वेबसाइट बंद, अकाउंट ब्लॉक, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला… आखिर Cockroach Janta Party से सरकार क्यों हुई अलर्ट?

Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया की दुनिया में पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नए डिजिटल मूवमेंट की हो रही है, तो वह है अभिजीत दीपके की बनाई गई "कॉकरोच जनता पार्टी" यानी CJP. मीम, व्यंग्य, युवा गुस्से और सिस्टम पर कटाक्ष के जरिए शुरू हुआ यह ऑनलाइन कैंपेन अब सीधे सरकार और एजेंसियों के निशाने पर आ गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट अचानक बंद हो गई, जिसके बाद इसके फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुलकर आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के दबाव में हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा विवाद ऐसे समय में बढ़ा है, जब देश में NEET-UG पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा पहले से ही उबाल पर है। CJP उसी असंतोष को डिजिटल भाषा में पेश कर रहा था, जिसे बड़ी संख्या में युवा सोशल मीडिया पर शेयर और सपोर्ट कर रहे थे। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर इस 'कॉकरोच' गैंग ने ऐसा क्या कर दिया कि सरकार को एक्शन मोड में आना पड़ा।

Cockroach Janta Party

🔷सरकार को क्यों खटकने लगे 'कॉकरोच'? जानिए इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

अभिजीत दीपके का दावा है कि इस अजीब से नाम वाली डिजिटल मुहिम से बहुत कम समय में लगभग 10 लाख युवा जुड़ चुके थे। यह प्लेटफॉर्म देश के युवाओं और 'मिलेनियल्स' के लिए सरकार की नीतियों पर मीम्स बनाने और तंज कसने का एक बड़ा जरिया बन चुका था। लेकिन मामला सिर्फ हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहा।

हाल ही में देश में NEET-UG पेपर लीक को लेकर मचे बवाल के बीच, इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने एक ऑनलाइन पिटीशन (याचिका) शुरू कर दी। दीपके के मुताबिक, करीब 6 लाख युवाओं ने इस पिटीशन पर साइन करके केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर डाली।

फाउंडर का आरोप है कि युवाओं के इसी बढ़ते गुस्से और एकजुटता से घबराकर सरकार ने उनकी वेबसाइट को डाउन कर दिया है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हमारा कसूर सिर्फ इतना था कि हम अपने बेहतर भविष्य की मांग कर रहे थे, लेकिन 'कॉकरोच कभी मरते नहीं', हम जल्द ही नया ठिकाना ढूंढ लेंगे।

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🔷वेबसाइट बंद होने के बाद क्या बोले अभिजीत दीपके?

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि उनकी "आइकॉनिक वेबसाइट" को हटा दिया गया है। उन्होंने लिखा कि करीब 10 लाख लोगों ने उनकी वेबसाइट पर सदस्यता ली थी और लगभग 6 लाख लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली ऑनलाइन पिटीशन पर हस्ताक्षर किए थे।

दीपके ने सरकार पर "तानाशाही रवैये" का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका एकमात्र "गुनाह" बेहतर भविष्य की मांग करना था। उन्होंने यह भी कहा कि "कॉकरोच इतनी आसानी से खत्म नहीं होते" और टीम नए प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है।

उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर #CockroachJantaParty और #CockroachIsBack जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। खास बात यह रही कि इस पूरे अभियान में राजनीतिक नारों से ज्यादा मीम कल्चर और व्यंग्य का इस्तेमाल हुआ, जिसने Gen Z और मिलेनियल यूजर्स को तेजी से जोड़ा।

🔷खुफिया एजेंसी की एंट्री और नेशनल सिक्योरिटी का एंगल: आखिर क्यों लिया गया एक्शन?

अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई एक मीम पेज या डिजिटल पार्टी से सरकार डर गई? सरकारी गलियारों से आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के इस मामले में देश की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की एंट्री हुई थी।

IB ने इस डिजिटल मूवमेंट को लेकर 'राष्ट्रीय सुरक्षा' (National Security) से जुड़ी चिंताएं जताई थीं। खुफिया इनपुट मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (A) के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि यह अकाउंट लगातार ऐसी भड़काऊ चीजें पोस्ट कर रहा था, जिससे देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर थी कि इस प्लेटफॉर्म का कंटेंट बहुत तेजी से देश के युवाओं को प्रभावित कर रहा था। आपको बता दें कि धारा 69 (A) के तहत की जाने वाली यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय होती है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A, यह वही कानूनी प्रावधान है, जिसके जरिए केंद्र सरकार किसी ऑनलाइन कंटेंट या अकाउंट को ब्लॉक कर सकती है, अगर उसे लगे कि उससे देश की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो सकता है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों को खास चिंता इस बात की थी कि यह डिजिटल आंदोलन तेजी से युवाओं में प्रभाव बना रहा था और NEET विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़कर बड़ा ऑनलाइन दबाव तैयार कर रहा था।

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🔷कैसे एक अदालती टिप्पणी से पैदा हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी'?

