटे फॉर्मेट में है और टी20 मुकाबलों में अफगानिस्तान के खिलाड़ी कई मौकों पर कई बड़ी टीमों को चौंका चुके हैं। हालांकि मैदान पर होने वाली जोर आजमाइश में सीरीज में जीत हार से भी बड़े कई मायने हैं। कई यक्ष प्रश्नों के उत्तर ढूंढने हैं।

सबसे बड़ा सवाल या सबसे बड़ी कन्फ्यूजन तो ये है कि आखिर टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को विश्व विजेता बनाने का दारोमदार किस पर होगा? कौन होगा टीम इंडिया का कप्तान? हार्दिक पांड्या के घायल होने के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में बागडोर जब सूर्य कुमार यादव के हाथों में सौंपी गई तो कहा जाने लगा था कि इस फॉर्मेट में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का गेम ओवर हो चुका है। खबरें तो ये भी आई थीं कि सीरीज से पहले रोहित शर्मा ने कप्तानी को लेकर बीसीसीआई के सचिव जय शाह से जवाब मांगा था, लेकिन उस वक्त रोहित से कहा गया कि उन्हें कोई आश्वासन नहीं दिया जा सकता। इस अनिश्चितता ने टी20 कप्तान के तौर पर उनके भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया था।

भारतीय टीम के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और उनके साथी भले ही टी20 विश्व कप के लिए टीम के कप्तान का नाम न तय कर पा रहे हों, लेकिन कई पूर्व दिग्गज क्रिकेटर तो रोहित शर्मा पर ही दांव लगा रहे हैं। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली तो साफ तौर पर कह रहे हैं कि रोहित शर्मा को टीम इंडिया की अगुवाई करनी चाहिए।

वहीं पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर तो मानते हैं कि ये भले ही अब तक तय न हो कि रोहित शर्मा टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के कप्तान होंगे या नहीं लेकिन उनकी और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ी की टीम में मौजूदगी जरूरी है। वैसे टखने की चोट से जूझ रहे हार्दिक पांड्या की आईपीएल में वापसी की उम्मीद है लेकिन उनकी फिटनेस पर सवाल बरकरार रहेगा। ऐसे में विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में कप्तान के तौर पर सेलेक्टर उन पर शायद ही दांव लगाएं। वहीं रोहित शर्मा ने व्हाइट बॉल क्रिकेट में एक कप्तान के तौर पर खुद को साबित किया है। वनडे विश्व कप 2023 में टीम को दमदार अंदाज में फाइनल तक पहुंचाना इसकी मिसाल है।

रोहित शर्मा ने 2017 से 2022 के बीच टी20 क्रिकेट में भारतीय कप्तान के तौर पर 51 में से 39 मैच जीते हैं जबकि 12 में हार का सामना करना पड़ा। कप्तान के तौर पर जीत का प्रतिशत 76.47 है जो धोनी और विराट कोहली जैसे कप्तानों से कहीं ज्यादा बेहतर है। हालांकि बड़ा सवाल ये है कि क्या टी20 फॉर्मेट में वो एक बार फिर कप्तान के तौर पर सेलेक्टरों का भरोसा जीत पाएंगे? उम्मीद है कि अफगानिस्तान के खिलाफ तीन टी20 मैच विश्व कप में कप्तानी को लेकर चले आ रहे सस्पेंस पर फुलस्टॉप लगा देंगे।

सेलेक्टरों को सिर्फ कप्तान ही तय नहीं करना है बल्कि अमेरिका और वेस्टइंडीज की पिचों के मुताबिक विनिंग कॉम्बिनेशन वाली टीम भी बनानी है। ऐसे में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ी इस कॉम्बिनेशन का हिस्सा होंगे या नहीं, ये तय करना सेलेक्टरों के लिए आसान नहीं होगा।

भारतीय टी20 टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली की एक साल बाद वापसी हुई है। दोनों अनुभवी खिलाड़ियों ने 2022 टी20 वर्ल्ड कप के बाद से कोई इंटरनेशनल टी20 मुकाबला नहीं खेला है। हालांकि पूर्व दिग्गज क्रिकेटर मानते हैं कि रोहित और विराट दोनों ही विश्व कप में टीम के लिए अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। उनकी सोच की वजह दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में आंकड़ें हैं। रोहित शर्मा ने 148 टी20 मैचों में 139.24 के स्ट्राइक रेट के साथ 3853 रन बनाए हैं। इसमें चार शतक भी शामिल हैं। वहीं विराट कोहली के नाम टी20 इंटरनेशनल मैचों में सबसे ज्यादा 4008 रन दर्ज हैं। ये रन उन्होंने 115 मैचों में 137.96 के स्ट्राइक रेट से एक शतक के साथ बनाए हैं। ऐसे में ये देखना भी दिलचस्प होगा कि अफगानिस्तान के खिलाफ प्लेइंग इलेवन में इनका रोल क्या रहता है?

कन्फ्यूजन सिर्फ सीनियर खिलाड़ियों को लेकर ही नहीं बल्कि युवा चेहरों और टीम में खिलाड़ियों के रोल को लेकर भी है। सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इस बात को लेकर है कि आखिरकार विश्व कप में विकेटकीपिंग कौन करेगा? इस दौड़ में सबसे आगे के. एल. राहुल दिख रहे हैं। जो बल्ले के साथ-साथ विकेट के पीछे भी बेहतरीन अंदाज में अपना रोल बखूबी निभाते रहे हैं। हालांकि अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में संजू सैमसन और जितेश शर्मा को भी मौका दिया गया ताकि उनकी दावेदारी को आंका जा सके। हालांकि अफगानिस्तान सीरीज से युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन का आउट होना न सिर्फ सवाल उठा रहा है बल्कि विश्व कप टीम में उनकी दावेदारी पर सस्पेंस खड़ा कर रहा है।

वैसे कन्फ्यूजन तो विश्व कप टीम में सलामी जोड़ी को लेकर भी है। अगर रोहित टीम का हिस्सा बनते हैं तो ये सवाल भी सामने होगा कि उनका जोड़ीदार कौन होगा? ऐसे में छह चेहरे सामने दिख रहे हैं जिन पर सेलेक्टर दांव लगा सकते हैं। युवा बल्लेबाज शुभमन गिल, ईशान किशन और यशस्वी जायसवाल कई बार रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरूआत कर चुके हैं। वहीं के. एल. राहुल और संजू सैमसन भी ओपनर का रोल निभाने की काबिलियत रखते हैं। गेंद अब सेलेक्टरों के पाले में है।

हालांकि मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजी में तिलक वर्मा और फिनिशर के तौर पर रिंकू सिंह को मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं तेज़ गेंदबाज़ी हो या फिर फिरकी, सेलेक्टरों के पास विकल्प तो बहुत हैं। उनके तरकश में अनुभव है तो युवा जोश भी है। अब सोच उन्हें बनानी है कि वे स्पेशलिस्ट गेंदबाज़ों पर ज्यादा दांव लगाते हैं या फिर गेंद के साथ-साथ बल्ला भी चला लेने वाले चेहरों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में मैदान पर जवाब मिलने लगेंगे। ऐसे में मुख्य कोच राहुल द्रविड़, टीम मैनेजमेंट और सेलेक्टरों को जल्द से जल्द हर गुत्थी सुलझानी होगी। आखिर टी20 विश्व कप जीत न पाने का 17 साल का इंतजार भी तो खत्म करना है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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