'जय श्री राम' के उदघोष से बंगाल में कितना खिलेगा कमल?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का दुर्ग कभी लाल हुआ करता था। तब 'लाल सलाम' बंगाल के जेहन में क्रांति बीज की तरह था। लाल किला अभेद था। लेकिन जब वामदल के 'लाल सलाम' को ममता बनर्जी की 'माँ माटि मानूश' ने रिप्लेस कर सत्ता का शीर्ष हासिल कर लिया तो यह अभेद किला ढह गया और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की अगुवाई में एक नया किला बना तृणमूल कांग्रेस का। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने इसी किले में सेंध लगाई है। BJP इस लोकसभा चुनाव (Lok sabha elections 2019) में यहां दो से 18 सीटों तक पहुंच गई है। और अब आगे के चुनावों में इस दुर्ग को भेद देने के लिए अपनी रणनीति बना रही है।

भाजपा की रणनीति क्या थी?
भाजपा (Bhartiya Janta Party) की एक शानदार बात यह भी है कि वह अपनी अगली तैयारी करने में वक्त नहीं लेती है। उसके लिए एक चुनाव का खत्म होना आने वाले दूसरे चुनाव की तैयारी की शुरूआत होती है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के रूप में सामने आने की थी। वाम दल के हाशिये पर जाने के बाद BJP इसमें सफल भी रही है। BJP को साल 2014 में 17 फीसदी वोट मिले थे लेकिन इस बार यह बढ़ कर 40 फीसदी से ऊपर हो गए हैं। वहीं लेफ्ट के वोटों में भी लगभग इतनी ही गिरावट आई है।
इन आंकड़ों पर जाएं तो एक सामान्य समझ बनती है कि तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के तौर पर वामपंथी वोटरों ने अबकी बीजेपी का भरपूर समर्थन किया है। इसे पश्चिम बंगाल की राजनीति में वामदल के पतन और भाजपा के उत्थान के आंकड़े भी कहे जा सकते हैं।

भाजपा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विकल्प कैसे बन गई?
एक सवाल जो उत्सुकता पैदा करती है वह है आखिरकार भाजपा बंगाल (Bengal) में तृणमूल कांग्रेस (Trinmul Congress) का विकल्प कैसे बन गई? इसे समझने के लिए भाजपा की राजनीति के तौर तरीकों को देखना होगा। हिंदुत्व और राष्ट्रवाद भाजपा के एजेंडे का बेस है। वैसे ऐसा नहीं है कि भाजपा इन मुद्दों से आगे नहीं बढ़ती है। लेकिन उनके उन मुद्दों में भी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का तड़का लगा होता है।
उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है, इसे भाजपा खुले मंच से स्वीकार भी करती है। इस मुद्दे को भाजपा उभार कर रखती है और हमेशा इस पर मुखर भी रहती है। Lok Sabha Elections 2019 में राष्ट्रवाद का मुद्दा पूरे देश में छाया था। पश्चिम बंगाल में वर्तमान गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हिंदुत्व का कार्ड बड़ी चतुराई से चला था। और कुछ हद तक ममता बनर्जी के गुस्से वाले एक्शन ने BJP की ही मदद कर डाली। बीजेपी की रणनीति साफ थी कि ममता बनर्जी को हिंदू-विरोधी दिखाया जाए और बीजेपी को हिंदुओं के हित में बात करने वाली पार्टी। और ऐसा करने में 'जय श्री राम' का नारा काफी सफल रहा।
इन मुद्दों की सफलता ने BJP को उत्साहित किया है। भाजपा इन मुद्दों को पश्चिम बंगाल में बनाये रखना चाहती है। इसी कारण से भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी को 'जय श्री राम' (Jay Shree Ram) लिखे दस लाख पोस्टकार्ड भेजने का फैसला किया है। यह लोकसभा चुनाव में दीदी के आशानुरूप प्रदर्शन के नहीं होने से उभरे जख्मों पर नमक तो है ही साथ में बंगाल में हिंदुत्व का सबसे बड़ा हितैषी चेहरा होने को स्थापित करना है।

दीदी का डैमेज कंट्रोल
भाजपा के इस मुद्दे से बैकफुट पर आई दीदी अब डैमेज कंट्रोल में लग गई हैं। वह यह समझने लगी हैं कि जितना इन मुद्दों पर वह मुखर होंगी उतना ही ज्यादा फायदे में भाजपा रहेगी। दीदी ने हाल के अपने पोस्ट में कहा है 'मुझे किसी भी राजनीतिक पार्टी के नारे से कोई दिक्कत नहीं है। सबके पास अपना स्लोगन है। मेरी पार्टी का स्लोगन है जय हिंद, वंदे मातरम। लेफ्ट का है इंकलाब जिंदाबाद। हम सब एक दूसरे की इज्जत करते हैं।

ममता दीदी के डैमेज कंट्रोल से बात कितनी बनेगी
इतना ही नहीं आगे ममता ममता बनर्जी ने 'जय श्री राम' पर भी अपनी सधी हुई बात रखी है। उन्होंने कहा है 'जय सिया राम, जय राम जी की, राम नाम सत्य है....इन सबका धार्मिक और सामाजिक महत्व है। हम इन भावनाओं का सम्मान करते हैं। लेकिन बीजेपी जय श्री राम जैसे धार्मिक नारे का इस्तेमाल अपनी पार्टी के नारे के तौर पर कर राजनीति और धर्म को मिला रही है। हम इस तरह से दूसरों पर राजनीतिक नारों को जबरन थोपने का सम्मान नहीं करते। बंगाल ने कभी इसे स्वीकार नहीं किया। ये एक सोची समझी कोशिश है, जिसमें हिंसा के जरिए नफरत फैलाई जा रही है।
अब देखने की बात है कि ममता दीदी के डैमेज कंट्रोल से बात कितनी बनती है। भाजपा के लिए यह मुद्दा ठंडा हो जाता है या यह आगे भी सफल होगा या भाजपा किसी और नए मुद्दे को आजमाएगी। लेकिन इतना तय है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने खड़ी हो गई है। पश्चिम बंगाल के तालाब में इस बार कमल खिला है। भाजपा उम्मीद करेगी कि ये कमल अब खिलते ही रहें।
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