Gujarat Election 2022: बीजेपी का 27 साल का राज, कैसे हुआ ‘नरेंद्र मोदी’ का उदय
गुजरात की सभी 182 विधानसभा सीटों पर चल रही मतगणना से लग रहा है कि एक बार फिर से BJP इतिहास रचने के करीब है। पिछले 27 साल से बीजेपी गुजरात की सत्ता पर काबिज है। देखें कैसा रहा अब तक बीजेपी का गुजरात में सफर।

Gujarat Election 2022: साल 1960 में महाराष्ट्र से अलग होकर गुजरात राज्य का गठन हुआ था। तब पहले विधानसभा चुनाव 1960 में हुए थे। तब 132 सीटों वाले गुजरात में कांग्रेस ने 112 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया था और जीवराज नारायण मेहता को मुख्यमंत्री बनाया था। तब से लेकर (1960) से लेकर 1985 तक जितने चुनाव हुए, कांग्रेस का वहां एकछत्र राज रहा।
1990 में कांग्रेस को लगा तगड़ा झटका
साल 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा और कांग्रेस के वोट शेयर में 20 फीसदी की गिरावट आई। वहीं तब तक बीजेपी मैदान में आ चुकी थी और वोट शेयर में 10 फीसदी की बढ़ोतरी भी की थी। तब कांग्रेस का वोट शेयर 30.90 फीसदी रहा और भाजपा का 33.86 प्रतिशत। वहीं, जनता दल का वोट शेयर 36.25 फीसदी सबसे ज्यादा था। साल 1990 की आठवीं विधानसभा चुनाव में भाजपा को 67, जनता दल को 70, कांग्रेस को 33, युवा विकास पार्टी को 1 और 11 अन्य सीटें मिली थी। लेकिन कांग्रेस ने जनता दल के साथ मिलकर सरकार बना ली थी और भाजपा खाली हाथ रह गई।
कैसा हुआ बीजेपी का उदय
गौर करने वाली बात यह है कि अप्रैल 1980 में भाजपा का गठन हुआ था। तभी से भाजपा गुजरात के हर चुनाव में अपना प्रभाव छोड़ती आ रही है। साथ ही पिछले 27 सालों से बीजेपी, गुजरात विधानसभा का हर चुनाव बहुमत के साथ जीतती आ रही है।
आंकड़ों से समझते हैं बीजेपी का उत्थान
बीजेपी की स्थापना 1980 में हुई थी। उसी वर्ष गुजरात में विधानसभा चुनाव था, तो पार्टी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और 1980 में 14% वोट शेयर से गुजरात में भाजपा ने अपना सफर शुरू किया। तब भाजपा ने 9 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया था कि कैसे एक नई पार्टी ने आते ही 9 सीटें झटक ली और जोरदार प्रभाव दिखाया। उसके बाद 1985 में गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी के वोट प्रतिशत थोड़ा बढ़ा और 15% वोट हासिल कर 11 सीटें जीती।
अब बीजेपी ने लगाई बड़ी छलांग
साल था 1990 और गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने थे। तभी बीजेपी ने बड़ी छलांग लगाते हुए गुजरात समेत पूरे देश में राममंदिर का मुद्दा उछाला था। तब के नायक थे लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और अशोक सिंघल जैसे हिंदुवादी नेता। राम मंदिर आंदोलन का असर गुजरात के जनमानस पर पड़ चुका था। बीजेपी ने 1990 विधानसभा चुनाव में 13 प्रतिशत वोट अपने खाते में जोड़े और चुनाव में 29.70% वोट पाकर 67 सीटें झटक लीं। राम मंदिर आंदोलन और उसमें बीजेपी और संघ परिवार की भूमिका का असर तब से ही गुजरात के जनमानस पर साफ दिखने लगा था। लेकिन भाजपा सरकार बनाने में असमर्थ रही क्योंकि जनता दल को 70, कांग्रेस को 33 सीटें मिली थी। तब कांग्रेस के सहयोग से जनता दल और कांग्रेस की गठबंधन की सरकार बनीं।
जीत के साथ पार्टी में आई कड़वाहट
फिर साल आया 1995 और बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में 42.5% मत के साथ 121 सीट पाकर पहली बार गुजरात में अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। तब से लेकर अभी तक गुजरात में बीजेपी की सरकार मौजूद है। लेकिन, चुनाव जीतने के बाद भी बीजेपी का सफर इतना आसान नहीं रहा। साल 1995 के चुनाव जीतने के बाद दो दिग्गज बीजेपी नेता केशुभाई पटेल और शंकर सिंह बाघेला की आपसी टकराहट शुरू हो गई। इस टकराव की वजह से बीजेपी सरकार 5 वर्ष पूरी नहीं कर पाई और 3 सालों में 3 मुख्यमंत्री बनाने पड़े और अन्ततः फिर से 1998 में मध्यावधि चुनाव कराना पड़ गया।
1998 का चुनाव और मोदी का उदय
एक बार फिर से साल 1998 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार बनी। बीजेपी ने इस बार भी वोट प्रतिशत में 2 प्रतिशत की उछाल मारी और 44.80% वोट पाकर 117 सीटों पर कब्जा किया। तब बीजेपी ने केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। एक बार फिर से गुजरात बीजेपी में कड़वाहट आने लगी और विधायक 3 साल में ही केशुभाई पटेल की रणनीति से नाराज होने लगे। ये बात जब पार्टी नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी को पता चली तो उन्होंने पार्टी के नेताओं की नाराजगी को समझते हुए बड़ा दांव खेला और साल 2001 में केशुभाई पटेल को हटाकर 'नरेंद्र दामोदर दास मोदी' को मुख्यमंत्री बनाया।
नरेंद्र मोदी के 7 अक्टूबर 2021 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद तकरीबन डेढ़ साल बाद ही राज्य में फिर से चुनाव होना था। तब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने साल 2002 का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड 49.90% वोट के साथ 127 सीटें जीतकर गुजरात में अपनी सरकार बनाई। इसके बाद बीजेपी ने अपना पूरा 5 साल का कार्यकाल बिना किसी मतभेद के पूरा किया। साल 2007 में गुजरात में चुनाव नियत समय पर हुआ, जिसमें बीजेपी ने 49.10% वोट पाकर 117 सीटे जीतीं और फिर सरकार बनाई।
मोदी के हटते ही कमजोर हुई बीजेपी
उसके बाद साल 2012 में विधानसभा चुनाव का चुनाव हुआ। गौर करने वाली ये है कि ये चुनाव नरेंद्र मोदी का एक मुख्यमंत्री के रूप में आखिरी चुनाव था। इस चुनाव में भी बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 47.90% वोट शेयर के साथ 115 सीटें जीती। इसके बाद साल 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और गुजरात में अपना कार्यभार आनंदी भाई पटेल को सौंप दिया। जिन्होंने 22 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
गौर करने वाली बात ये है कि नरेंद्र मोदी के सत्ता छोड़ते ही बीजेपी गुजरात में फिर से कमजोर होने लगी थी। पटेल आरक्षण आंदोलन की आग से पूरा राज्य सुलग उठा था। और साल 2017 के चुनाव में पार्टी को केवल 99 सीटें ही मिल सकी, हालांकि वोट प्रतिशत की बात करें तो वो 49.80% था। वहीं देखना अब है कि साल 2022 के इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी क्या नया रिकॉर्ड कायम करती है क्योंकि पीएम मोदी समेत कई बड़े दिग्गज नेताओं ने इस बार गुजरात चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी।
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