Uttar Pradesh: खेती वाली जमीन पर औद्योगीकरण की नीति कितनी कारगर?
उद्योग धंधों में पिछड़ा राज्य कहा जानेवाला यूपी अनाज उत्पादन में अगली पंक्ति का राज्य रहा है। अब जिस तरह से यूपी को औद्योगीकरण और एक्सप्रेसवे प्रदेश बनाया जा रहा है क्या उससे अन्न उत्पादन पर असर पड़ेगा?

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश को योगी आदित्यनाथ सरकार उद्योग प्रदेश बनाने में जुटी हुई है। औद्योगीकरण के जरिए योगी आदित्यनाथ यूपी को बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकालने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में राज्य सरकार ने 19,058 कंपनियों से करार के जरिए 33.50 लाख करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश जुटाया है। यह अब तक का देश में सबसे बड़ा निवेश करार है। इसके जरिये 93 लाख नौकरियों के सृजन की उम्मीद है।
इसके साथ ही योगी सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी तेजी से काम कर रही है। प्रदेश में एक्सप्रेस-वे एवं हाई-वे का जाल बिछाया जा रहा है। आधा दर्जन एक्सप्रेस-वे बनकर क्रियाशील हो चुके हैं और आधा दर्जन एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन हैं। जाहिर है, यूपी की बेहतर आर्थिक सेहत के लिए उद्योग और ढांचागत मजबूती आवश्यक है, लेकिन चिंताजनक तथ्य यह है कि विकास की रफ्तार राज्य की ऊपजाऊ कृषि भूमि को भी तेजी से निगलती जा रही है।
यूपी सरकार ने निवेशकों को जमीन आवंटित करने के लिये 21 हजार एकड़ जमीन का लैंड बैंक तैयार किया है, लेकिन इतने भारी-भरकम निवेश के लिये यह जमीन पर्याप्त नहीं है। औद्योगिक विकास विभाग ने राज्य के तमाम औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के जरिये यह लैंड बैंक तैयार कराया है, जिसमें बंद पड़े सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की जमीन, बंजर भूमि, ऊसर, अनुपयोगी जमीन एवं कृषि योग्य भूमि शामिल है।
यूपीसीडा ने स्कूटर इंडिया की 150 एकड़ जमीन के साथ 32 जिलों में 12830 एकड़ का लैंड बैंक तैयार किया है। यूपीसीडा के अलावा यीडा 1800 एकड़ का लैंड बैंक तैयार कर रहा है। यूपीडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा जैसे प्राधिकरण भी उद्यमियों को मनचाही जमीन देने का विकल्प दे रहे हैं। सरकार ने किसानों को उनकी मर्जी से अपनी जमीन पट्टा पर देने या बेचने का विकल्प एक पोर्टल के जरिये दे रखा है।
सरकार की मंशा के अनुरूप कोई निजी निवेशक भी औद्योगिक पार्क बनाने के लिये सीधे किसानों-ग्रामीणों से सहमति के जरिये जमीन ले सकता है। जाहिर है कि किसानों एवं ग्रामीणों से ली जाने वाली जमीन का बड़ा हिस्सा कृषि भूमि का होगा। निजी निवेशक अपनी आवश्यकता का 80 फीसदी जमीन खुद जुटा लेता है तो शेष बीस फीसदी जमीन जरूरत पड़ने पर सरकार अधिग्रहण करके निवेशक को देगी।
अगले पांच सालों में 33.50 लाख करोड़ के निवेश को धरातल पर उतारने के लिए सरकार को 1.50 से 1.70 लाख एकड़ जमीन की आवश्यकता पड़ेगी। एक्सप्रेस-वे निर्माण में हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण सरकार ने बीते दशकों में किया है। ऊपजाऊ कृषि भूमि ऐसे ही घटती रही तो राज्य के लिये खाद्यान्न उपलब्धता एक बड़ा संकट का रूप धारण कर सकता है, वह भी तब जब यूपी भारत का सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन करने वाला राज्य है।
