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Gujarat Election Results: केजरीवाल और कांग्रेस के बीच कमाल कर गया कमल

बीजेपी ने गुजरात में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। कांग्रेस बुरी तरह से हार गई और आम आदमी के लिए गुजरात के जरिए देश में राष्ट्रीय पार्टी के रूप में पनपने की संभावना बन गई।

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Gujarat Election Results 2022: नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात में बीजेपी की जागीर को बनाए रखते हुए पहले से भी ज्यादा बहुमत से जीतकर कांग्रेस को वो पटखनी दी है, जिसकी देश की सबसे पुरानी पार्टी और उसके नेताओं ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

गुजरात विधानसभा की कुल 182 सीटों में भाजपा ने 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। लेकिन गुजरात की जनता ने बीजेपी को लक्ष्य से भी अधिक सीटें देकर उनकी झोली भर दी है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस को कुल सीटों का न्यूनतम 10 प्रतिशत यानी 18 सीटें भी नहीं मिली कि वो विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभा सके। हां, बहुत शोरगुल के बीच आम आदमी पार्टी ने गुजरात में अपना खाता जरूर खोल लिया है।

गुजरात में लगातार 8वीं बार बीजेपी की सरकार बन रही है और यह गुजरात के अब तक के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत है। इससे पहले 1980 में माधवसिंह सोलंकी ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमान वोटों के जातिगत गणित की "खाम" (KHAM) पद्धति के जरिए जीत दर्ज की थी, और वे कांग्रेस को 149 सीटों पर जिताने में सफल रहे थे। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के रूप में भले ही भूपेंद्र पटेल हो, पर जीत नरेंद्र मोदी की मेहनत के कारण संभव हुई है। गुजरात में मोदी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़कर अपने घोषित लक्ष्य 150 सीटों से भी ज्यादा सीटों पर जिताते हुए बीजेपी को अब तक के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया है।

जीत के लिए कांग्रेस से बीजेपी को मिले तानों और मोदी को मिली 'गालियां' तो सिर्फ प्रचार की बात थी, लेकिन मोदी और उनकी बीजेपी का पूरा फोकस ओबीसी पर रहा, जिसे कांग्रेस समझ ही नहीं पाई। गुजरात का जातिगत समीकरण दूसरे राज्यों से बिल्कुल अलग है। यहां पिछड़ी जातियों की सबसे ज्यादा अधिकता है। राज्य की लगभग 7 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या में 52 फीसदी मतदाता पिछड़ा वर्ग की 146 जातियों से ही आते हैं, बीजेपी पूरी तरह से इसी पर केंद्रित रही और सफल भी हुई।

कांग्रेस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसे गुजरात में इतनी बुरी हार मिलेगी। 2012 में कांग्रेस ने 61 सीटें जीती तो 2017 के चुनाव में 77 सीटों पर कामयाब रही, जबकि बीजेपी की सीटें 2017 के चुनाव में 115 से घट कर 99 रह गई थीं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से स्थिति बदली और पिछली बार के मुकाबले कांग्रेस ने इस बार 2022 में अपनी 60 सीटें खो दी, कई दमदार व नामी नेता भी खो दिए और अब वह इतिहास की सबसे कम सीटों पर सिमट गई है।

पिछली बार की जीती हुई 99 सीटों से बढ़त लेकर बीजेपी ने 150 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है और रणनीतिक रूप से बड़ी कसावट के साथ गुजरात का चुनाव लड़ा। माना जा रहा है कि यह उसके लिए अगले साल 2024 के आम चुनाव की रिहर्सल थी। चुनाव की कमान अमित शाह के हाथ में रही और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दबंग सांसद सीआर पाटिल पूरी ताकत से ग्राउंड पर मेहनत कर रहे थे। साथ ही बीजेपी ने हर हाल में अपने वोट बैंक को न केवल सम्हाले रखा बल्कि उसमें लगातार बढ़ोतरी भी करती रही।

उधर, गुजरात में काग्रेस की हवा निकल गई है, कारण यही है कि वह रणनीतिक रूप से बीजेपी के माइंड गेम में फंस गई। चुनाव शुरू होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि कांग्रेस कमजोर नहीं है, वह बहुत मजबूत है और साइलेंट प्रचार कर रही है... फिर मोदी ने अपनी कही इस बात का प्रचार भी जमकर करवाया। कांग्रेस बस यहीं गच्चा खा गई, मोदी के माइंड गेम में उलझ गई और उसके नेताओं ने भी यह कहना शुरू कर दिया कि जब प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि कांग्रेस बेहद मजबूत है तो है, सो जीत पक्की है।

