Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

नेताओं के बच्चे, फिल्मों में भी कच्चे

Filmon mein Neta: आइये ये कहानी शुरु करते हैं 2011 में आई एक फिल्म से, जिसका नाम था 'मिलें न मिलें हम।' इस फिल्म के हीरो थे रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान और हिरोइन थी कंगना रनौत। ये फिल्म बुरी तरह पिटी और चिराग पासवान का फिल्मी कैरियर भी पिट गया।

दूसरी ओर कंगना रनौत ने फिल्मों में भी अपना कैरियर बनाया और अब राजनीतिक कैरियर बनाने के लिए हिमाचल के मंडी से चुनावी मैदान में हैं। रामविलास पासवान का पुत्र होने के बावजूद चिराग फिल्मों में तो चल नहीं पाये, देखना यह होगा कि राजनीति में कितना चल पाते हैं।

Politicians flops in films

लेकिन चिराग इकलौते ऐसे नेतापुत्र नहीं हैं जो फिल्मों की ओर आये। साउथ में अगर फिल्मों के हीरो राजनीति की ओर आते हैं तो बॉलीवुड में नेताओं के बच्चे फिल्मों की ओर भी चले जाते हैं। इसमें रितेश देशमुख, भूमि पेडनेकर, संजय दत्त जैसे कुछ सफल नाम हैं तो ढेरों असफल लोगों की भी लिस्ट है।

रितेश देशमुख के पिता विलास राव देशमुख कांग्रेस नेता थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे, उनके दोनों भाई अमित व धीरज भी कांग्रेस के विधायक हैं। रितेश देशमुख भले ही कभी अपने कंधों पर फिल्म सुपरहिट करवाने लायक नहीं बन पाए, लेकिन तमाम मल्टीस्टारर फिल्मों में उनको लिया जाता है। उनकी अपनी एक जगह फिल्मी दुनिया में है। तमाम कॉमेडी फिल्मों में उनका रोल चर्चा में आया है। बावजूद इसके वो ए कैटगरी के स्टार नहीं बन पाए।

दूसरा नाम है भूमि पेडनेकर का। उनके बारे में मशहूर किया गया कि वो एक आम लड़की थी, जो यशराज फिल्म्स में काम करती थी। 'दम लगाके हइशा' में जब एक वजनदार हीरोइन की जरूरत पड़ी तो अचानक से उनकी लॉटरी लग गई। जबकि हकीकत ये है कि वो महाराष्ट्र के पूर्व गृह एवं श्रम मंत्री सतीश पेडनेकर की बेटी हैं।

भूमि की मां सुमित्रा पेडनेकर भी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस की नेता रह चुकी हैं। सतीश की मौत ओरल कैंसर से 2011 में हुई तो उनकी पत्नी ने तम्बाकू कम्पनियों के खिलाफ अभियान ही छेड़ दिया। भूमि की ताऱीफ है कि शक्ल और सेहत सामान्य होने के बावजूद उनके खाते में कुछ अच्छी हिट फिल्में हैं। फिर भी उन्हें ए ग्रेड हीरोइंस में नहीं गिना जाता है।

जो दो ए ग्रेड के हीरो अगर राजनीतिक परिवारों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आए तो वो हैं संजय दत्त और अभिषेक बच्चन। लेकिन उनके पिताओं ने राजनीति से पहले फिल्मी दुनिया में ही अपनी पहचान बनाई थी। अमिताभ ने तो राजनीति में बहुत छोटी पारी खेली थी, हालांकि जया बच्चन लगातार सपा से राज्यसभा सदस्य बनी हुई हैं।

संजय दत्त की मां नरगिस सरकारी कोटे से राज्यसभा गई थीं। उनके पिता भी सुनील दत्त भी सांसद रहे। हालांकि संजय दत्त बड़े स्टार साबित हुए, बीच में राजनीति में भी हाथ आजमाया लेकिन फिर लौट गए। अभिषेक बच्चन के खाते में उतनी कामयाबी नहीं आई लेकिन धूम, गुरू जैसी उनकी फिल्मों को आप भुला भी नहीं सकते।

फिल्म स्टार्स से नेता बने कुछ और फिल्मी सितारों के बच्चे भी फिल्मों में आए उनमें अक्षय खन्ना और सोनाक्षी सिन्हा का नाम प्रमुख है। हालांकि ना तो ये दोनों और ना ही इन दोनों के भाई यानी राहुल खन्ना और लव सिन्हा अपने पिताओं विनोद खन्ना और शत्रुघ्न के बाल बराबर भी साबित हुए।

अभिनेता से नेता बने राज बब्बर के भी बच्चे फिल्मी दुनिया के मैदान में उतरे, आर्य बब्बर और जूही बब्बर के साथ साथ स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर भी। लेकिन शायद प्रतीक ही हैं, जो अभी भी मैदान में टिके हुए हैं। बाकी दोनों कब आये, कब गये किसी को पता नहीं चला।

