ED Raids: राजस्थान के चुनावी माहौल में अब ईडी की इंट्री

ED Raids: राजस्थान में सर्दियों के दिन शुरू हो ही रहे हैं और चुनाव की वजह से राजनीति गरमा रही है। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की एंट्री ने राजस्थान के राजनीतिक माहौल को और गरमाने का सामान बख्श दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस के विधायक ओमप्रकाश हुडला पर ईडी अपना शिकंजा कस रही है।

गहलोत और उनकी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भले ही कांग्रेस नेताओं के बचाव में कहते रहें कि केंद्र सरकार और बीजेपी उनकी जनलाभकारी योजनाओं से घबरा रही है और चुनाव हार रही है, इसलिए उनके नेताओं को परेशान करने के लिए छापे मारे जा रहे हैं, लेकिन राजस्थान की राजनीति के जानकार बताते हैं कि अगला नंबर कांग्रेस सरकार के मंत्री शांति धारीवाल और महेश जोशी का भी लग सकता है। दोनों पर सैकड़ों करोड़ रुपयों की सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।

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वैसे, तो ईडी की कारवाई कभी भी हो सकती है, लेकिन चुनावी माहौल में ये छापे पड़ने से राजनीतिक माहौल में गर्मी आ गई है और पूरी कांग्रेस एकजुट दिख रही है। मुख्यमंत्री गहलोत के कट्टर विरोधी सचिन पायलट भी इस मामले में उनके साथ खड़े दिख रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान में विधानसभा उम्मीदवारों की तीसरी सूची पर मशक्कत करते हुए अगली रणनीति पर तैयारी कर रहे थे कि 26 अक्टूबर की सुबह ईडी ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी और जयपुर में उनके सरकारी निवास सहित सीकर जिले में स्थित उनके गांव वाले घर पर भी छापेमारी शुरू कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर ईडी की यह कारवाई राजस्थान में पिछले साल हुए पेपर लीक मामले को लेकर है, जिसमें डोटासरा का नाम भी शामिल था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत को भी ईडी ने सम्मन भेजकर केवल एक दिन के नोटिस पर 27 अक्टूबर को पेश होने के लिए बुलावा भेज दिया।

वैभव गहलोत पर ईडी की यह कारवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम में सन 2011 में एक होटल के शेयर खरीदने का मामला है, जिसमें कथित तौर पर अनियमितताओं के आरोप है। निर्दलीय विधायक और मुख्यमंत्री के सलाहकार रहे ओमप्रकाश हुडला ने हाल ही में कांग्रेस की सदस्यता ली है और इस बार कांग्रेस से प्रत्याशी भी हैं। हुडला के होटल हुडला पार्क, महुआ निवास, रामकुटी ग्राम सहित अन्य ठिकानों पर ईडी ने 26 अक्टूबर को छापे मारे। ईडी की टीमें दौसा, जयपुर सहित कई जगहों पर हुडला के ठिकानों पर पहुंची थी। आरोप है कि हुडला के छोटे भाई हरिओम मीणा और एक डमी कैंडिडेट को जयपुर के शिवदासपुरा में एक एग्जाम सेंटर के बाहर से गिरफ्तार किया गया था।

राजस्थान में कांग्रेस नेताओं पर ईडी की कार्रवाई पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि राजस्थान में अपनी निश्चित हार को देखते हुए बीजेपी और केंद्र सरकार ने ईडी, सीबीआई और इन्कम टैक्स विभाग को अपने राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, लेकिन यह उनका आखरी दांव है, जो सफल नहीं होगा।

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी और अमित शाहजी भले ही मुझे टारगेट कर रहे हैं, लेकिन वे हमें डरा नहीं पाएंगे। वे परेशान हैं क्योंकि वे राजस्थान में सरकार गिरा नहीं पाए, जबकि उन्होंने पांच राज्यों में सरकार गिराकर अपनी सरकार बना ली। गहलोत ने यह भी कहा कि राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष पर छापों से हम डरने वाले नहीं हैं, ईडी की इस कारवाई के बावजूद हमारी सरकार बनेगी। इसके लिए उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण दिया और कहा कि वहां पर डीके शिवकुमार पर भी इसी तरह के कई हमले हुए और कर्नाटक में से बीजेपी गायब हो गई।