कांग्रेस इस तरह से हवा में ही रही। पता नहीं उसे क्यों लग रहा था कि वह गुजरात जीत रही है। इसीलिए पहले चरण के मतदान के बाद गुजरात कांग्रेस के प्रभारी रघु शर्मा का दावा था कि सरकार हम बनाएंगे क्योंकि इन पहले चरण की 89 सीटों में से हम 65 सीटें जीत रहे हैं तथा अगले चरण में भी इतनी ही सीटें जीतेंगे। चुनाव परिणाम के बाद अब कांग्रेस की सारी हवा निकल गई और लगभग पूरी कांग्रेस ही हवा - हवाई हो गई। गुजरात में यह बहुत प्रचलित तथ्य है कि गुजरात कांग्रेस के ज्यादातर बड़े नेता बीजेपी के पे-रोल पर ही कांग्रेस में हैं।

कांग्रेस की गुजरात में यह सबसे बड़ी कमजोरी रही कि पूरे चुनाव में साफ लगता रहा कि उसके नेता किसी न किसी रूप में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए कांग्रेस में बने हुए है। यहां तक कि गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को जब जब चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया, तो वे उससे बचते रहे। कांग्रेस कार्यकर्ता खुद ही कहते रहे कि जिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष ही चुनाव लड़ने से डरता हो, वहां पार्टी कैसे जीतेगी, यह सबसे बड़ा सवाल बना रहा।

कांग्रेस में यह तथ्य भी सत्य साबित होता दिखा कि सत्ता में न होने के बावजूद पार्टी के भीतर जो गुटबाजी है, उसी ने कांग्रेस को जीतने नहीं दिया। शक्ति सिंह गोहिल, भरत सोलंकी, जगदीश ठाकोर, अर्जुन मोढवाड़िया जैसे लगभग सभी नेताओं के अपने अपने गुट हैं। ये सब आपस में ही एक दूसरे को कमजोर करने में लगे रहे। कांग्रेसी नेताओं में से किसी ने भी बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रूप से चुनाव लड़ा ही नहीं, और इसी कारण एक - दो को छोड़कर लगभग सारे बड़े नेता इस चुनाव में हार गए।

गुजरात के तीन लड़कों में से हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे ताकतवर युवा नेताओं को बीजेपी में जगह और जीत दोनों मिली, तो कांग्रेस ने अपने मजबूत भविष्य की इस ताकत को खो दिया। हार्दिक वीरमगाम से जीते हैं, तो अल्पेश गांधीनगर साउथ से जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं। इसी तरह से पिछले चुनाव में निर्दलीय जीते तीसरे लड़के जिग्नेश मेवानी चुनाव तो जीत गए लेकिन कांग्रेस की बुरी हार से उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता के बावजूद उनकी आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि उसके पास गुजरात का कोई बड़ा चेहरा नहीं था, फिर भी वे खाता खोलने में सफल रहे हैं। हालांकि कुल करीब 16.48 लाख लोगों के बीच कराई वोटिंग के बाद 73 फीसदी लोगों की पसंद से तय किए गए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार ईसूदान गढ़वी खांभलिया से चुनाव हार गए हैं।

आम आदमी पार्टी की सफलता इसी में है कि वह कई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को तीसरे नंबर पर और कहीं तो चौथे नंबर पर धकेलने में सफल रही। बहुत सारी सीटों पर कांग्रेस की हार का कारण केजरीवाल बने।

केजरीवाल अपने मकसद में सफल रहे हैं, क्योंकि गुजरात में मिले मत प्रतिशत से आम आदमी पार्टी को अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने का दरवाजा खुल सकता है। अब वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की राजनीति करने में तो कामयाब रहेंगे ही, कांग्रेस को सताने में भी कोई कमी नहीं रखेंगे। आखिर, उन्हें जो चाहिए था वह गुजरात से मिल ही गया है।

यह भी पढ़ें: Gujarat Election 2022: बीजेपी का 27 साल का राज, कैसे हुआ 'नरेंद्र मोदी' का उदय

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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