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Financial Stability Report: भारत की वित्तीय स्थिरता कितनी मजबूत?

हाल ही में रिजर्व बैंक ने ‘भारतीय वित्तीय स्थिरता’ की स्थिति का आंकलन किया है और 29 दिसंबर 2022 को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है।

How strong is Indias financial stability in RBI report

Financial Stability Report: भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में महत्वपूर्ण होती जा रही है, इसमें अब दो राय नहीं है। अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए इसकी वित्तीय प्रणाली स्थिर और मजबूत होनी उतनी ही आवश्यक होती है। वित्तीय प्रणाली वह है जो कि वित्तीय संस्थाओं और उनसे वित्त की लेन-देन करने वालों से मिलकर बनती है और अर्थव्यवस्था के विविध क्षेत्रों को नकदी धन की आपूर्ति करती है।

जमाकर्ताओं, निवेशकों और नकदी की जरूरत वालों के बीच नकद का आवागमन का काम करने वाली यह व्यवस्था है। इसमें मुख्य रूप से ऐसी संस्थाएं आती हैं जो वित्त के क्षेत्र में काम करती हैं जैसे बैंक, बीमा कंपनियां, शेयर बाजार, म्यूचुअल फण्ड्स।

देश की यह व्यवस्था एक सामान्य व्यक्ति या फर्म के स्तर पर जैसे काम करती है, वैसे ही ग्रामीण, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती है। निश्चित तौर पर इस वित्तीय व्यवस्था में चल रहे व्यवहार अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी होते हैं इसीलिए सभी वित्तीय संस्थाओं की कार्यरत पूंजी, व्यवहार में कार्यक्षमता और आर्थिक स्थिरता का महत्व होता है।

इन वित्तीय संस्थाओं का कमजोर या अस्थिर होना देश की आर्थिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर करता है, इसलिए रिजर्व बैंक इस पर नजर रखती है और इसे नियमित और नियंत्रित करने का प्रयास करती है। हाल ही में रिजर्व बैंक ने 'भारतीय वित्तीय स्थिरता' की स्थिति का आंकलन किया है और अपनी रिपोर्ट 29 दिसंबर 2022 को प्रकाशित की है। वित्तीय व्यवस्था की विस्तृत जानकारी के लिए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण है।

क्या है वित्तीय प्रणाली की स्थिरता?

वित्तीय प्रणाली मुख्यतः आर्थिक व्यवस्था में सभी क्षेत्र की नकदी जरूरतें पूर्ण करती है। इसलिए हर क्षेत्र को नकदी धन की आपूर्ति आवश्यकतानुसार होती रहे और किसी भी प्रकार के कैश की कमी न हो यह जरूरी होता है। जिन कारणों से कैश की आपूर्ति में बाधा आ सकती है, ऐसे कारणों का पता लगा कर समय रहते उपाय कर यह वित्तीय प्रणाली सभी क्षेत्र को आवश्यक कैश का आवंटन करने का प्रयास करती है। जब वह ऐसा नहीं कर पाती तो वित्तीय प्रणाली अस्थिरता की ओर जाने लगती है जिससे अर्थव्यवस्था के असंतुलित हो जाने का खतरा रहता है। देश में आर्थिक संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। जैसे अर्थव्यवस्था की वृद्धि महत्वपूर्ण है वैसे ही सभी मुख्य वित्तीय संस्थाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत रहना आवश्यक होता है।

वित्तीय स्थिरता के मापदंड

भारतीय अर्थव्यवस्था को बल देनेवाले इस वित्तीय क्षेत्र में भारतीय बैंक, नागरी बैंक, गैर बैंक वित्तीय संस्थाएँ, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड्स आदि का विशेष महत्व है इसलिए उनका घाटे में रहना, उनकी संपातियों की गुणवत्ता कम होना, उनके पास पर्याप्त पूंजी न होना या उनके बड़े कर्जे में डूबना अच्छा नहीं माना जाता। क्योंकि उससे वित्तीय प्रणाली को नुकसान होता है और उनकी स्थिरता पर असर होता है। यही मापदंड भी कहे जा सकते हैं। सरकार के अनुत्पादक खर्च का भी असर नकदी की मांग और आपूर्ति पर होता है जिसका विचार आवश्यक है।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति

आज दुनिया आर्थिक संकट के कगार पर खड़ी है। कोविड-19 ने ऐसे भी दुनिया की अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया था और अब भी आर्थिक मंदी का माहौल लगभग सभी देशों में बना हुआ है। सभी देश फिर से संरक्षणात्मक आर्थिक नीति अपना रहे हैं और संकट को और गहरा कर रहे हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध से विश्व की आपूर्ति व्यवस्था डगमगा गई है जिसने इस आर्थिक संकट को और गंभीर कर दिया है। महंगाई बढ़ रही है और रोजगार कम हो रहे हैं।

महंगाई रोकने के लिए सभी देशों ने अपनी मौद्रिक नीति को कठोर किया है जिससे ब्याज दर बढ़ गए हैं और वित्तीय स्थिरता पर असर हुआ है। ऐसी स्थिति में भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपने आप को संभाले हुए है यह अच्छी बात कही जाएगी। इसका काफी श्रेय भारतीय वित्तीय प्रणाली को जाता है, जो अभी तक स्थिर है।

भारतीय रिजर्व बैंक रिपोर्ट क्या कहती है?

