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Gopal Kanda: हरियाणा भाजपा को मिला नया 'निर्दोष' साथी गोपाल कांडा

दिल्ली की चर्चित गीतिका शर्मा सुसाइड केस में आरोपी एवं ह​रियाणा के पूर्व गृ​ह राज्य मंत्री गोपाल कांडा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को बरी कर दिया। आरोपों से बरी होने के बाद कांडा अब खुलकर राजनीति करने की तैयारी में है। अभी तक छिपकर कांडा का सहयोग लेती रही भाजपा अब खुलकर कांडा को अपने साथ लाकर हरियाणा में चौटाला परिवार की राजनीति को चुनौती देने का प्लान बना रही है।

दरअसल हरियाणा में सिरसा चौटाला परिवार की राजनीति का गढ़ है। इस गढ़ को भेदने के लिए ही भाजपा गोपाल कांडा को अपने साथ ला रही है। 2019 के विधानसभा चुनाव में सिरसा सीट से अपनी हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के टिकट पर गोपाल कांडा चुनाव जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुके हैं। ऐसे में हरियाणा में गैर जाटवाद की राजनीति करने वाली भाजपा के सभी मापदंडों पर गोपाल कांडा फिट बैठते हैं।

gopal kanda

चौटाला परिवार का गढ़ सिरसा भाजपा के लिए 27 साल से चुनौती बना हुआ है। यहां से सांसद के तौर पर जरूर सुनीता दुग्गल 2019 का लोकसभा चुनाव जीत गईं मगर उसके छह महीने बाद हुए हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भाजपा को असफलता ही ​हाथ लगी। कांडा वैश्य समाज का बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में भाजपा अग्रवाल समाज से जुड़े कांडा को इस्तेमाल कर पूरे हरियाणा में वैश्य समाज को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। गोपाल के भाई गोविंद कांडा पहले से भाजपा में है और गोपाल कांडा ने भी 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को समर्थन दिया था।

मंगलवार को गोपाल कांडा के बरी होते ही उनके मंत्री बनने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। अभी गोपाल कांडा हरियाणा सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। उनकी हरियाणा लोकहित पार्टी एनडीए गठबंधन में शामिल है। हाल में प्रधानमंत्री मोदी ते नेतृत्व में जो एनडीए की बैठक हुई थी उसमें गोपाल कांडा भी शामिल हुए थे।

कौन है गोपाल कांडा?
सिरसा के सम्मानित वकील मुरलीधर लखराम के बेटे गोपाल कांडा ने पढ़ाई में मन नहीं लगने पर स्कूल छोड़कर छोटा मोटा व्यवसाय शुरु कर दिया था। गोपाला कांडा ने किताबों की दुकान (1979), ज्यूपिटर इलेक्ट्रॉनिक्स (1982), जूतों की दुकान (1985), बोतलबंद पानी और जूता बनाने की फैक्टरी जैसे तमाम व्यवसायों में हाथ आजमाया और असफल होता रहा। गोपाल कांडा को जानने वाले कहते हैं कि तमाम व्यवसाय में असफल होने के बाद भी गोपाल कांडा अक्सर "हवाई चप्पल से शुरू करके हवाई जहाज उड़ाने" का ख्वाब देखा करता था।

तमाम व्यवसायों में असफल होने के बाद गोपाल कांडा ने 90 के दशक में गुड़गांव का रूख किया। कहा जाता है कि गुड़गांव के उनके शुरुआती दिनों में एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कांडा को जमीन और मकान के कारोबार में काफी लाभ पहुंचाया। '90 के दशक के अंत और नई सदी के पहले दशक की शुरुआत में गुड़गांव के भारत के सबसे तेजी से विकसित होते शहर के साथ ही कांडा की संपत्ति भी दिन-दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ी। वर्ष 2000 में कारोबार से राजनीति की ओर बढ़ते हुए वो अपने बचपन के दोस्त और तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पुत्र अभय सिंह चौटाला से जुड़ गया।

2005 के बाद जब चौटाला सत्ता से बाहर हो गए तब कांडा अपने आर्थिक साम्राज्य का उपयोग करते हुए कांग्रेसी नेताओं के करीबी बन गए। 2009 के चुनाव में उन्होंने सिरसा से विधायक का टिकट मांगा। कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो गोपाल कांडा निर्दलीय मैदान में उतरे और वैश्य समुदाय से भावनात्मक अपील और करोड़ों रूपये खर्च कर चुनाव जीत गए। गोपाल कांडा ने कांग्रेस के पांच बार के विधायक लक्ष्मण दास अरोड़ा को ​हरा दिया। नब्बे सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के भूपिंदर सिंह हुड्डा के मात्र 40 सीटों पर जीतने के बाद कांडा ने अपने अकूत धन और संपर्कों के सहारे हुड्डा को दोबारा मुख्यमंत्री बनवाने के लिए जरूरी छह विधायकों की व्यवस्था कर दी। गोपाल कांडा ने अपने इस एहसान की कीमत मुख्यमंत्री हुडा से गृह राज्य, शहरी स्थानीय निकाय, उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय अपने पास रखकर वसूली।

ये सभी मंत्रालय गुड़गांव-मानेसर में उनके कारोबार में लाभ पहुंचाने वाले थे। हुड्डा से उनकी दोस्ती गहराई तक पहुंची और मुख्यमंत्री उनकी बर्थडे पार्टी में केक खिलाने पहुंचने लगे। दरअसल बर्थडे पार्टी जनसंपर्क अभियान का बड़ा मंच रहा। गोपाल कांडा के गुड़गांव के फार्म हाउस में शानदार पार्टियां हुआ करती थी। खुद शराब को हाथ न लगाने वाला कांडा इन पार्टियों में शराब की नदियां बहा देता था। मार्च, 2007 में कांडा ने भारत की पहली पूर्णत: शाकाहारी एअरलाइंस एमडीएलआर शुरू की।