रितेश और भूमि जैसे विशुद्ध राजनीतिक परिवारों के बच्चों में कुछ और भी नाम हैं जो फिल्मी दुनिया से हार मानकर वापस लौट गए। इसमें चिराग पासवान के अलावा
बिहार से ही एक और विशुद्ध राजनीतिक परिवार का चेहरा है नेहा शर्मा और उनकी छोटी बहन आयशा शर्मा। इन दोनों के पिता अजीत शर्मा बिहार के भागलपुर से कांग्रेस विधायक हैं और सदन में पार्टी के नेता भी।

नेहा ने निफ्ट से कोर्स करने के बाद फैशन, मॉडलिंग और एक्टिंग को अपना कैरियर बनाया। तेलुगू फिल्म से शुरूआत की और क्रूक, क्या सुपर कूल हैं हम, यमला पगला दीवाना2, तुम बिन और तान्हाजी जैसी फिल्मों में काम किया। वहीं उनकी बहन आयशा के खाते में किंग फिशर केलेंडर गर्ल, कई म्यूजिक वीडियोज, कई सारे सुपरहिट एड और एक सुपरहिट फिल्म 'सत्यमेव जयते' में जॉन अब्राहम की हीरोइन बनना भी शामिल है। लेकिन उसके बाद उन्हें कोई बड़ी मूवी नहीं मिली। दोनों बहनें अभी भी मैदान में डटी हैं।

एक बड़ा ट्रेंड हिंदी फिल्मों में ये दिखा है कि कांग्रेस नेताओं के बच्चों ने बॉलीवुड में जगह बनाने की कोशिश ज्यादा की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कई बार केंद्रीय मंत्री रहे अर्जुन सिंह के पोते अरुणोदय सिंह भी उनमें शामिल हैं। उनके पिता अजय सिंह एमपी में मंत्री रह चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं, राज्य के कद्दावर नेता गिने जाते हैं।

अरूणोदय सिंह का विदेशी लहजा और काफी तगड़ा डीलडोल उन्हें ए ग्रेड के हीरो बनने से रोकता दिखता है, लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से लगातार मेहनत करते रहना, अपने रोल में जान डाल देने की वजह से वो सालों से फिल्मी दुनिया में टिके हुए हैं। उनकी कुछ चर्चित फिल्में रहीं 'जिस्म2' सनी लियोनी के साथ, 'मोहनजोदड़ो' हृतिक रोशन के साथ, 'मैं तेरा हीरो' वरुण धवन के साथ आदि।

हिमाचल के ही एक कांग्रेसी नेता के परिवार से आए हैं आयुष शर्मा, हालांकि वह सलमान की बहन से शादी करने के बाद घर-घर में जाना पहचाना चेहरा बन गए हैं। आयुष पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखराम के नाती हैं और मंडी से कांग्रेस विधायक अनिल शर्मा के बेटे। सलमान ने उनको लांच करने के लिए 'लव यात्री' और 'अंतिम' जैसी फिल्में बनाईं। अंतिम का निर्देशन तो महेश मांजरेकर के हाथ देकर खुद भी उसमें अहम रोल किया। फिर भी अभी आयुष के कैरियर को लेकर कुछ भी अंदाजा करना मुश्किल है। वहीं जगदीश टाइटलर के बेटे सिद्धार्थ टाइटलर फैशन की दुनिया में झंडे गाड़ रहे हैं।

बीजेपी के नेताओं के परिवार से लाल कृष्ण आडवानी की बेटी प्रतिभा आडवाणी को जरूर डॉक्यूमेंट्रीज या शॉर्ट फिल्में बनाने का शौक था, लेकिन पिता की सेहत के चलते उनका पूरा ध्यान उन्हीं में रहा और वो दिल्ली नहीं छोड़ पाईं। हां, अरुण जेटली की भतीजी रिद्धि डोगरा ने जरूर अपनी पहचान घर घर में बना ली, जो तमाम सीरियल, वेबसीरीज और फिल्मों में उनकी अच्छी एक्टिंग के बूते ही मुमकिन हो पाया।

हालांकि साउथ की फिल्मों में नेता परिवार से आनेवाले सुपरहिट ए ग्रेड हीरोज में महेश बाबू, जूनियर एनटीआर, अल्लू अर्जुन और अजीत एंटनी का नाम लिया जा सकता है। खासकर जूनियर एनटीआर का परिवार तो फिल्मों से राजनीति और फिर वापस फिल्मों में आने की कहानी है। वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता और केन्द्रीय रक्षा मंत्री रहे ए. के. एंटनी के दूसरे बेटे अजीत एंटनी मलयालम फिल्मों के सुपर स्टार हैं। ऐसे में लगता है कि हिंदी फिल्मों में आने वाले नेताओं के पुत्र पुत्रियों को कामयाब होने के लिए साउथ के सितारों से गुर सीखने चाहिए।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+