वहीं वैभव गहलोत का कहना है कि केंद्र सरकार अपनी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और हम जानते थे कि ये सब चुनाव से पहले होगा, क्योंकि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। वैभव ने कहा कि यह ईडी ने जिस मामले में उन्हें बुलाया है, वह तो 12 साल पुराना मामला है, जिस पर पहले भी जांच हो चुकी है और वे अपना जवाब दे चुके हैं। ईडी के इन छापों पर सचिन पायलट भी मुखर हैं। हालांकि राजस्थान की राजनीति में पायलट गहलोत के कट्टर विरोधी माने जाते हैं, लेकिन फिर भी गहलोत के बेटे वैभव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा पर ईडी की कारवाई के विरोध में उन्होंने कहा कि बीजेपी इस तरह के हथकंडों से कांग्रेस के हमारे नेताओं को नहीं डरा सकती। पायलट ने कहा है कि ईडी के ये छापे बीजेपी में घबराहट की निशानी है।

कांग्रेस चाहे कितना भी हंगामा करे, लेकिन ईडी का किसी पर भी कारवाई करने का अपना तरीका है। उसकी कार्रवाई का दायरा बहुत व्यापक है। ईडी को सरलता से समझना हो, तो यह केंद्र सरकार के अधीन एक ऐसी जांच एजेंसी है, जो अवैध धन को वैध करने के बारे में बहुचर्चित शब्द मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन से संबंधित अपराधों की जांच करती है। धनशोधन निवारण अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम जैसे कानूनों के तहत मिले अधिकारों पर अपने विशेषाधिकार के अनुरूप काम करती है।

ईडी अपनी कार्रवाई के लिए न तो समय देखती है और न ही अवसर। पिछले कुछ सालों में इसकी सक्रियता कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है, खासकर राजनीति से जुड़े लोगों पर ईडी की कारवाई पर उगलियां उठती रही हैं। लेकिन अवैध धन के लेन देन तथा उसे वैध करने की कोशिशों के ज्यादातर मामले भी राजनीतिकों के द्वारा ही होते रहे हैं। इसीलिए राजनेताओं पर आजकल ईडी के छापे ज्यादा पड़ रहे हैं, तो इसमें नया कुछ भी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहले राजनेताओं पर कार्रवाई ही नहीं होती थी, तो मामले बाहर भी नहीं आते थे। मगर राजनीति में आर्थिक पारदर्शिता व नेताओं को राजनीतिक आचरण में शुद्धता के लिए इस तरह की कार्रवाई जरूरी भी है, इसलिए ईडी जैसी संस्था को सभी पार्टियों के भ्रष्ट राजनेताओं पर कार्रवाई तेज करनी चाहिए।

कुल मिलाकर ईडी अब राजस्थान में सक्रिय है, जिससे कांग्रेस और कांग्रेसियों में हड़कंप मचा हुआ है। बड़े नेता बचाव के रास्ते ढूंढ रहे हैं, और कांग्रेस केंद्र सरकार पर सरकारी एजेंसियों को राजनीतिक हथियार बनाने के आरोप लगा रही है। मगर खबर है कि ईडी का यह ऑपरेशन आनेवाले दिनों में और विस्तार लेगा, क्योंकि एक बार जब ईडी आ जाती है, तो हर मामले की वह बहुत गहराई से जांच करती है और आगे से आगे लोग उसकी जकड़न में आते जाते हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत ने इसीलिए कहा है कि ईडी का यह टिड्डी दल की तरह हमला है। गहलोत ने कहा है कि सवाल मेरे बेटे या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का नहीं है, बल्कि ईडी ने पूरे देश में आतंक मचा रखा है। लेकिन सही मायने में देखें, तो ईडी की कारवाई एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस पर वह अपने तरीके से अपने समय पर काम करती रही है, फिर चाहे होली हो या दीवाली, विवाह के अवसर हो या चुनाव। अतः चुनाव के दिनों में छापे एक संयोग भी तो हो सकता है। फिर भी राजस्थान में ईडी के ताजा छापों व नोटिस को राजनीतिक नजरिये से देखा जाना भी वाजिब है, क्योंकि सरकार पर ईडी को अपने हक में इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं, फिर वक्त राजनीति का है और सवाल चुनाव में जीत का भी है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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