गोपाल और गीतिका का रिश्ता
दिल्ली में वित्त मंत्रालय में एकाउंटेंट अनुराधा शर्मा की बड़ी बेटी गीतिका को अक्तूबर, 2006 में एमडीएलआर में मात्र 17 साल की उम्र में केबिन क्रू के जूनियर ट्रेनी के रूप में नौकरी मिली। खूबसूरत किशोरी गीतिका ने अशोक विहार के हंसराज स्कूल से स्कूली शिक्षा ली थी और उस समय एयरहॉस्टेस एकेडमी से निकली ही थी। उस पर फिदा गोपाल कांडा ने नौजवान महिला को बहुत तेजी से तरक्की दी। 2009 तक एमडीएलआर के अपने शुरुआती चार वर्षों में गीतिका सबसे निचले पद से तरक्की पाकर कोऑर्डिनेटर बन गई। बताया जाता है कि वह अनेपक्षित रूप से 60,000 रु. की मोटी तनख्वाह घर लाने लगी। एअरलाइंस चलाने का गोपाल कांडा का शौक ज्यादा नहीं चल सका और एमडीएलआर ने तीन साल में दम तोड़ दिया।

घाटे में चल रही अपनी एयरलाइंस को गोपाल कांडा ने खत्म कर दिया, लेकिन गीतिका शर्मा से अपने रिश्ते खत्म नहीं किए। गोपाल कांडा गीतिका से अनैतिक रिश्ते रखना चाहता था, जिसके लिए वह तैयार नहीं थी। गीतिका ने गोपाल की कंपनी एमडीएलआर की नौकरी छोड़कर 22 मई 2010 को अमीरात एअरलाइंस में इस उम्मीद के साथ नौकरी कर ली थी कि दुबई में उसकी जिंदगी की नई शुरुआत होगी और गोपाल कांडा से पीछा छूटेगा।

गीतिका शर्मा की मां अनुराधा ने दिल्ली पुलिस में की गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जब तक दुबई में उनकी बेटी की नौकरी नहीं चली गई कांडा अमीरात एयरलाइंस के अधिकारियों समेत विभिन्न अधिकारियों को उनकी बेटी पर झूठे आरोप लगाने वाले ईमेल भेजता था। गीतिका इससे बहुत परेशान थी। 2010 में दुबई से गीतिका के लौटने पर गोपाल कांडा ने दबाव डालकर सिरसा स्थित मुरलीधर इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन का पद दे दिया। इसके बाद फिर से गोपाल कांडा गीतिका का शोषण करने लगा। इससे परेशान होकर गीतिका ने दिल्ली के अशोक विहार स्थित अपने पिता के निवास पर 5 अगस्त 2012 को मात्र 23 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली। उसने अपने दो पन्नों के सुसाइड नोट में इसके लिए कांडा और उनकी साथी अरुणा चड्ढा को जिम्मेदार ठहराया।

उस वक्त हरियाणा में कांग्रेस सरकार थी। भूपेंद्र हुड्‌डा मुख्यमंत्री थे। कांडा ने निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रखा था। बदले में उन्हें गृह राज्यमंत्री का पद मिला। मगर, गीतिका सुसाइड केस में नाम आने के बाद कांडा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा और 18 महीने तिहाड़ जेल में बिताने पड़े।

लेकिन 2019 के हरियाणा विधानसभा में जब किसी दल को बहुमत नहीं मिला तो चुनाव नतीजों के बाद गोपाल कांडा ने हरियाणा में मनोहर लाल की अगुवाई वाली बीजेपी-जेजेपी सरकार को समर्थन दे दिया। सिरसा से भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल और रानियां के निर्दलीय विधायक रणजीत चौटाला के साथ कांडा चार्टेड प्लेन से दिल्ली गए। उनकी इच्छा फिर से मंत्री बनने की थी।

हालांकि तब भाजपा की वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उनके खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई। उमा भारती ने कांडा का समर्थन लेने पर अपनी पार्टी पर ही निशाने साधने शुरू कर दिए और मीडिया में लगातार कांडा के खिलाफ चल रही खबरों के बाद भाजपा ने कदम पीछे खींच लिए और गोपाल कांडा मंत्री नहीं बन सके।

लेकिन अब उसकी उम्मीदें फिर से हिलोरे मार रही है। भाजपा को भी उसकी जरूरत है और उमा भारती जैसा मुखर विरोध करनेवाला भी कोई नहीं है। इसलिए बहुत संभावना है कि भाजपा सरकार में गोपाल कांडा को मंत्री बना दिया जाए। वैसे भी गोपाल कांडा का परिवार जनसंघ के समय से जुड़ा हुआ है। 1952 में जनसंघ के टिकट पर ही सिरसा से कट्टर संघी मुरलीधर कांडा ने चुनाव लड़ा था और हार गये थे। अब उनका सबसे बडा बेटा गोपाल कांडा सियासत में फिर से खोया मुकाम हासिल करना चाहता है। भाजपा भी हरियाणा में मजबूत होने के लिए कांडा को उपयोगी मान रही है। ऐसे में अगर कांडा मंत्री बन जाते है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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