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट ने यह माना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी की स्थिति बनी हुई है जिसके कारण ऋण व्यवस्था पर तनाव आने, मुद्रा अस्थिर होने तथा अंतरराष्ट्रीय पूंजी के बाहरी बहाव की चुनौतियाँ खड़ी हैं। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पक्की होने और यहां की वित्तीय प्रणाली अच्छी होने से स्थिति संभली हुई है। महंगाई भी मुद्रा नीति और सर्व सामान्य आपूर्ति में किए गए हस्तक्षेप को सकारात्मक जवाब दे रही है। बैंकों के ऋण बढ़ रहे हैं।

भारतीय अनुसूचित बैंकों में पूंजी उपलब्धता की स्थिति सितम्बर 2022 में काफी अच्छी रही है और उनकी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां गत सात वर्षों में सितम्बर 2022 में सबसे कम रही हैं। प्रोविज़न कवरेज रेशियो भी 71.5 प्रतिशत तक पहुंचा है। 2022-23 के अर्धवर्ष के लिए बैंकों का मुनाफा भी 40 प्रतिशत बढ़ा है, इसलिए यह बैंक मजबूत दिखाई देते है और संकट का सामना कर सकने में सक्षम है। नागरी बैंक और गैर वित्तीय संस्थाओं का भी हाल ऐसा ही है। यह बात सही है कि बैंकों के व्यवहार में द्विपक्षीय एक्सपोजर ज्यादा है और कुछ बैंक फेल होने से इस क्षेत्र को नुकसान भी सहन करना पड़ा है। वैसे अभी कोई बैंक फ़ेल हो ऐसी संभावना नहीं है।

सब कुछ ठीक-ठाक है ऐसा नहीं

प्रवृत्ति से ही 'वित्त' चंचल माना जाता है इसलिए वित्तीय स्थिरता एक कल्पना ही कही जा सकती है। भारतीय स्टॉक एक्स्चेंज पर नज़र डालने से यह ध्यान में आता है कि बढ़ा हुआ इंडेक्स कब लुढ़केगा बोल नहीं सकते। बाजार व्यवस्था पर विश्वास करने वाले यह अस्थिरता मानकर चलते हैं। लेकिन आजकल अर्थव्यवस्था लगभग सभी देशों में थोड़ी-बहुत नियंत्रित है और आए दिन सरकारें उसमें हस्तक्षेप करती रहती हैं। इसलिए वित्तीय प्रणाली की स्थिरता की बात ज्यादा होने लगी है।

भारतीय बैंकिंग प्रणाली का नियंत्रण 1970 के दशक से बहुत सी बड़ी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके किया गया। तभी से वित्तीय प्रणाली में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ा है और सरकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी है। डूबने वाले कर्जे भी तब से बढ़े और कर्जे छोड़ देने की प्रथा भी शुरू हुई। पिछले पांच वर्षों में अनुसूचित बैंकों ने 10 लाख करोड़ से ज्यादा कर्जे की रकम ऐसे डूबे हुए कर्जे के रूप में छोड़ दी है। इसलिए वित्तीय संस्थाओं में सब कुछ अच्छा चल रहा है यह कहना गलत होगा।

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    दूसरी बात जो वित्तीय अस्थिरता में महत्व रखती है वह है सरकारी खर्च जो बढ़ता ही जा रहा है। बजट का 45 प्रतिशत हिस्सा घाटे का है। गैर विकास खर्च जिसमें सब्सिडी भी आती है, बढ़ रहा है। राज्य सरकारें भी केंद्र के कदम पर चल अपना खर्चा बढ़ा रही हैं। इसका प्रभाव वित्तीय स्थिरता पर पड़ता है। इसलिए दुनिया में जब सर्वत्र अस्थिरता है, देश का व्यापार घाटा बढ़ रहा हो और विदेशी मुद्रा का भंडार घट रहा हो तो भारतीय वित्त प्रणाली कब तक स्थिर रह पाएगी यह देखने की बात होगी।

    यह भी पढ़ें: आर्थिक मंदी की तरफ दुनिया, चीन-US का बुरा हाल.. वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट में रॉकेट की रफ्तार से भारत का विकास

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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