यूपी में प्रतिवेदित भूमि 241.95 लाख हेक्टेयर है, जिसमें 187.75 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें से अनुमानत: 165.98 लाख हेक्टेयर पर खेती होती है, जो देश की कृषि योग्य भूमि का लगभग 14.58 फीसदी है। जबकि 2008 में उत्तर प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का रकबा 191.79 लाख हेक्टेयर था, जो लगातार घटता जा रहा है। उद्योग और ढांचागत निर्माणों के अलावा बढ़ती आबादी और कृषि भूमि पर निर्मित होते मकान बड़ी परेशानी हैं।
योगी सरकार को उद्योग, ढांचागत निर्माण, कृषि भूमि के साथ क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखना होगा, अन्यथा घटता खेती का रकबा निकट भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज्यादा किसान आबादी वाला राज्य है। 60 फीसदी आबादी का जीवन खेती-किसानी और इससे जुड़े व्यवसाय पर निर्भर है। भारत में सर्वाधिक 3.89 करोड़ किसान उत्तर प्रदेश से आते हैं। दूसरे राज्यों के मुकाबले यूपी के किसानों की जोत भी छोटी है।
खासकर पूर्वांचल का इलाका छोटी जोत वाले किसानों का है, जिनका आकार परिवार बढ़ने और घर-मकान की जरूरतों की वजह से लगातार कम होता चला जा रहा है। इसके विपरीत पश्चिमी यूपी एवं बुलंदेलखंड के किसानों की जोत बड़ी है। ग्लोबल इनवेस्टर समिट में आये 33.50 लाख करोड़ प्रस्तावित निवेश का 45 फीसदी निवेश पश्चिमी यूपी, 29 फीसदी पूर्वांचल, 13 फीसदी मध्यांचल तथा 13 फीसदी बुंदेलखंड में होना है।
गौरतलब है, देश के जो राज्य औद्योगिकीकरण में अग्रणी हैं, उनके पास जरूरत से ज्यादा बंजर एवं अनुपयोगी जमीनें हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक जैसे उद्योग में अग्रणी राज्य बंजर एवं अनुपयोगी जमीनों के मामले में टॉप पर हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश 201.42 लाख हेक्टेयर, राजस्थान 199.34, महाराष्ट्र 144, आंध्र प्रदेश 114.16 तथा गुजरात 98.36 लाख हेक्टेयर बंजर और अनुपयोगी जमीन के साथ टॉप पांच में शामिल हैं।
अनुपयोगी भूमि के मामले में कर्नाटक 91.65 लाख हेक्टेयर के साथ छठे तथा उसके बाद 80.61 लाख हेक्टेयर के साथ यूपी सातवें नंबर पर आता है, जबकि जनसंख्या के मामले में यूपी पहले नंबर पर है। हालांकि यूपी ने बीते पांच सालों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के जरिये प्रदेश में 768.33 करोड़ रुपये खर्च कर 2 लाख हेक्टेयर उबड़-खाबड़, बीहड़, ऊसर, जलमग्न और बंजर भूमि को कृषि योग्य तथा जल स्रोत भूमि में तब्दील किया है। इससे भूगर्भ जलस्तर में भी औसतन 1.42 मीटर की वृद्धि हुई है।
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ज्यादा अनुपयोगी जमीन वाले राज्यों को उद्योग लगाने में वैसी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा, जैसा यूपी को करना पड़ सकता है। यूपी में जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने के साथ ही लघु एवं मध्यम जोत वाले किसानों की बहुलता है। जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी, बंटवारा, मकानों का निर्माण भी तेजी से कृषि भूमि को निगलता जा रहा है। राज्य सरकार को उद्योग के साथ इन सभी तथ्यों में संतुलन साधकर ही राज्य का भविष्य निर्माण करना होगा।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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