इस पूरी कहानी की शुरुआत बड़ी दिलचस्प है। यह पूरा बवंडर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। दरअसल, 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान युवाओं को लेकर एक टिप्पणी सामने आई, जिसे सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच' शब्द से जोड़कर देखा गया। लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस टिप्पणी में कहा गया था कि कुछ युवा इस पेशे में काम न मिलने के कारण सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर दूसरों पर निशाना साध रहे हैं।

इसी बात को युवाओं ने अपने आत्मसम्मान से जोड़ लिया और देखते ही देखते 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से एक डिजिटल बगावत शुरू हो गई। हालांकि, बाद में जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर सफाई भी दी कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया और उनका इशारा सिर्फ उन लोगों की तरफ था जो फर्जी और बोगस डिग्रियों के सहारे प्रोफेशन में आ जाते हैं। लेकिन तब तक इंटरनेट पर तीर कमान से छूट चुका था।

🔷पिछले 8 दिनों का पूरा लेखा-जोखा: जानिए कब क्या-क्या हुआ (Chronology of Cockroach Janta Party 8 Days Timeline)

इस डिजिटल आंदोलन ने पिछले एक हफ्ते में जो रफ्तार पकड़ी है, वह हैरान करने वाली है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं इसके अर्श से फर्श तक का सफर:

  • 15 मई: सुप्रीम कोर्ट में युवाओं के करियर और सोशल मीडिया एक्टिविज्म को लेकर 'कॉकरोच' शब्द वाली कथित टिप्पणी सामने आई।
  • 16 मई: अभिजीत दीपके ने मौके को भांपते हुए X (ट्विटर) पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का ऐलान कर दिया। इसी दिन जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी।
  • 17 मई: CJP ने इंस्टाग्राम पर कदम रखा। सरकार विरोधी मीम्स और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट वायरल होने लगे और फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।
  • 18 मई: बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाकर इस पेज ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दीं। 'जॉइन पार्टी' का लिंक तेजी से शेयर होने लगा।
  • 19 मई: इंस्टाग्राम पर CJP के फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई। यह आंकड़ा देश की स्थापित राजनीतिक पार्टियों के डिजिटल बेस को भी टक्कर देने लगा।
  • 20 मई: महज 4 दिनों के भीतर CJP के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का आंकड़ा 66 लाख के पार पहुंच गया और यह देश का सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया।
  • 21 मई: सरकार के निर्देश पर CJP का पुराना X अकाउंट (जिस पर करीब 1.93 लाख फॉलोअर्स थे) ब्लॉक कर दिया गया। संगठन ने तुरंत 'कॉकरोच इज बैक' नाम से नया अकाउंट बना लिया।
  • 22 मई: फाउंडर अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्हें वॉट्सऐप पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने नीट मामले पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पिटीशन डाली, जिस पर कुछ ही घंटों में 5.6 लाख से ज्यादा लोगों ने साइन कर दिए। इसी बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम को हथियाने के लिए तीन अलग-अलग लोगों ने ट्रेडमार्क के लिए भी अप्लाई कर दिया।

🔷फॉलोअर्स को लेकर क्या है विवाद?

CJP को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि इसके ज्यादातर फॉलोअर्स भारत से बाहर के हैं। हालांकि पार्टी समर्थकों का कहना है कि लगभग 96 प्रतिशत फॉलोअर्स भारतीय हैं और विदेशी फॉलोअर्स की बात भ्रामक तरीके से फैलाई जा रही है।

उधर कॉकरोच जनता पार्टी नाम को लेकर ट्रेडमार्क आवेदन भी दाखिल किए जा चुके हैं। अलग-अलग व्यक्तियों और एक प्रोपराइटरशिप फर्म ने इस नाम पर अधिकार मांगते हुए आवेदन जमा किए हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी का पूरा मामला सिर्फ एक वायरल मीम या इंटरनेट ट्रेंड नहीं रह गया है। यह अब उस बड़े सवाल से जुड़ गया है कि क्या सोशल मीडिया आधारित डिजिटल मूवमेंट सरकार और संस्थाओं के लिए नई चुनौती बन रहे हैं?

एक तरफ समर्थक इसे युवाओं की नाराजगी की आवाज बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ एजेंसियां इसे "संवेदनशील माहौल" में तेजी से फैलने वाला प्रभावशाली ऑनलाइन नेटवर्क मान रही हैं। यही वजह है कि वेबसाइट बंद होने और अकाउंट ब्लॉक होने के बाद यह विवाद और ज्यादा राजनीतिक और राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है।

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